नई दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स (JPL) भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े आईपीओ में से एक लाने की तैयारी में है। कंपनी इस इश्यू के जरिए करीब 28,000 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। निवेशकों के सामने जियो खुद को केवल टेलीकॉम कंपनी नहीं, बल्कि डिजिटल सेवाओं, सॉफ्टवेयर, क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक के बड़े प्लेटफॉर्म के रूप में पेश कर रही है।
राजस्व और मुनाफे में मजबूत वृद्धि
वित्त वर्ष 2024 से 2026 के दौरान जियो प्लेटफॉर्म्स के राजस्व में सालाना 15.8 फीसदी, परिचालन लाभ में 17.8 फीसदी और शुद्ध मुनाफे में 18.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। कंपनी ने अपने नेटवर्क, स्पेक्ट्रम और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश किया है। आईपीओ से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में किए जाने की योजना है। इससे ब्याज खर्च घटाने और मुनाफे को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
सेंट्रम रिसर्च के विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत नेटवर्क, बड़े ग्राहक आधार और डिजिटल इकोसिस्टम के दम पर जियो आने वाले वर्षों में भी तेज वृद्धि दर्ज कर सकती है।
टैरिफ बढ़ोतरी से बढ़ सकता है ARPU
जियो की कमाई बढ़ाने में टैरिफ बढ़ोतरी अहम भूमिका निभा सकती है। सेंट्रम रिसर्च को अगले तीन से चार महीनों में टैरिफ में 12 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद है। इससे प्रति ग्राहक औसत राजस्व यानी ARPU में सुधार हो सकता है। इसके अलावा प्रीमियम प्लान, होम ब्रॉडबैंड और डिजिटल सेवाएं भी कंपनी की आय बढ़ाने के संभावित स्रोत हैं।
कंपनी के पास करीब 53.3 करोड़ ग्राहक हैं। वायरलेस ब्रॉडबैंड में इसकी हिस्सेदारी लगभग 50 फीसदी और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड में 42.6 फीसदी बताई गई है।
IPO की कीमत पर क्या है ब्रोकरेज की राय?
जियो प्लेटफॉर्म्स ने 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर का मूल्य दायरा प्रस्तावित किया है। इस कीमत पर कंपनी का मूल्यांकन वित्त वर्ष 2026 की प्रति शेयर आय के करीब 31.7 से 33.3 गुना बैठता है।
एमके रिसर्च ने कंपनी की बाजार स्थिति, विकास की संभावनाओं और परिचालन क्षमता के आधार पर आईपीओ को सब्सक्राइब करने की सलाह दी है। वहीं, नोमूरा रिसर्च के अनुसार, नए ग्राहक जोड़ने की रफ्तार धीमी होने पर टैरिफ बढ़ोतरी कमाई का प्रमुख जरिया बन सकती है।
AI और डिजिटल सेवाओं से भविष्य की उम्मीद
जियो अपने नेटवर्क, राउटर, सेट-टॉप बॉक्स, ऑपरेटिंग सिस्टम और डिजिटल ऐप्स पर काम कर रही है। इससे बाहरी तकनीकी कंपनियों पर निर्भरता घटाने और लागत नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी नेटवर्क ऑटोमेशन और डिजिटल सेवाओं के जरिए विस्तार की संभावनाएं तलाश सकती है।
हालांकि, आईपीओ में निवेश से पहले कंपनी के मूल्यांकन, प्रतिस्पर्धा, टैरिफ बढ़ोतरी की वास्तविक संभावना और भविष्य की कमाई से जुड़े जोखिमों को समझना जरूरी है। ब्रोकरेज की राय संभावनाओं पर आधारित है, रिटर्न की गारंटी नहीं।