Home loan लेते समय ज़्यादातर लोग सिर्फ ब्याज दर और ईएमआई पर ध्यान देते हैं, लेकिन उससे जुड़ा बीमा भी उतना ही अहम होता है। हाल ही में पॉलिसीबाजार की एक रिपोर्ट में सामने आया है कि ऑनलाइन होम लोन बीमा, ऑफलाइन बीमा की तुलना में 70% तक सस्ता हो सकता है। हालांकि, कम कीमत ही सब कुछ नहीं होती। यह समझना ज़रूरी है कि बीमा कैसे काम करता है, उसका लाभ किसे मिलेगा और लोन बंद होने पर उसका क्या होगा।
Home loan बीमा के दो विकल्प: ग्रुप या पर्सनल
होम लोन बीमा आमतौर पर दो तरह का होता है। पहला, ग्रुप इंश्योरेंस, जो बैंक या लोन देने वाली संस्था सीधे लोन के साथ देती है। दूसरा, पर्सनल टर्म इंश्योरेंस, जिसे ग्राहक खुद किसी बीमा कंपनी से खरीदता है। ग्रुप बीमा की सबसे बड़ी खासियत सुविधा है। लोन लेते समय ही यह कवर मिल जाता है और अक्सर मेडिकल जांच भी नहीं होती। लेकिन इसमें एक बड़ी कमी यह है कि कई बार एकमुश्त प्रीमियम को लोन की रकम में जोड़ दिया जाता है, जिससे ग्राहक सालों तक उस प्रीमियम पर भी ब्याज चुकाता है।
क्यों महंगा पड़ सकता है ग्रुप इंश्योरेंस?
ग्रुप इंश्योरेंस का मकसद ज़्यादातर मामलों में बैंक के जोखिम को कवर करना होता है, न कि परिवार की पूरी सुरक्षा। अगर भविष्य में आप लोन ट्रांसफर या रीफाइनेंस करते हैं, तो यह बीमा अक्सर बेकार हो जाता है। इसमें कस्टमाइजेशन की भी काफी सीमाएं होती हैं। इंश्योरेंस एक्सपर्ट्स मानते हैं कि युवा और वेतनभोगी लोगों के लिए पर्सनल टर्म प्लान ज़्यादा फायदेमंद साबित होता है, क्योंकि यह सस्ता भी होता है और लंबे समय तक सुरक्षा देता है।
पर्सनल टर्म प्लान क्यों बेहतर विकल्प?
पर्सनल टर्म इंश्योरेंस में बीमा राशि आमतौर पर स्थिर रहती है, चाहे आपका लोन कम क्यों न हो जाए। इसका मतलब यह है कि लोन चुकने के बाद भी परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिलती रहती है। सबसे अहम बात यह है कि क्लेम की रकम सीधे नॉमिनी को मिलती है, जिससे परिवार को पैसों पर पूरा नियंत्रण रहता है।
लेवल कवर या रिड्यूसिंग कवर – क्या चुनें?
होम लोन बीमा में दो तरह के कवर मिलते हैं—लेवल कवर और रिड्यूसिंग कवर।
रिड्यूसिंग कवर में बीमा राशि लोन के बकाया के साथ घटती जाती है, इसलिए यह सस्ता होता है। वहीं, लेवल कवर में बीमा राशि पूरी अवधि तक समान रहती है, जिससे परिवार को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है। अगर बीमा सिर्फ लोन सुरक्षा के लिए चाहिए, तो रिड्यूसिंग कवर ठीक है। लेकिन अगर आप परिवार की भविष्य की ज़रूरतों को भी सुरक्षित करना चाहते हैं, तो लेवल कवर बेहतर विकल्प माना जाता है।
क्लेम का पैसा किसे मिलेगा?
ग्रुप इंश्योरेंस में क्लेम की राशि सीधे बैंक या लोन देने वाली संस्था को मिलती है। वहीं पर्सनल बीमा में यह पैसा नॉमिनी को मिलता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, नॉमिनी को भुगतान ज़्यादा व्यावहारिक होता है, क्योंकि परिवार तय कर सकता है कि लोन तुरंत चुकाना है या पहले ज़रूरी खर्चों को संभालना है।
सिंगल प्रीमियम बनाम रेगुलर प्रीमियम
कुछ लोग एकमुश्त प्रीमियम देकर पूरी अवधि का बीमा लेना पसंद करते हैं, जिससे मानसिक शांति मिलती है। वहीं, रेगुलर प्रीमियम विकल्प में खर्च समय के साथ बंट जाता है और लोन समय से पहले चुकाने पर ज्यादा लचीलापन मिलता है। चुनाव आपकी आय और भविष्य की योजनाओं पर निर्भर करता है।
लोन बंद करने या ट्रांसफर करने पर क्या होगा?
अगर आपने लोन से जुड़ा ग्रुप बीमा लिया है और लोन समय से पहले बंद कर देते हैं, तो बीमा भी खत्म हो सकता है। कई मामलों में रिफंड के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता है। पर्सनल टर्म प्लान में यह समस्या नहीं होती, क्योंकि पॉलिसी आपके नाम रहती है।
सही कीमत कैसे सुनिश्चित करें?
ऑनलाइन बीमा खरीदने से न सिर्फ प्रीमियम कम होता है, बल्कि GST भी शून्य फीसदी लगता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बीमा राशि, अवधि और अतिरिक्त लाभों की तुलना ज़रूर करें। याद रखें, आरबीआई और IRDAI के नियमों के मुताबिक आपको लोन देने वाले बैंक से ही बीमा लेना अनिवार्य नहीं है। होम लोन बीमा चुनते समय सिर्फ सस्ती कीमत न देखें, बल्कि यह समझें कि बीमा आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा कैसे करेगा। सही जानकारी और तुलना के साथ लिया गया फैसला ही लंबे समय में आपको वास्तविक सुरक्षा देगा।