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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > फर्श से अर्श तक > गांव से ग्रोथ तक: धर्मेंद्र अस्थाना ने कैसे इंटरलॉकिंग टाइल्स और पौधों से रचा अपना इंडस्ट्रियल सपना
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गांव से ग्रोथ तक: धर्मेंद्र अस्थाना ने कैसे इंटरलॉकिंग टाइल्स और पौधों से रचा अपना इंडस्ट्रियल सपना

Last updated: 21/07/2025 4:29 PM
By
Industrial empire correspondent
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धर्मेंद्र अस्थाना - विद्धि श्यामा, माल ब्लॉक, जिला लखनऊ
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लखनऊ। गांव की पगडंडियों से लेकर इंटरलॉकिंग टाइल्स की फैक्ट्री तक – धर्मेंद्र कुमार अस्थाना की यह कहानी बताती है कि सही सोच, प्रयास और सरकारी सहयोग से गांव का युवा भी उद्यमिता में अपनी जगह बना सकता है।

शुरुआत ट्रेडिंग से, सोच बनी इंडस्ट्री की
धर्मेंद्र बताते हैं, “बिजनेस करने से पहले हमें समझना था कि प्रोडक्ट कैसे बिकेगा।” इसी सोच के साथ उन्होंने ट्रेडिंग शुरू की। पंचायत, तहसील और लोकल मार्केट्स में लोगों से इंटरेक्शन किया। इस दौरान उन्होंने देखा कि गांवों में सड़कों और गलियों में इंटरलॉकिंग टाइल्स की भारी मांग है।

MSME की मदद से सपना बना प्रोजेक्ट
इंटरलॉकिंग टाइल्स के क्षेत्र में कदम रखने से पहले उन्होंने पूरी रिसर्च की और MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय) से संपर्क किया। MSME से उन्हें जरूरी तकनीकी व व्यावसायिक मार्गदर्शन मिला – जैसे कि वेंडर की जानकारी, मशीनों की खरीद, रॉ मटेरियल की सोर्सिंग और प्रोजेक्ट रिपोर्ट की तैयारी। “MSME की मदद से हम जान पाए कि मैन्युफैक्चरिंग कैसे करनी है, भविष्य में आने वाली चुनौतियों का समाधान कैसे करना है और खुद को इंडस्ट्री की तरह कैसे खड़ा करना है,” धर्मेंद्र कहते हैं।

कोरोना के बाद भी खड़ा रहा धर्मेंद्र का बिजनेस
कोविड काल में जब अधिकांश कारोबार ठप हो रहे थे, धर्मेंद्र अपने ज्ञान और प्लानिंग की बदौलत टिके रहे। “आज हमारे पास एक लाख से ज़्यादा टाइल्स तैयार हैं जो पहले से बुक हैं,” वे गर्व से बताते हैं।

सिर्फ टाइल्स नहीं, हरियाली की भी पहल
इंटरलॉकिंग टाइल्स के साथ-साथ धर्मेंद्र ने “ग्रीनवे नर्सरी” नाम से एक फर्म भी शुरू की, जो गांवों में हरियाली लाने का काम करती है। वे चाहते हैं कि जहां भी उनकी टाइल्स लगें, वहां पेड़ भी लगें। “हरियाली से ही जीवन है, और पेड़ों से गांव सुंदर लगते हैं,” उनका मानना है।

MSME बना मजबूत सहारा
धर्मेंद्र की सफलता की कहानी MSME की उस सोच को साकार करती है, जिसमें ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर और उद्यमी बनाना मुख्य उद्देश्य है।
“अगर MSME का मार्गदर्शन न मिला होता, तो शायद हम इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाते,” धर्मेंद्र मुस्कराते हुए कहते हैं।

Impact Summary:
• ग्रामीण क्षेत्र में इंटरलॉकिंग टाइल्स की यूनिट स्थापित
• MSME की मदद से तकनीकी और वित्तीय मार्गदर्शन मिला
• ‘ग्रीनवे नर्सरी’ के माध्यम से पर्यावरण की दिशा में सकारात्मक पहल
• कोविड काल में भी बिजनेस को टिकाए रखा और ग्रोथ हासिल की।

TAGGED:FarshSeArshTakFeaturedIndustrial EmpireInterlocking TilesMSMEMSME Growth in Indiasuccess story
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