परफ्यूम आज रोजमर्रा की ग्रूमिंग का अहम हिस्सा बन चुका है। ऑफिस जाना हो या किसी समारोह में शामिल होना, बहुत से लोग तैयार होने के बाद परफ्यूम लगाना पसंद करते हैं। लेकिन क्या रोजाना इस्तेमाल होने वाला यह उत्पाद शरीर के हार्मोन पर भी असर डाल सकता है? कॉस्मेटिक्स में मौजूद कुछ रसायनों को लेकर वैज्ञानिकों की चिंता ने इस सवाल को चर्चा में ला दिया है।
हार्मोनल सिस्टम पर कैसे पड़ सकता है असर?
हमारे शरीर में हार्मोन वृद्धि, मेटाबॉलिज्म, प्रजनन, नींद और ब्लड शुगर जैसी कई प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। कुछ रसायन इस व्यवस्था में हस्तक्षेप कर सकते हैं। ऐसे पदार्थों को एंडोक्राइन डिसरप्टर्स कहा जाता है। हालांकि, किसी रसायन में नुकसान पहुंचाने की क्षमता होना और सामान्य इस्तेमाल से बीमारी होना अलग-अलग बातें हैं।
फ्थैलेट्स और पैराबिंस पर क्यों हो रही है चर्चा?
फ्थैलेट्स रसायनों के एक समूह का नाम है। कुछ फ्थैलेट्स का इस्तेमाल सुगंध वाले उत्पादों में खुशबू को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए किया जाता रहा है। कुछ रसायनों पर हुए अध्ययनों में हार्मोनल गतिविधि और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े संभावित प्रभावों के संकेत मिले हैं।
वहीं, पैराबिंस का इस्तेमाल कुछ कॉस्मेटिक्स में प्रिजर्वेटिव के रूप में किया जाता है। कुछ पैराबिंस में कमजोर एस्ट्रोजन जैसी गतिविधि देखी गई है। लेकिन हर परफ्यूम में ये रसायन मौजूद हों, यह जरूरी नहीं है। उत्पाद की वास्तविक संरचना उसके फॉर्मूलेशन पर निर्भर करती है।
क्या गर्दन पर परफ्यूम लगाना खतरनाक है?
गर्दन पर परफ्यूम लगाने को लेकर यह चिंता जताई जाती है कि त्वचा के जरिए रसायन शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। हालांकि, किसी पदार्थ का त्वचा से अवशोषण उसकी प्रकृति, मात्रा और उत्पाद की संरचना पर निर्भर करता है। केवल गर्दन पर परफ्यूम लगाने से हार्मोन बिगड़ने का ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
परफ्यूम स्प्रे करते समय कुछ वाष्पशील कार्बनिक यौगिक हवा में फैल सकते हैं। इनसे संवेदनशील लोगों को नाक या आंखों में जलन, सिरदर्द अथवा सांस संबंधी परेशानी हो सकती है।
परफ्यूम का इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी
परफ्यूम को पूरी तरह छोड़ना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है। कुछ आसान सावधानियां अपनाकर अनावश्यक संपर्क कम किया जा सकता है।
- परफ्यूम का इस्तेमाल सीमित मात्रा में करें।
- चेहरे के पास सीधे स्प्रे करने से बचें और हवादार जगह पर लगाएं।
- संवेदनशील त्वचा होने पर उत्पाद की सामग्री जांचें।
- खुजली, लालिमा या जलन होने पर इस्तेमाल बंद कर दें।
- अस्थमा या खुशबू से संवेदनशीलता होने पर तेज सुगंध वाले उत्पादों से बचें।
क्या है विशेषज्ञों की सलाह?
फिलहाल ऐसा ठोस प्रमाण नहीं है कि सामान्य मात्रा में परफ्यूम लगाने से हर व्यक्ति में हार्मोनल असंतुलन हो जाता है। फिर भी, उत्पादों की सामग्री के प्रति जागरूक रहना जरूरी है। ‘नेचुरल’ या ‘हर्बल’ लिखा होने का मतलब भी यह नहीं कि उत्पाद हर व्यक्ति के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। सही जानकारी, सीमित इस्तेमाल और शरीर की प्रतिक्रिया पर ध्यान देना सबसे बेहतर तरीका है।