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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > एनर्जी > 2026 तक 52 डॉलर तक फिसल सकता है Crude Oil? रुपये को मिल सकती है राहत, जानिए एक्सपर्ट्स की पूरी राय
एनर्जी

2026 तक 52 डॉलर तक फिसल सकता है Crude Oil? रुपये को मिल सकती है राहत, जानिए एक्सपर्ट्स की पूरी राय

Last updated: 07/01/2026 4:35 PM
By
Industrial Empire
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Crude Oil Prices Fall Impact on Indian Economy and Rupee 2026
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में Crude Oil की चाल एक बार फिर चर्चा में है। वेनेजुएला से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम ने भले ही कुछ समय के लिए कीमतों को सहारा दिया हो, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह तेजी टिकाऊ नहीं है। अलग-अलग रिसर्च रिपोर्ट्स और एनालिस्ट्स का आकलन इशारा कर रहा है कि तेल की वैश्विक सप्लाई ज्यादा बनी रहने से आने वाले महीनों में कीमतों पर दबाव रह सकता है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो इसका असर सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई, रुपये की मजबूती और भारत की आर्थिक रफ्तार पर भी दिख सकता है।

वेनेजुएला फैक्टर: असर कम, चर्चा ज्यादा
केडिया एडवाइजरी के मुताबिक, फिलहाल WTI कच्चा तेल करीब 58 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। वेनेजुएला को लेकर अमेरिका के कदमों से बाजार में थोड़ी हलचल जरूर आई, लेकिन लॉन्ग टर्म में इसका असर सीमित रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक तेल उत्पादन में वेनेजुएला की हिस्सेदारी 1% से भी कम है। ऐसे में अगर वहां सप्लाई में थोड़ी रुकावट भी आती है, तो वह दुनिया भर के तेल बाजार को ज्यादा प्रभावित नहीं कर पाएगी। इसके उलट, सच्चाई यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की उपलब्धता फिलहाल पर्याप्त है, जिससे कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है।

OPEC+ और सऊदी अरब के फैसलों का असर
तेल बाजार की दिशा तय करने में OPEC+ और सऊदी अरब की भूमिका हमेशा अहम रही है। हालिया घटनाक्रम देखें तो सऊदी अरब ने एशियाई देशों के लिए अपने क्रूड ऑयल की कीमतों में कटौती की है। वहीं, OPEC+ ने फिलहाल उत्पादन बढ़ाने के फैसले को टाल दिया है। इन दोनों संकेतों से साफ है कि बाजार में तेल की कोई कमी नहीं है। जब सप्लाई भरपूर होती है, तो कीमतों में बड़ी तेजी की गुंजाइश कम हो जाती है।

SBI रिसर्च का अनुमान: 2026 में और सस्ता तेल
SBI रिसर्च की रिपोर्ट कच्चे तेल को लेकर और भी साफ तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, जब से OPEC+ ने उत्पादन बढ़ाने की बात की थी, तभी से तेल की कीमतों में कमजोरी बनी हुई है। बाद में उत्पादन में कुछ कटौती जरूर हुई, लेकिन उससे दामों में कोई बड़ी उछाल नहीं आई। SBI का मानना है कि 2026 की शुरुआत में ब्रेंट कच्चा तेल औसतन 55 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रह सकता है। भारत में इस्तेमाल होने वाला कच्चा तेल ब्रेंट से जुड़ा होता है, इसलिए इसका सीधा असर घरेलू कीमतों पर भी पड़ेगा। अनुमान है कि मार्च 2026 तक इंडियन बास्केट 53 डॉलर और जून 2026 तक करीब 52 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है।

पेट्रोल-डीजल, महंगाई और रुपये पर क्या पड़ेगा असर?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सबसे बड़ा फायदा आम लोगों को मिल सकता है। SBI रिसर्च के अनुसार, अगर तेल सस्ता होता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव कम होगा, जिससे महंगाई दर में भी राहत मिल सकती है। रिपोर्ट का अनुमान है कि FY27 में औसत CPI महंगाई 3.4% से नीचे रह सकती है। इसके अलावा, तेल सस्ता होने से भारत का आयात बिल घटेगा, जिससे रुपये को मजबूती मिल सकती है। डॉलर के मुकाबले रुपया 87.5 के स्तर के आसपास आ सकता है। कम ऊर्जा लागत से देश की GDP ग्रोथ में 0.10 से 0.15 प्रतिशत अंक तक का सुधार भी संभव है।

तेल-गैस कंपनियों पर असर: नुवामा की राय
नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, Q3 FY26 में तेल और गैस सेक्टर की कुल कमाई (EBITDA) में 17% सालाना बढ़ोतरी हो सकती है। रिपोर्ट कहती है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज को रिफाइनिंग और डिजिटल बिजनेस से फायदा होगा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन का सहारा मिल सकता है। हालांकि, ONGC को उत्पादन में गिरावट और कच्चे तेल की कम कीमतों से नुकसान हो सकता है। गैस सेक्टर की कंपनियों जैसे GAIL पर भी दबाव बना रह सकता है।

निवेश के लिहाज से नुवामा ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और पेट्रोनेट LNG को प्राथमिकता दी है, जबकि ONGC और कुछ अन्य कंपनियों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।

सस्ता तेल, मजबूत अर्थव्यवस्था?
विशेषज्ञों की राय यही है कि कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी की संभावना फिलहाल कम है। अगर 2026 तक तेल 52–55 डॉलर के दायरे में रहता है, तो भारत के लिए यह राहत भरी खबर हो सकती है—चाहे वह महंगाई हो, रुपये की मजबूती हो या आर्थिक विकास। अब नजर इस बात पर रहेगी कि वैश्विक राजनीति और OPEC+ के फैसले इस अनुमान को कितना बदलते हैं।

TAGGED:crude oilCrude oil prices broke 4-year recordIndian EconomyIndustrial EmpireRupee vs DollarSBI Credit Card Changes 2025
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