8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय से जिस आयोग के गठन और कामकाज को लेकर असमंजस बना हुआ था, अब वह प्रक्रिया जमीन पर उतरती नजर आ रही है। सरकार ने आयोग के कामकाज के लिए दिल्ली में आधिकारिक दफ्तर आवंटित कर दिया है और स्टाफ की नियुक्ति की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि 8वां वेतन आयोग अब सिर्फ घोषणा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सक्रिय रूप से काम शुरू करने की तैयारी में है।
दिल्ली में मिला ऑफिस, शुरू हुई तैयारी
ताजा जानकारी के मुताबिक, 8वें वेतन आयोग को नई दिल्ली के जनपथ इलाके में स्थित ‘चंद्रलोक बिल्डिंग’ में ऑफिस अलॉट किया गया है। यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि किसी भी आयोग के काम शुरू करने के लिए उसका स्थायी कार्यालय होना जरूरी होता है। फिलहाल प्रतिनियुक्ति (Deputation) के जरिए अधिकारियों और कर्मचारियों की भर्ती की जा रही है। इसके लिए नोटिफिकेशन भी जारी किए जा चुके हैं। माना जा रहा है कि स्टाफ की नियुक्ति पूरी होते ही आयोग की बैठकों और रिसर्च का काम तेज रफ्तार पकड़ेगा।
कब तक आएगी आयोग की रिपोर्ट?
सरकार ने 3 नवंबर 2025 को एक संकल्प के जरिए 8वें वेतन आयोग के गठन को अधिसूचित किया था। नियमों के अनुसार, आयोग को अपनी सिफारिशें देने के लिए अधिसूचना की तारीख से 18 महीने का समय मिलता है। इसका मतलब है कि आयोग की रिपोर्ट 2027 के मध्य तक सरकार को सौंपे जाने की संभावना है। अभी आयोग के गठन को लगभग तीन महीने बीत चुके हैं और करीब 15 महीने का वक्त बाकी है। ऐसे में कर्मचारियों को अभी सैलरी में बदलाव के लिए कुछ समय तक इंतजार करना पड़ सकता है।
बजट से निराश कर्मचारी, हड़ताल का ऐलान
हालांकि आयोग के काम शुरू होने से कर्मचारियों में उम्मीद जगी है, लेकिन बजट 2026 में 8वें वेतन आयोग को लेकर किसी तरह की अंतरिम राहत या घोषणा न होने से कर्मचारी संगठन नाराज हैं। उन्हें उम्मीद थी कि सरकार बजट में वेतन आयोग से जुड़ी कोई ठोस घोषणा करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस नाराजगी के चलते ‘Confederation of Central Government Employees & Workers’ (CCGEW) ने 12 फरवरी 2026 को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान कर दिया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार को वेतन आयोग के नाम पर फैसले टालने के बजाय ठोस कदम उठाने चाहिए।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
कर्मचारी संगठनों की मांगों में अंतरिम राहत देना, महंगाई भत्ते (DA) को मूल वेतन में मर्ज करना और वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) में बदलाव शामिल हैं। उनका मानना है कि जब तक नई सिफारिशें लागू नहीं होतीं, तब तक कर्मचारियों को कुछ अंतरिम राहत मिलनी चाहिए ताकि बढ़ती महंगाई का बोझ कम हो सके। इसके अलावा, भत्तों में बदलाव और पेंशन से जुड़े मुद्दे भी कर्मचारियों के एजेंडे में शामिल हैं।
25 फरवरी की बैठक क्यों है अहम?
25 फरवरी को जेसीएम (स्टाफ साइड) की नेशनल काउंसिल की एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। इस बैठक में 8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारियों की ओर से सौंपे जाने वाले मांग पत्र यानी मेमोरेंडम पर चर्चा होगी। यही दस्तावेज आगे चलकर आयोग के सामने कर्मचारियों की आधिकारिक मांगों का आधार बनेगा। इसमें वेतन वृद्धि, भत्तों में बदलाव, पुरानी पेंशन स्कीम जैसे मुद्दों को शामिल किया जाएगा। कर्मचारियों के लिए यह बैठक इसलिए अहम है क्योंकि यहीं से वे अपनी बात संगठित तरीके से सरकार और आयोग तक पहुंचा पाएंगे।
सैलरी बढ़ोतरी में अभी कितना इंतजार?
फिलहाल स्थिति साफ है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 2027 के आसपास आने की उम्मीद है। इसके बाद सरकार उन सिफारिशों पर विचार करेगी और फिर उन्हें लागू करने का फैसला लिया जाएगा। ऐसे में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को पे-स्लिप में बदलाव देखने के लिए अभी कम से कम डेढ़ साल का इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि आयोग के काम शुरू होने से यह भरोसा जरूर मिला है कि वेतन बढ़ोतरी की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और आने वाले समय में इस पर ठोस प्रगति देखने को मिल सकती है।