भारतीय खेती में मजदूरों की कमी, डीजल की बढ़ती कीमत और कृषि उपकरणों का महंगा रखरखाव किसानों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। इन समस्याओं का तकनीकी समाधान तलाशते हुए IIT बॉम्बे के पूर्व छात्रों ऐश्वर्या रामाकृष्णन और केदार गोखले ने इलेक्ट्रिक कृषि मशीनों की दिशा में कदम बढ़ाया। दोनों ने मिलकर बालिस्टो एग्रीटेक (Balisto Agritech) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य खेती को कम खर्चीला, सुविधाजनक और आधुनिक बनाना है। कंपनी ने अपने शुरुआती कारोबारी सफर में करीब 70 लाख रुपये का राजस्व दर्ज किया है।
कॉर्पोरेट अनुभव से निकला कृषि नवाचार का विचार
ऐश्वर्या और केदार वर्ष 2010 में IIT बॉम्बे से पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। ऐश्वर्या ने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से MBA किया और महिंद्रा समूह के फार्म इक्विपमेंट कारोबार में काम करने का अनुभव हासिल किया। दूसरी ओर, केदार UPSC परीक्षा दो बार पास करने के बाद कॉर्पोरेट क्षेत्र में लौटे और स्विगी में वाइस प्रेसिडेंट (ऑपरेशंस) तक पहुंचे।
कृषि और जलवायु से जुड़ी समस्याओं में रुचि रखने वाले इन दोनों साथियों ने किसानों की वास्तविक जरूरतों को समझने के लिए उनसे बातचीत की। इसी प्रक्रिया में उन्हें महसूस हुआ कि छोटे और मध्यम किसानों के लिए ऐसी मशीनों की जरूरत है, जो ईंधन का खर्च घटाने के साथ शारीरिक मेहनत भी कम कर सकें। फरवरी 2024 में हायर ऑर्बिट एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड के तहत कंपनी का पंजीकरण हुआ।
इलेक्ट्रिक पावर टिलर है प्रमुख उत्पाद
बालिस्टो एग्रीटेक ने 13 हॉर्सपावर क्षमता वाला इलेक्ट्रिक मल्टीपर्पस पावर टिलर ‘बालिस्टो 130 Pro’ पेश किया है। इसे गन्ना, कपास, धान, हल्दी और अदरक जैसी फसलों में जुताई, निराई-गुड़ाई तथा मिट्टी चढ़ाने जैसे कामों के लिए तैयार किया गया है। इसकी कार्य चौड़ाई को 2 से 5 फीट के बीच समायोजित किया जा सकता है, जिससे अलग-अलग फसलों और खेतों में इसका इस्तेमाल संभव होता है।
मशीन में दो अलग की जा सकने वाली 4.6 kWh क्षमता की LFP लिथियम-आयन बैटरियां दी गई हैं। कंपनी ने इसमें स्मार्ट कंट्रोल यूनिट और IoT तकनीक का भी इस्तेमाल किया है। सेंसर के माध्यम से मशीन का डेटा सर्वर तक पहुंचता है, जिससे उसकी निगरानी और सर्विसिंग में मदद मिल सकती है। ऑपरेटर की सुविधा के लिए कंपन कम रखने की व्यवस्था और आपातकालीन सुरक्षा लीवर भी दिया गया है।
डीलर नेटवर्क से किसानों तक पहुंच
कंपनी ने सीधे ग्राहकों को बेचने के बजाय डीलर आधारित मॉडल अपनाया है। इससे किसानों को मशीन खरीदने के साथ स्थानीय स्तर पर मरम्मत और बिक्री के बाद की सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। महाराष्ट्र में कंपनी के 15 डीलर हैं। इसके अलावा, किराये पर कृषि मशीनें उपलब्ध कराने वाले उद्यमियों के जरिए भी उपकरण किसानों तक पहुंच रहे हैं।
आगे कंपनी रिमोट-कंट्रोल से चलने वाली मशीनों, स्प्रेयर और ट्रॉली जैसे अतिरिक्त उपकरणों पर काम करने की योजना बना रही है। बैटरी-एज-ए-सर्विस मॉडल भी उसके संभावित विस्तार का हिस्सा है। यदि यह तकनीक किसानों के लिए लागत और इस्तेमाल के लिहाज से उपयोगी साबित होती है, तो इलेक्ट्रिक कृषि उपकरण पारंपरिक खेती में बदलाव लाने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।