Success Story: क्या कपड़े धोकर करोड़पति बना जा सकता है? यह सवाल अक्सर मज़ाक जैसा लगता है, लेकिन झारखंड के भागलपुर (बिहार) में जन्मे अरुणाभ सिन्हा ने इसे हकीकत में बदल दिया। कभी स्कूल जाने के लिए पैदल चलने वाले अरुणाभ, जिनके पास रिक्शे का किराया तक नहीं होता था, आज देश की जानी-मानी लॉन्ड्री और ड्राई क्लीनिंग कंपनी UClean के फाउंडर हैं। उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर 160 करोड़ रुपये से ज्यादा है।
साधारण परिवार, असाधारण जज़्बा
अरुणाभ का परिवार बेहद सामान्य था। उनके पिता सरकारी अस्पताल में सहायक थे और मां गृहिणी। परिवार छोटे से सरकारी क्वार्टर में रहता था। तीन भाई-बहनों में अरुणाभ सबसे छोटे थे। सीमित संसाधनों के बावजूद पढ़ाई में वे शुरू से ही अव्वल रहे। कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था।
IIT बॉम्बे तक का सफर
कड़ी मेहनत रंग लाई और अरुणाभ का चयन IIT बॉम्बे में हुआ। उन्होंने मेटलर्जी और मटीरियल साइंस में इंजीनियरिंग की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें टाटा स्टील और ZS Associates जैसी बड़ी कंपनियों से जॉब ऑफर मिले। टाटा स्टील ने 4.5 लाख और ZS Associates ने 8.9 लाख रुपये सालाना का पैकेज ऑफर किया। अरुणाभ ने ZS Associates जॉइन की और पुणे में काम शुरू किया।
नौकरी से उद्यमिता की ओर
साल 2011 में अरुणाभ ने नौकरी के साथ-साथ अपनी कंसल्टिंग फर्म Franglobal शुरू की, जो विदेशी कंपनियों को भारत में कारोबार स्थापित करने में मदद करती थी। उन्हें Franchise India के फाउंडर गौरव मार्या से करीब 50 लाख रुपये का निवेश मिला। चार साल में कंपनी को खड़ा करने के बाद 2015 में उन्होंने Franglobal को Franchise India को बेच दिया।
नौकरी में दिखी बड़ी समस्या
साल 2015 में अरुणाभ की शादी गुंजन तनेजा से हुई और उन्होंने Treebo नाम की एक बजट होटल चेन में नौकरी शुरू की। Treebo में काम करते हुए अरुणाभ ने एक बड़ी समस्या देखी। होटल के ग्राहकों को गंदे तौलिये, चादरें और पर्दे जैसी चीजों से परेशानी हो रही थी। अरुणाभ को समझ आया कि लॉन्ड्री सर्विस में एक बहुत बड़ा मौका छिपा है। यह एक ऐसा बाजार था जो 99% असंगठित था और पूरी तरह से पारंपरिक धोबियों पर निर्भर था। अरुणभ ने सोचा कि इसे एक प्रोफेशनल सर्विस में बदला जा सकता है।
UClean की नींव
Treebo छोड़ने के बाद अरुणाभ ने अपनी पत्नी गुंजन तनेजा के साथ मिलकर 2017 में UClean की शुरुआत की। कंपनी का आधिकारिक नाम Uconcepts Solutions Pvt Ltd रखा गया। शुरुआत आसान नहीं थी। उन्होंने 50–60 निवेशकों से बात की, लेकिन कोई भी निवेश के लिए तैयार नहीं हुआ।
पहला निवेश और पहला स्टोर
जब अरुणाभ लगभग हार मान चुके थे, तब दिल्ली-एनसीआर के एक पारंपरिक ड्राई क्लीनर ने उन पर भरोसा किया। उस निवेशक ने वसंत कुंज और गुरुग्राम में अपने दो स्टोर UClean को दिए और 25 लाख रुपये का निवेश किया। मशीनें, स्टोर और सेटअप मिला, जबकि रोजमर्रा का खर्च अरुणाभ ने संभाला।
फ्रेंचाइजी मॉडल से तेजी से विस्तार
UClean ने फ्रेंचाइजी मॉडल अपनाया। ऐप और वेबसाइट के जरिए ग्राहक फ्री पिकअप और डिलीवरी के साथ 24 घंटे में लॉन्ड्री सर्विस पा सकते हैं। “किलो के हिसाब से कपड़े धोना” कंपनी की सबसे लोकप्रिय सेवा बनी। प्रोफेशनल क्वालिटी और समय पर डिलीवरी ने ब्रांड को पहचान दिलाई।
आज का UClean
आज UClean सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों में भी सर्विस दे रही है। कंपनी के 800 से अधिक आउटलेट्स हैं। कंपनी का टर्नओवर 160 करोड़ रुपये से अधिक है। अरुणाभ सिन्हा की कहानी बताती है कि बड़ा बिज़नेस हमेशा हाई-फाई आइडिया से नहीं, आम समस्याओं के स्मार्ट समाधान से बनता है। मेहनत, धैर्य और सही सोच हो, तो कपड़े धोने का काम भी करोड़ों का साम्राज्य बना सकता है।