नई दिल्ली। गन्ना किसानों की मांगों और चीनी उद्योग से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए केंद्र सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में गठित यह समिति गन्ने के अधिक लाभकारी मूल्य, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) में बदलाव और मशीनों से कटाई के दौरान गन्ने के वजन में होने वाली कटौती जैसे अहम मुद्दों की जांच करेगी। समिति का गठन किसानों के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के मंत्रियों के बीच हुई बैठक के बाद किया गया है।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य गन्ने की खेती की लागत, चीनी उत्पादन के खर्च और मिलों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए किसानों की मांगों का आकलन करना है। समिति संबंधित पक्षों से चर्चा करने के बाद अपनी रिपोर्ट और सुझाव सक्षम अधिकारी को जल्द से जल्द सौंपेगी।
गन्ने के दाम और चीनी की कीमतों की होगी समीक्षा
समिति गन्ने की खेती में आने वाली लागत और दूसरे जरूरी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए किसानों को बेहतर रिटर्न देने की मांग की समीक्षा करेगी। इसके साथ ही चीनी की एक्स-मिल न्यूनतम बिक्री कीमत में संशोधन की मांग पर भी विचार किया जाएगा।
इस समीक्षा में चीनी के उत्पादन की लागत, बाजार में मिलने वाली कीमत और चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति को प्रमुख आधार बनाया जाएगा। एक्स-मिल कीमत वह दर होती है, जिस पर चीनी मिल से बिक्री की जाती है। इसमें बदलाव से जुड़े प्रस्तावों का आकलन करते समय किसानों और चीनी उद्योग, दोनों से संबंधित आर्थिक पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
मशीन से कटाई और गन्ने की तौल पर भी नजर
समिति के कामकाज में गन्ने की रिकवरी की जांच और रिपोर्टिंग की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा भी शामिल है। इसमें पारदर्शिता बढ़ाने और रिकवरी के आंकड़ों का सही तरीके से सत्यापन करने के उपाय तलाशे जाएंगे।
इसके अलावा, चीनी मिलों में गन्ने की तौल के मौजूदा तरीकों का आकलन किया जाएगा। खास तौर पर मशीनों से काटे गए गन्ने के वजन में की जाने वाली कटौती की जांच होगी। समिति यह भी पता लगाएगी कि मशीन से कटाई के कारण वास्तव में कितना नुकसान होता है और क्या वजन में कटौती की मौजूदा व्यवस्था उचित है। इस प्रक्रिया का किसानों को मिलने वाले भुगतान पर पड़ने वाले आर्थिक असर का भी मूल्यांकन किया जाएगा।
किसानों और उद्योग से जुड़े पक्षों से होगा विचार-विमर्श
समिति जरूरत के मुताबिक किसानों के प्रतिनिधियों, चीनी मिल संघों, राज्य सरकारों, विशेषज्ञों और अन्य संबंधित संगठनों से सलाह ले सकती है। इसका उद्देश्य अलग-अलग पक्षों की समस्याओं और सुझावों को समझकर व्यावहारिक सिफारिशें तैयार करना है।
समिति में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि आयुक्त, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के संयुक्त सचिव (चीनी) और उपभोक्ता मामले विभाग के संयुक्त सचिव (कानूनी माप विज्ञान) भी शामिल हैं।
समिति की सिफारिशों से गन्ने के मूल्य निर्धारण, चीनी की बिक्री कीमत, रिकवरी की जांच और गन्ने की तौल से जुड़ी व्यवस्थाओं पर आगे के फैसलों के लिए आधार मिल सकता है। हालांकि, इन मुद्दों पर अंतिम निर्णय समिति की रिपोर्ट और सरकार के विचार के बाद ही स्पष्ट होगा।