रोजमर्रा के इस्तेमाल का सामान बनाने वाली कंपनियों के लिए वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर 2026 के नतीजे मिले-जुले रहने की उम्मीद है। साबुन, शैंपू, नारियल तेल और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों की मांग से कंपनियों की बिक्री को सहारा मिल सकता है। हालांकि, कच्चे माल और पैकेजिंग की बढ़ती कीमतों के कारण उनके मुनाफे पर दबाव बना रह सकता है। डाबर इंडिया, मैरिको और गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी प्रमुख कंपनियों के कारोबारी अपडेट से भी लागत का दबाव सामने आया है।
बिक्री बढ़ने के बावजूद मुनाफे में चुनौती
ब्रोकरेज फर्म ICICI डायरेक्ट के मुताबिक, सितंबर तिमाही में कई FMCG कंपनियों की आय में दो अंकों की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके बावजूद ऑपरेटिंग मुनाफे की वृद्धि बिक्री के मुकाबले धीमी रहने की आशंका है।
दरअसल, कच्चे तेल से बनने वाले उत्पादों का इस्तेमाल प्लास्टिक पैकेजिंग, साबुन, शैंपू और कई घरेलू उत्पादों में होता है। इनकी कीमतें बढ़ने से कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ जाती है। इसके अलावा पाम ऑयल, चीनी और अन्य जरूरी कच्चे माल की कीमतें भी कंपनियों के खर्च को प्रभावित कर रही हैं।
कम बारिश से ग्रामीण मांग पर असर की आशंका
FMCG कंपनियों के सामने दूसरी चुनौती ग्रामीण बाजारों की मांग है। देश के कुछ हिस्सों में कम बारिश और खेती से जुड़ी अनिश्चितता ग्रामीण परिवारों की आय को प्रभावित कर सकती है। इसका असर रोजमर्रा के सामान की खरीदारी पर पड़ने की आशंका है।
वहीं, खाद्य पदार्थों की महंगाई बढ़ने से शहरी ग्राहकों का बजट भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे में कंपनियों के लिए बिक्री बढ़ाने के साथ मुनाफे को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
डाबर और गोदरेज के सामने लागत की चुनौती
डाबर इंडिया ने अपने कारोबारी अपडेट में बताया कि महंगे कच्चे माल का दबाव सितंबर तिमाही में भी बना रहा। घरेलू देखभाल, व्यक्तिगत देखभाल और स्वास्थ्य उत्पादों से जुड़े कारोबार की लागत बढ़ने से ऑपरेटिंग मार्जिन प्रभावित हुआ है। कंपनी कीमतों में बदलाव और खर्चों पर नियंत्रण के जरिए इस दबाव को कम करने की कोशिश कर रही है।
वहीं, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने भी कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों, पाम ऑयल और अन्य कच्चे माल की बढ़ती कीमतों को चुनौती बताया है। कंपनी को इसके बावजूद तिमाही में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।
मैरिको को मिल सकता है खोपरे की कीमतों में गिरावट का फायदा
मैरिको की स्थिति कुछ बेहतर रह सकती है। कंपनी के मुताबिक, नारियल तेल बनाने में इस्तेमाल होने वाले खोपरे की कीमतें अपने ऊपरी स्तर से करीब 35 फीसदी नीचे बनी हुई हैं। इससे कंपनी के ग्रॉस मार्जिन को सहारा मिलने की उम्मीद है। ज्यादा मुनाफे वाले उत्पादों की बिक्री बढ़ना भी कंपनी के लिए फायदेमंद हो सकता है।
क्या महंगे होंगे रोजमर्रा के सामान?
कच्चे तेल, पाम ऑयल और पैकेजिंग सामग्री की ऊंची कीमतों से निपटने के लिए कंपनियां चुनिंदा उत्पादों के दाम बढ़ाने, खर्च घटाने और बेहतर मुनाफे वाले उत्पादों पर ध्यान दे रही हैं। हालांकि, सभी उत्पादों की कीमतें बढ़ेंगी, यह तय नहीं है।
आने वाले समय में FMCG कंपनियों के प्रदर्शन पर कच्चे माल की कीमतों, ग्रामीण मांग और ग्राहकों की खरीदारी क्षमता का असर महत्वपूर्ण रहेगा।