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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > ट्रेंडिंग खबरें > Rare Earth Magnets पर चीन की ढील, भारत के ऑटो और EV सेक्टर को बड़ी राहत
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Rare Earth Magnets पर चीन की ढील, भारत के ऑटो और EV सेक्टर को बड़ी राहत

Last updated: 26/12/2025 3:25 PM
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Industrial Empire
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भारत के ऑटो और EV उद्योग के लिए चीन द्वारा रेयर अर्थ मैग्नेट आयात लाइसेंस की शुरुआत
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भारत के ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) उद्योग के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। चीन ने भारत में रेयर अर्थ मैग्नेट (Rare Earth Magnets – REM) के आयात के लिए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, चीनी प्राधिकरण अब भारतीय कंपनियों के साथ-साथ भारत में मौजूद विदेशी कंपनियों की इकाइयों को भी चरणबद्ध तरीके से निर्यात लाइसेंस दे रहे हैं। यह कदम ऐसे समय में आया है, जब लंबे समय से इन जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति बाधित थी।

किन कंपनियों को मिला फायदा
लाइसेंस प्रक्रिया के तहत जिन कंपनियों को मंजूरी मिलनी शुरू हुई है, उनमें कई बड़े ऑटो और ऑटो-पार्ट्स सप्लायर शामिल हैं। इनमें जापानी कंपनी जय उशीन, जर्मन ऑटो पार्ट्स निर्माता कॉन्टिनेंटल एजी की भारतीय इकाइयां, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी के वेंडर्स, साथ ही होंडा स्कूटर एंड मोटरसाइकिल के सप्लायर्स के नाम सामने आए हैं। ये कंपनियां लंबे समय से चीन से रेयर अर्थ मैग्नेट के आयात में आ रही देरी से प्रभावित थीं।

धीमी शुरुआत, लेकिन प्रक्रिया शुरू
सरकारी अधिकारियों ने माना है कि यह प्रक्रिया फिलहाल धीमी है, लेकिन इसे एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने आवेदनों पर काम शुरू कर दिया है और कुछ कंपनियों को जरूरी मंजूरी भी मिल चुकी है। सबसे अहम बात यह है कि अब प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।” इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में और कंपनियों को भी राहत मिल सकती है।

क्यों अहम हैं रेयर अर्थ मैग्नेट
रेयर अर्थ मैग्नेट ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइसेज और यहां तक कि रक्षा क्षेत्र के लिए भी बेहद जरूरी कच्चा माल है। EV मोटर्स, पावर स्टीयरिंग, ब्रेक सिस्टम और कई एडवांस कंपोनेंट्स में इनका इस्तेमाल होता है। चीन इस सेक्टर में वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा उत्पादक है और रेयर अर्थ मैग्नेट की सप्लाई पर उसका दबदबा है।

अमेरिकी टैरिफ का जवाब और वैश्विक असर
चीन ने 4 अप्रैल से रेयर अर्थ मैग्नेट के निर्यात पर सख्त लाइसेंसिंग नियम लागू किए थे। यह कदम अमेरिका द्वारा चीनी उत्पादों पर बढ़ाए गए टैरिफ के जवाब में उठाया गया था। हालांकि इसका असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहा और भारत सहित कई देशों के उद्योगों को सप्लाई संकट का सामना करना पड़ा। खासकर EV और ऑटो सेक्टर में उत्पादन बाधित होने की आशंका बढ़ गई थी।

जटिल लेकिन जरूरी लाइसेंस प्रक्रिया
नए नियमों के तहत, अगर आयातक यह लिखित गारंटी देते हैं कि रेयर अर्थ मैग्नेट का इस्तेमाल किसी भी तरह के दोहरे या रक्षा उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाएगा, तो चीनी निर्यातकों को लाइसेंस दिया जा सकता है। हालांकि यह प्रक्रिया कागजी कार्रवाई और सत्यापन के कारण लंबी और जटिल मानी जा रही है। इसके बावजूद भारतीय कंपनियां इसे एक जरूरी कदम मान रही हैं।

भारत सरकार की सक्रिय भूमिका
भारत के वाहन उद्योग ने इस मुद्दे को लगातार सरकार के सामने उठाया था। उद्योग संगठनों का कहना था कि लाइसेंस में देरी के कारण EV समेत कई वाहनों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। पिछले छह महीनों में भारत सरकार ने चीनी अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत की। जून में नई दिल्ली दौरे के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को निर्यात प्रतिबंधों में ढील का आश्वासन भी दिया था।

घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की तैयारी
इस बीच भारत सरकार ने भविष्य की तैयारी भी शुरू कर दी है। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रेयर अर्थ मैग्नेट के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 7,280 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य ऑटो, EV और अन्य रणनीतिक उद्योगों की चीन पर निर्भरता को कम करना है।

आगे क्या संकेत मिलते हैं
हालांकि लाइसेंस प्रक्रिया में अभी भी चुनौतियां हैं, लेकिन चीन की ओर से शुरुआत होना भारत के ऑटो और EV सेक्टर के लिए बड़ा राहत संकेत है। इससे न केवल उत्पादन स्थिर रहने में मदद मिलेगी, बल्कि भविष्य में सप्लाई चेन को लेकर भरोसा भी मजबूत होगा। साथ ही, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की सरकारी योजना लंबे समय में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।

TAGGED:Digital IndiaEV Industry IndiaFeaturedIndustrial EmpireMake in IndiaRare Earth Magnets
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