आजकल लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर पर काम करने के कारण आंखों में थकान, जलन, भारीपन और लालिमा की समस्या बढ़ रही है। कई लोग इसे सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि इसके पीछे आंखों का सूखापन, एलर्जी, संक्रमण या चश्मे का गलत नंबर भी हो सकता है। समय रहते लक्षणों को पहचानना और आंखों की देखभाल करना जरूरी है।
आंखों में सूखापन क्यों बढ़ रहा है?
आंखों की सतह पर आंसुओं की एक पतली परत होती है, जो उन्हें नम रखती है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने पर पलकें झपकाने की गति कम हो सकती है, जिससे आंखों की नमी घटने लगती है। इसके कारण जलन, किरकिरापन और धुंधला दिखाई देने जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
एसी की सीधी हवा, धूल, धुआं और शुष्क वातावरण भी आंखों का सूखापन बढ़ा सकते हैं। यदि लगातार परेशानी बनी रहे, तो नेत्र विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।
एलर्जी और संक्रमण के लक्षण पहचानें
आंखों में खुजली, लालिमा, पानी आना और पलकों में सूजन एलर्जी के संकेत हो सकते हैं। वहीं, कुछ संक्रमणों में आंखों से चिपचिपा स्राव निकल सकता है और सुबह पलकें चिपकी हुई मिल सकती हैं।
आंखों को बार-बार रगड़ने और बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप्स इस्तेमाल करने से बचें। तेज दर्द, रोशनी सहन न होना या अचानक नजर कम होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
गलत चश्मा भी हो सकता है कारण
चश्मे का गलत नंबर, लंबे समय तक नजदीक की वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करना और कॉन्टैक्ट लेंस का गलत इस्तेमाल आंखों में थकान पैदा कर सकता है। बार-बार सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना या पढ़ते समय परेशानी होने पर आंखों की जांच कराएं।
अपनाएं 20-20-20 नियम
स्क्रीन पर काम करते समय हर 20 मिनट बाद लगभग 20 फीट दूर रखी वस्तु को कम से कम 20 सेकंड तक देखें। इससे आंखों के तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है। स्क्रीन की चमक उचित रखें, नियमित ब्रेक लें और पलकें झपकाना न भूलें।
खानपान और नींद का रखें ध्यान
गाजर, शकरकंद, हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, मेवे और संतुलित आहार आंखों के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हैं। पर्याप्त नींद लें और शरीर में पानी की सामान्य जरूरत पूरी करें। बिना चिकित्सकीय सलाह के विटामिन सप्लीमेंट लेने से बचें।
कब जरूरी है डॉक्टर की सलाह?
यदि आंखों में लगातार जलन, लालिमा, खुजली या धुंधलापन बना रहता है, तो नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लें। अचानक नजर कम होना, तेज दर्द या आंख में चोट लगना आपात स्थिति हो सकती है। नियमित जांच से कुछ ऐसी आंखों की बीमारियों का भी पता चल सकता है, जिनके शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं होते।