केंद्र सरकार ने देश में खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और जमाखोरी पर रोक लगाने के उद्देश्य से गेहूं पर स्टॉक लिमिट लागू कर दिया है। यह निर्णय ऐसे समय पर लिया गया है जब देश के कई हिस्सों में गेहूं की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है और बाजार में अस्थिरता की स्थिति बनी हुई है।

सरकार द्वारा जारी निर्देश के अनुसार थोक व्यापारी अब अधिकतम 3000 मीट्रिक टन तक ही गेहूं का भंडारण कर सकेंगे। खुदरा विक्रेताओं के लिए यह सीमा 10 टन निर्धारित की गई है जबकि बड़े चेन रिटेलरों के लिए यह लिमिट 1000 टन प्रति इकाई तय की गई है। फ्लोर मिल्स यानी आटा चक्कियों के लिए यह सीमा 75% मासिक उत्पादन क्षमता के बराबर होगी। यह स्टॉक लिमिट आगामी चार महीने तक लागू रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है।
सरकार का यह कदम जमाखोरी पर सीधा प्रहार है। बीते कुछ महीनों में कई व्यापारी गेहूं का अत्यधिक भंडारण कर रहे थे जिससे बाजार में सप्लाई कम हो गई और कीमतों में अप्रत्याशित तेजी आ गई। अब नई स्टॉक लिमिट लागू होने के बाद ऐसे व्यापारियों पर नियंत्रण रहेगा और आम जनता को राहत मिल सकेगी।
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्टॉक की नियमित जांच करें और आदेशों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई करें। जो व्यापारी तय सीमा से अधिक गेहूं का भंडारण करते पाए जाएंगे उनके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इस निर्णय से एक ओर जहां जमाखोरी पर लगाम लगेगी वहीं दूसरी ओर बाजार में गेहूं की उपलब्धता भी बढ़ेगी जिससे उपभोक्ताओं को सही कीमत पर गेहूं उपलब्ध हो सकेगा। सरकार का मानना है कि इस तरह के उपायों से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी और मुद्रास्फीति पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा। यह कदम न केवल किसानों और उपभोक्ताओं के हित में है बल्कि इससे पूरी आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता और स्थिरता भी आएगी। आने वाले समय में ऐसे और भी निर्णय लिए जा सकते हैं जो अनाज के कुशल प्रबंधन और मूल्य स्थिरता में योगदान देंगे।