इनवेस्को म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए नई डेट स्कीम पेश करने की तैयारी में है। प्रस्तावित स्कीम का नाम इनवेस्को इंडिया फाइनेंशियल सर्विसेज डेट फंड है। ड्राफ्ट दस्तावेज के अनुसार, इस फंड का निवेश मुख्य रूप से बैंक, बीमा कंपनियों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और वित्तीय सेवा क्षेत्र की अन्य कंपनियों के बॉन्ड और कर्ज से जुड़े साधनों में किया जाएगा। इस स्कीम के जरिए निवेशकों को वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों से जुड़े डेट इंस्ट्रूमेंट में निवेश का विकल्प मिलेगा।
यह एक ओपन-एंडेड डेट म्यूचुअल फंड होगा। इसका मतलब है कि स्कीम में निवेश की सुविधा उपलब्ध होने के बाद निवेशक कारोबारी दिनों में लागू नियमों के अनुसार यूनिट खरीद और बेच सकेंगे। यूनिट की कीमत उस दिन के नेट एसेट वैल्यू (NAV) के आधार पर तय होगी। फंड का उद्देश्य कम से मध्यम अवधि में निवेशकों के लिए आय अर्जित करना है। हालांकि, इसमें मिलने वाले रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होगी।
कहां निवेश किया जाएगा पैसा?
ड्राफ्ट के मुताबिक, फंड अपनी कुल निवेश राशि का 80 से 100 फीसदी हिस्सा बैंक, NBFC और वित्तीय सेवा क्षेत्र की अन्य कंपनियों के बॉन्ड तथा डेट इंस्ट्रूमेंट में लगा सकता है। निवेश के लिए मुख्य रूप से अच्छी क्रेडिट रेटिंग वाले साधनों पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें AA+ या उससे बेहतर रेटिंग वाले कॉरपोरेट बॉन्ड और A1+ रेटिंग वाले मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट शामिल हो सकते हैं।
इसके अलावा, फंड सरकारी सिक्योरिटीज और ट्रेजरी बिल में भी निवेश कर सकेगा। वित्तीय सेवा क्षेत्र से बाहर की कंपनियों के डेट इंस्ट्रूमेंट में अधिकतम 20 फीसदी निवेश का प्रावधान है। वहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) की यूनिट में अधिकतम 10 फीसदी निवेश किया जा सकता है।
₹1,000 से शुरू होगा निवेश
प्रस्तावित स्कीम के न्यू फंड ऑफर (NFO) में न्यूनतम 1,000 रुपये से निवेश किया जा सकेगा। इसके बाद निवेशक 1 रुपये के गुणक में अतिरिक्त राशि लगा सकेंगे। नियमित निवेश के लिए SIP का विकल्प भी उपलब्ध होगा। मासिक SIP के लिए न्यूनतम राशि 1,000 रुपये और तिमाही SIP के लिए 2,000 रुपये रखी गई है।
स्कीम में एग्जिट लोड शून्य प्रस्तावित है। इसका मतलब है कि यूनिट बेचने पर अलग से एग्जिट लोड नहीं लगेगा। हालांकि, अन्य लागू शुल्क और खर्च निवेश पर असर डाल सकते हैं।
कितना जोखिम होगा और कौन करेगा प्रबंधन?
इस फंड में ब्याज दरों में बदलाव और बॉन्ड जारी करने वाली कंपनियों की कर्ज चुकाने की क्षमता से जुड़े जोखिम रहेंगे। ब्याज दर बढ़ने या किसी कंपनी की वित्तीय स्थिति कमजोर होने पर निवेश की वैल्यू प्रभावित हो सकती है। अच्छी क्रेडिट रेटिंग जोखिम का आकलन करने में मदद करती है, लेकिन नुकसान की आशंका पूरी तरह खत्म नहीं करती।
प्रस्तावित स्कीम का प्रबंधन विकास गर्ग और गौरव जखोटिया करेंगे। वे कंपनियों की वित्तीय स्थिति, क्रेडिट क्वालिटी और ब्याज दरों के रुझान को ध्यान में रखकर निवेश संबंधी फैसले लेंगे।
निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि यह जानकारी ड्राफ्ट दस्तावेज पर आधारित है। NFO की तारीख, अंतिम शर्तों और अन्य विवरणों की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेज जारी होने पर करनी चाहिए। निवेश से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य, निवेश की अवधि और जोखिम सहने की क्षमता का आकलन करना जरूरी है।