Economic Survey 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार, 29 जनवरी को संसद में इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 पेश कर दिया। यह सर्वे 1 फरवरी को आने वाले केंद्रीय बजट से पहले देश की आर्थिक सेहत का पूरा खाका पेश करता है। इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है। सरकार का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है।
नौवां बजट पेश करेंगी निर्मला सीतारमण
इससे एक दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ संसद के बजट सत्र की शुरुआत हुई थी। रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी। यह उनका लगातार नौवां बजट होगा, जो किसी महिला वित्त मंत्री द्वारा पहली बार हासिल की जा रही ऐतिहासिक उपलब्धि है।
रुपये की कमजोरी पर सर्वे की साफ राय
इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि साल 2025 में भारतीय रुपये का प्रदर्शन कमजोर रहा। विदेशी निवेश में कमी और वैश्विक कारणों की वजह से रुपये पर दबाव देखने को मिला। हालांकि, सर्वे यह भी स्पष्ट करता है कि रुपये में आई गिरावट भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद को पूरी तरह नहीं दर्शाती। देश की घरेलू मांग, निवेश और सुधारों ने अर्थव्यवस्था को संतुलन में बनाए रखा है।
EU के साथ FTA से बढ़ेगी ताकत
सर्वे में भारत–यूरोपीय संघ (EU) फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को बेहद अहम बताया गया है। इसके मुताबिक, इस समझौते से भारत की मैन्युफैक्चरिंग प्रतिस्पर्धा, एक्सपोर्ट रेजिलिएंस और स्ट्रैटेजिक क्षमता को मजबूती मिलेगी। इससे भारतीय कंपनियों को यूरोप के बड़े बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी और निर्यात को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
GST सुधार और बदलती अर्थव्यवस्था
इकोनॉमिक सर्वे का कहना है कि GST में किए गए सुधारों और नीतिगत बदलावों ने वैश्विक अनिश्चितताओं को अवसर में बदल दिया है। भारतीय अर्थव्यवस्था इन बदलावों के अनुसार खुद को ढाल रही है। सर्वे के मुताबिक, FY27 को सुधारों का साल माना जा सकता है, जहां सरकार के फैसलों का असर जमीन पर साफ दिखने लगेगा।
मध्यम अवधि में 7% ग्रोथ की क्षमता
सर्वे में यह भी कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों में किए गए नीतिगत सुधारों का असर अब नजर आने लगा है। इन सुधारों के चलते भारत की मध्यम अवधि की ग्रोथ क्षमता लगभग 7 प्रतिशत तक पहुंचती दिख रही है। मजबूत आर्थिक ढांचे के कारण भारत की स्थिति कई अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर बनी हुई है।
IMF के अनुमान से मेल खाता आकलन
इकोनॉमिक सर्वे का जीडीपी अनुमान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पूर्वानुमानों के अनुरूप है। IMF ने 2025-26 के लिए भारत का ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है, जो उसके अक्टूबर अनुमान से 0.7 प्रतिशत अंक ज्यादा है। वहीं, 2026-27 के लिए भी IMF ने ग्रोथ अनुमान को 6.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है।
क्या होता है इकोनॉमिक सर्वे?
इकोनॉमिक सर्वे हर साल केंद्रीय बजट से पहले संसद में पेश किया जाता है। इसे वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग का इकोनॉमिक डिविजन तैयार करता है, जिसकी अगुवाई मुख्य आर्थिक सलाहकार करते हैं। यह रिपोर्ट खेती, उद्योग, सेवा क्षेत्र, रोजगार, महंगाई, बैंकिंग, निर्यात-आयात और विदेशी निवेश जैसे अहम पहलुओं का सरल और स्पष्ट विश्लेषण पेश करती है।
रफ्तार पकड़ रही ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ – PM मोदी
बजट सत्र की शुरुआत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार लंबे समय से लंबित समस्याओं से बाहर निकलकर लॉन्ग टर्म समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस सरकार की पहचान सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन रही है। पीएम मोदी के अनुसार, ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ अब लगातार रफ्तार पकड़ रही है और इसका फायदा देश की अर्थव्यवस्था को मिल रहा है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत अब आत्मविश्वास से भरा हुआ देश है, जो दुनिया के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरा है।
EU के साथ FTA को उन्होंने एक महत्वाकांक्षी भारत का कदम बताया और भारतीय निर्माताओं से नए बाजारों का पूरा लाभ उठाने की अपील की। इकोनॉमिक सर्वे 2026 यह संकेत देता है कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ने को तैयार है।