Agriculture: भारत का कृषि क्षेत्र साल 2025 को मजबूती के साथ अलविदा कह रहा है। वैश्विक चुनौतियों, अमेरिकी शुल्क और बाजार अनिश्चितताओं के बावजूद देश में रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान है। जहां एक ओर बेहतर मानसून, बढ़ती बुवाई और जीएसटी सुधारों ने कृषि को सहारा दिया, वहीं दूसरी ओर किसानों की आय, निर्यात बाधाएं और नए कानूनों को लेकर असमंजस भी बना रहा। अब 2026 की ओर बढ़ते हुए बीज और कीटनाशक से जुड़े विधेयक खेती की भविष्य दिशा तय करने वाले अहम कारक बन सकते हैं।
रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन की ओर भारत
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 (जुलाई-जून) के दौरान भारत में खाद्यान्न उत्पादन पिछले साल के 35.773 करोड़ टन के रिकॉर्ड को भी पार कर सकता है। कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी के मुताबिक खरीफ की पैदावार मजबूत रही है और रबी की बुवाई भी संतोषजनक गति से आगे बढ़ रही है। इससे यह उम्मीद बढ़ी है कि चालू कृषि वर्ष में नया रिकॉर्ड बनाया जा सकता है।
मानसून की मेहरबानी, खरीफ में नया कीर्तिमान
दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से बेहतर प्रदर्शन ने खरीफ सीजन को मजबूती दी। कृषि मंत्रालय के प्राथमिक अग्रिम अनुमान के अनुसार, 2025-26 में खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 17.333 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष 16.94 करोड़ टन था। चावल का उत्पादन 12.45 करोड़ टन से अधिक और मक्का का उत्पादन 2.83 करोड़ टन तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि, सितंबर में पश्चिमी और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में अत्यधिक बारिश ने स्थानीय स्तर पर फसलों को नुकसान भी पहुंचाया, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन सामने आया।
रबी बुवाई में तेजी, गेहूं-दालों पर भरोसा
रबी सीजन भी उम्मीदों के अनुरूप आगे बढ़ रहा है। 19 दिसंबर तक रबी बुवाई का कुल रकबा 659.39 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया, जो पिछले साल से करीब 8 लाख हेक्टेयर अधिक है। गेहूं की बुवाई 301.63 लाख हेक्टेयर और दालों की बुवाई 126.74 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है। यह संकेत देता है कि किसान रबी फसलों को लेकर आशावादी हैं और खाद्यान्न सुरक्षा को लेकर स्थिति मजबूत बनी हुई है।
रिकॉर्ड उत्पादन, लेकिन आय का सवाल बरकरार
भले ही उत्पादन के आंकड़े उत्साहजनक हों, लेकिन किसानों की आय को लेकर चिंता खत्म नहीं हुई है। नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद का कहना है कि आधार प्रभाव के कारण 2025-26 में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र की वृद्धि दर लगभग 4% रह सकती है, जो पहले के अनुमान 4.6% से कम है। इसी असंतुलन के चलते फरवरी में संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा ने पंजाब-हरियाणा सीमा पर विरोध प्रदर्शन किए। किसानों की प्रमुख मांगों में स्वामीनाथन फार्मूले के अनुसार MSP की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी और पेंशन शामिल थीं।
किसान आंदोलन और नीतिगत असहमति
मार्च में पुलिस कार्रवाई के बाद किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल की 123 दिन चली भूख हड़ताल समाप्त हुई। इसके बाद किसान संगठनों ने भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और प्रस्तावित बीज विधेयकों के खिलाफ भी आवाज उठाई। इससे साफ है कि आने वाले समय में कृषि कानूनों पर सरकार और किसानों के बीच संवाद अहम रहने वाला है।
GST कटौती बनी 2025 की बड़ी राहत
2025 में कृषि क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक कदम जीएसटी काउंसिल का फैसला रहा। 56वीं बैठक में कृषि उपकरणों पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% करने का निर्णय लिया गया, जो 22 सितंबर से लागू होगा। इसमें ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, सिंचाई उपकरण, ट्रैक्टर पार्ट्स, टायर, जैव-कीटनाशक, सूक्ष्म पोषक तत्व और उर्वरक कच्चा माल शामिल है। इससे किसानों की लागत घटी और मशीनरी की पहुंच आसान हुई।
उद्योग का भरोसा, 2026 पर नजर
कृषि उपकरण उद्योग ने इन सुधारों का स्वागत किया है। सीएनएच इंडिया के अध्यक्ष नरिंदर मित्तल के अनुसार, जीएसटी में कटौती से किसानों की खरीद क्षमता बढ़ी और मशीनीकरण को गति मिली। अब नजर 2026 पर है, जहां बीज और कीटनाशक कानूनों का भविष्य तय होगा। यही नीतियां तय करेंगी कि भारत की खेती सिर्फ रिकॉर्ड उत्पादन तक सीमित रहेगी या टिकाऊ आय और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की ओर भी कदम बढ़ाएगी।