Insurance: सड़क पर गाड़ी चलाना सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। हर ड्राइवर यह चाहता है कि वह सुरक्षित तरीके से ड्राइव करे, लेकिन सच्चाई यह है कि हादसे कब और कैसे हो जाएं, कोई नहीं जानता। ऐसे में थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस आपकी सबसे पहली और जरूरी सुरक्षा बन जाता है। इसके बावजूद भारत में करीब 50 फीसदी वाहन मालिक ऐसे हैं, जिनके पास यह अनिवार्य बीमा तक नहीं है। यह सिर्फ कानून की अनदेखी नहीं, बल्कि खुद को बड़े वित्तीय और कानूनी जोखिम में डालने जैसा है।
थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस क्या होता है?
थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वह बीमा है, जो सड़क पर आपके वाहन से किसी दूसरे व्यक्ति को होने वाले नुकसान को कवर करता है। इसमें किसी अन्य व्यक्ति की चोट, मृत्यु या उसकी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई की जाती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह बीमा आपके खुद के वाहन या आपके मेडिकल खर्च को कवर नहीं करता। इसका उद्देश्य सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि अगर आपकी वजह से किसी तीसरे व्यक्ति को नुकसान होता है, तो उसकी आर्थिक जिम्मेदारी बीमा कंपनी उठाए।
कानून क्यों बनाता है इसे अनिवार्य?
मोटर व्हीकल्स एक्ट के तहत भारत में हर वाहन के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है। IRDAI के जनवरी 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, इसके बावजूद 50% से ज्यादा वाहन मालिकों के पास यह कवर नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह जागरूकता की कमी है। सरकार का मकसद साफ है—सड़क दुर्घटनाओं में निर्दोष पीड़ितों को मुआवजा मिले, ड्राइवरों में जिम्मेदारी बढ़े और कानूनी विवादों को कम किया जा सके। थर्ड-पार्टी बीमा एक तरह से सड़क सुरक्षा का आधार है।
एक छोटा हादसा, बड़ा नुकसान बन सकता है
अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर वे सावधानी से गाड़ी चला रहे हैं, तो बीमा की जरूरत नहीं। लेकिन एक मामूली एक्सीडेंट भी लाखों रुपये के मुआवजे और लंबे कानूनी झंझट में बदल सकता है। भले ही गलती पूरी तरह आपकी न हो, फिर भी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस आपको इन परिस्थितियों में आर्थिक और कानूनी सुरक्षा देता है और तनाव को काफी हद तक कम कर देता है।
थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस क्या-क्या कवर करता है?
थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस मुख्य रूप से सड़क पर दूसरों को होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी को कवर करता है। इसमें सबसे पहले किसी अन्य व्यक्ति को दुर्घटना में लगी चोट या उसकी मृत्यु की स्थिति शामिल होती है, जहां बीमा कंपनी मुआवजे की कानूनी जिम्मेदारी उठाती है। इसके अलावा, यदि आपकी गाड़ी से किसी दूसरे व्यक्ति की संपत्ति को नुकसान पहुंचता है—जैसे दूसरी कार, बाइक या सड़क पर मौजूद किसी ढांचे को क्षति होती है—तो उसका खर्च भी थर्ड-पार्टी बीमा के तहत कवर किया जाता है। साथ ही, ऐसे मामलों में उत्पन्न होने वाले कानूनी खर्च और कोर्ट द्वारा तय किए गए मुआवजे की राशि भी इसी बीमा के अंतर्गत आती है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस केवल दूसरों को हुए नुकसान तक सीमित रहता है। यह आपके खुद के वाहन की मरम्मत, चोरी, आग लगने या आपके व्यक्तिगत नुकसान को कवर नहीं करता। यही वजह है कि कई वाहन मालिक इसकी सीमाओं को तब समझ पाते हैं, जब उन्हें क्लेम के समय यह पता चलता है कि उनका निजी नुकसान इस बीमा के दायरे में नहीं आता।
अगर थर्ड-पार्टी बीमा नहीं है तो क्या होगा?
बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के वाहन चलाने पर सजा काफी गंभीर हो सकती है। पहली बार पकड़े जाने पर जुर्माना 2,000 रुपये से शुरू होता है, जो दोबारा गलती करने पर बढ़ जाता है। कुछ मामलों में जेल तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा ड्राइविंग लाइसेंस का निलंबन या रद्द होना और गंभीर हादसों में अदालत द्वारा लाखों रुपये का मुआवजा भरने का आदेश भी दिया जा सकता है।
कितनी होती है थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की लागत?
थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम कीमत है। 1500cc तक की कारों के लिए इसका सालाना प्रीमियम आमतौर पर 3,500 रुपये से कम होता है। यह राशि मोटर व्हीकल्स एक्ट के तहत तय की जाती है। लंबी अवधि वाली पॉलिसी लेने से हर साल रिन्यू करने की झंझट भी खत्म हो जाती है और कुल लागत भी कम पड़ती है।
जिम्मेदार ड्राइवर की पहली पहचान
थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस एक कानूनी औपचारिकता होने के साथ आपकी जिम्मेदारी और समझदारी का प्रमाण है। यह न सिर्फ आपको भारी जुर्माने और कानूनी परेशानी से बचाता है, बल्कि सड़क पर किसी और की जिंदगी और संपत्ति की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है। अगर आप वाहन चलाते हैं, तो थर्ड-पार्टी बीमा को नजरअंदाज करना एक बड़ा जोखिम हो सकता है। बेहतर है कि समय रहते सही फैसला लिया जाए और सुरक्षित ड्राइविंग के साथ जरूरी सुरक्षा कवच भी अपनाया जाए।