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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > बाज़ार > FMCG > 6 महीने तक के बच्चों के फूड प्रोडक्ट्स में चीनी पर लग सकती है रोक, FSSAI का नया प्रस्ताव
FMCG

6 महीने तक के बच्चों के फूड प्रोडक्ट्स में चीनी पर लग सकती है रोक, FSSAI का नया प्रस्ताव

Last updated: 19/10/2026 7:04 PM
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Manu Tiwari
ByManu Tiwari
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शिशु आहार में सुक्रोज और फ्रुक्टोज के इस्तेमाल पर रोक लगाने के FSSAI के प्रस्ताव से जुड़ी जानकारी।
FSSAI ने छह महीने तक के शिशुओं के कुछ खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रुक्टोज मिलाने पर रोक का प्रस्ताव रखा है।
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नई दिल्ली। घर में नवजात शिशु का आगमन खुशियों के साथ कई जिम्मेदारियां भी लेकर आता है। माता-पिता बच्चे के खान-पान से लेकर उसकी सेहत तक हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखते हैं। ऐसे में बच्चों को दिए जाने वाले फूड प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता और उनमें मौजूद सामग्री की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी दिशा में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इसके तहत छह महीने तक के शिशुओं के लिए बनाए जाने वाले कुछ खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रुक्टोज मिलाने पर रोक लगाने की बात कही गई है।

अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो शिशु आहार बनाने वाली कंपनियों को अपने उत्पादों की सामग्री में बदलाव करना पड़ सकता है। इसका उद्देश्य शुरुआती उम्र में बच्चों को अनावश्यक अतिरिक्त चीनी से बचाना और उनके पोषण को बेहतर बनाना है।

क्या हैं सुक्रोज और फ्रुक्टोज?

सुक्रोज और फ्रुक्टोज शर्करा के प्रकार हैं, जिनका इस्तेमाल खाद्य पदार्थों में मिठास के लिए किया जाता है। सुक्रोज सामान्य चीनी का प्रमुख घटक है, जबकि फ्रुक्टोज प्राकृतिक रूप से फलों और शहद में भी पाया जाता है। खाद्य उत्पादों में इनका इस्तेमाल स्वाद और मिठास बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।

हालांकि, शिशुओं के लिए तैयार किए जाने वाले खाद्य पदार्थों में इन शर्कराओं का इस्तेमाल किस मात्रा और किन परिस्थितियों में किया जाता है, यह उनकी उम्र और उत्पाद की प्रकृति के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

क्यों जरूरी है शुरुआती छह महीने का पोषण?

जीवन के शुरुआती छह महीने शिशु के शारीरिक विकास और पोषण के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, शिशुओं को जन्म के बाद पहले छह महीने तक केवल मां का दूध देने की सलाह दी जाती है, जब तक कोई चिकित्सकीय कारण अलग व्यवस्था की मांग न करे।

इस उम्र में शिशु का पाचन तंत्र और शरीर तेजी से विकसित हो रहा होता है। इसलिए उसके खान-पान में अनावश्यक चीनी से बचना और उम्र के अनुरूप पोषण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। FSSAI का प्रस्ताव भी इसी व्यापक उद्देश्य से जुड़ा है।

मौजूदा नियमों में क्या बदलाव होगा?

मौजूदा प्रावधानों के तहत शिशु आहार में कार्बोहाइड्रेट के स्रोत के रूप में लैक्टोज और ग्लूकोज पॉलिमर का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ शर्तों के तहत सुक्रोज और फ्रुक्टोज मिलाने की भी अनुमति रही है। नए प्रस्ताव में छह महीने तक के शिशुओं के लिए निर्धारित खाद्य उत्पादों में इन दोनों शर्कराओं को मिलाने पर रोक लगाने की बात कही गई है।

यदि यह बदलाव लागू होता है, तो संबंधित कंपनियों को अपने फॉर्मूले और उत्पादों की सामग्री में संशोधन करना पड़ सकता है।

अभी अंतिम फैसला नहीं

यह ध्यान रखना जरूरी है कि फिलहाल यह एक प्रस्ताव है, अंतिम नियम नहीं। FSSAI ने इस पर सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 60 दिनों का समय दिया है। प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।

इस प्रस्ताव का अंतिम स्वरूप तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि किन उत्पादों पर इसका सीधा असर पड़ेगा और कंपनियों को किन बदलावों का पालन करना होगा। तब तक माता-पिता को शिशु के खान-पान के संबंध में डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।

TAGGED:baby food productsbaby food safetychild healthfood safety IndiafructoseFSSAIFSSAI new ruleshealth newsindustrialempireinfant food regulationsinfant nutritionsucrosesugar restriction
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