देश की अग्रणी विंड एनर्जी सॉल्यूशन कंपनी सुजलॉन एनर्जी को वित्त वर्ष 2025-26 का सबसे बड़ा ऑर्डर हासिल हुआ है। कंपनी ने मंगलवार को स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी दी कि उसे टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड (TPREL) से 838 मेगावाट की परियोजना का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर कंपनी के फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी (FDRE) प्रोजेक्ट्स का हिस्सा है। यह ऑर्डर सुजलॉन के इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा ऑर्डर है। इससे पहले कंपनी को NTPC ग्रीन एनर्जी से 1,544 मेगावाट का ऑर्डर मिला था।
भारत की ऊर्जा यात्रा में अहम कदम
सुजलॉन एनर्जी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह प्रोजेक्ट भारत की ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) यात्रा में बेहद अहम साबित होगा। FDRE आधारित विंड सिस्टम अब ग्रिड-स्टेबल और 24/7 क्लीन एनर्जी देने के बड़े समाधान के रूप में सामने आ रहे हैं। इस साझेदारी को सुजलॉन की अगली पीढ़ी की तकनीक और टाटा पावर की ग्रीन एनर्जी विज़न का मेल बताया जा रहा है। कंपनी का मानना है कि यह प्रोजेक्ट ‘मेड इन इंडिया’ इनोवेशन और देश के नवीकरणीय ऊर्जा मिशन को और मज़बूती देगा।
किन राज्यों में लगेंगे विंड टर्बाइन?
838 मेगावाट की इस परियोजना के तहत सुजलॉन की नई पीढ़ी की S144 विंड टर्बाइन लगाई जाएंगी, जिनकी क्षमता प्रति यूनिट 3.15 मेगावाट होगी। कुल 266 टर्बाइन तीन राज्यों में स्थापित होंगी।
कर्नाटक – 302 मेगावाट
महाराष्ट्र – 271 मेगावाट
तमिलनाडु – 265 मेगावाट
यह प्रोजेक्ट NTPC और SJVN को मिले FDRE बिड्स का हिस्सा भी है, जिससे यह भारत के कई बड़े ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स से जुड़ता है।
कंपनी के टॉप मैनेजमेंट की प्रतिक्रिया
सुजलॉन ग्रुप के वाइस चेयरपर्सन गिरीश तांती ने कहा, “टाटा पावर रिन्यूएबल का लक्ष्य 2045 तक 100 फीसदी क्लीन पावर हासिल करना है। इस महत्वाकांक्षी सफर में अपनी ‘मेड इन इंडिया’ तकनीक के साथ साझेदारी करना हमारे लिए गर्व की बात है। यह तीसरा रिपीट ऑर्डर हमारी साझा प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।” वहीं, कंपनी के सीईओ जेपी चलसानी ने कहा, “टाटा पावर रिन्यूएबल की डिमांड हमेशा एडवांस तकनीक और मजबूत एग्जीक्यूशन क्षमता की रहती है। यह पूरे उद्योग के लिए बेंचमार्क सेट करता है। इस साझेदारी से यह साफ है कि सुजलॉन अपनी इनोवेशन और निष्पादन क्षमता के बल पर एक भरोसेमंद साझेदार बना हुआ है।”
सुजलॉन का ग्लोबल प्रेजेंस
सुजलॉन एनर्जी सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सक्रिय है। अब तक 17 देशों में कंपनी ने 21 गीगावाट से ज्यादा विंड एनर्जी क्षमता स्थापित की है। भारत में इसकी मौजूदगी सबसे बड़ी है, जहां कंपनी के पास 15.2 गीगावाट की स्थापित क्षमता है। विदेशों में करीब 6 गीगावाट क्षमता लगी है। कंपनी के पास जर्मनी, नीदरलैंड, डेनमार्क और भारत में R&D सेंटर हैं। भारत में कंपनी की आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां हैं और इसमें 8,100 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं।
शेयर बाज़ार पर असर
टाटा पावर रिन्यूएबल से मिले इस बड़े ऑर्डर की खबर के बाद मंगलवार को सुजलॉन एनर्जी के शेयर में हलचल देखने को मिली। BSE पर शेयर में 2 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल आया और यह 59.29 रुपये पर पहुंच गया। सोमवार को स्टॉक 58.07 रुपये पर बंद हुआ था। मंगलवार को मामूली बढ़त के साथ 58.24 रुपये पर खुला और ऑर्डर की घोषणा के बाद तेजी से ऊपर गया। हालांकि, पिछले कुछ महीनों से यह शेयर एक रेंज में फंसा हुआ है। बीते 6 महीने का रिटर्न सिर्फ 7 प्रतिशत रहा है। एक साल में निवेशकों को 30 फीसदी का निगेटिव रिटर्न मिला है। लेकिन लंबी अवधि में यह एनर्जी स्टॉक मल्टीबैगर साबित हुआ है।
2 साल में 140% रिटर्न
3 साल में 600% रिटर्न
5 साल में 1850% रिटर्न
फिलहाल यह स्टॉक अपने 52 हफ्ते के हाई (85.80 रुपये) से करीब 32% डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है।
टाटा पावर रिन्यूएबल से मिला 838 मेगावाट का यह ऑर्डर सुजलॉन एनर्जी के लिए एक और माइलस्टोन है। यह कंपनी की तकनीकी और एग्जीक्यूशन क्षमता को साबित करता है, साथ ही भारत की ग्रीन एनर्जी यात्रा को भी नई दिशा देगा। कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में लगने वाले ये प्रोजेक्ट आने वाले वर्षों में देश को क्लीन, भरोसेमंद और 24/7 रिन्यूएबल एनर्जी उपलब्ध कराने में मदद करेंगे।