Tea export: भारत के लिए 2025 चाय उद्योग के लिहाज से ऐतिहासिक साल बनकर उभरा है। इस साल देश का चाय निर्यात अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। टी बोर्ड ऑफ इंडिया के प्रोविजनल आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच भारत ने करीब 280.40 मिलियन किलोग्राम चाय का निर्यात किया। यह आंकड़ा 2024 के 256.17 मिलियन किलोग्राम से काफी ज्यादा है। साफ है कि भारतीय चाय की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लगातार मजबूत हो रही है और नए-नए देश भारत की चाय को पसंद कर रहे हैं।
निर्यात बढ़ा, कमाई में भी शानदार उछाल
निर्यात में बढ़ोतरी के साथ-साथ भारत की कमाई में भी बड़ा उछाल देखने को मिला है। साल 2025 में चाय निर्यात से भारत को करीब ₹8,488 करोड़ की आय हुई, जबकि 2024 में यह आंकड़ा ₹7,167 करोड़ था। यानी सिर्फ मात्रा ही नहीं, बल्कि कीमत और वैल्यू के स्तर पर भी भारतीय चाय ने बेहतर प्रदर्शन किया है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि बेहतर क्वालिटी, नए बाजारों में एंट्री और प्रमोशनल गतिविधियों का असर अब साफ नजर आने लगा है।
मिडिल ईस्ट बना भारत की चाय का बड़ा बाजार
2025 में मिडिल ईस्ट के देशों से भारतीय चाय की मांग काफी मजबूत रही। इराक को निर्यात बढ़कर करीब 52.59 मिलियन किलोग्राम पहुंच गया, जो पिछले साल 40.47 मिलियन किलोग्राम था। वहीं यूएई को निर्यात भी 50.71 मिलियन किलोग्राम तक पहुंच गया। ईरान को सीधे तौर पर करीब 11.25 मिलियन किलोग्राम चाय भेजी गई, हालांकि बड़ी मात्रा यूएई के जरिए री-एक्सपोर्ट के रूप में ईरान पहुंचती है। राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद इन बाजारों में भारतीय निर्यातकों ने जोखिम उठाया और इसका फायदा अब नजर आ रहा है।
चीन बना सबसे बड़ा सरप्राइज मार्केट
इस साल सबसे चौंकाने वाला बदलाव चीन के बाजार में देखने को मिला। 2025 में चीन को भारत का चाय निर्यात बढ़कर करीब 16.13 मिलियन किलोग्राम पहुंच गया, जबकि 2024 में यह सिर्फ 6.24 मिलियन किलोग्राम था। अमेरिका में टैरिफ और व्यापारिक अनिश्चितताओं के चलते निर्यातकों ने नए विकल्प तलाशे और चीन को एक बड़े अवसर के रूप में पहचाना। चीनी बाजार में भारतीय ऑर्थोडॉक्स चाय की मांग तेजी से बढ़ रही है और आने वाले समय में यहां और ग्रोथ की संभावना जताई जा रही है।
ऑर्थोडॉक्स चाय ने संभाली ग्रोथ की कमान
इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक इस पूरे उछाल में ऑर्थोडॉक्स चाय का योगदान सबसे अहम रहा है। खासतौर पर असम की ऑर्थोडॉक्स चाय की डिमांड मिडिल ईस्ट और चीन जैसे बाजारों में तेजी से बढ़ी है। वहीं CTC चाय का निर्यात लगभग स्थिर बना रहा। टी बोर्ड भी अब छोटे उत्पादकों को ऑर्थोडॉक्स चाय के उत्पादन की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, ताकि नए और हाई-वैल्यू मार्केट्स को बेहतर तरीके से टारगेट किया जा सके।
अमेरिका में थोड़ी गिरावट, लेकिन उम्मीद बरकरार
2025 में अमेरिका को भारत का चाय निर्यात थोड़ा घटकर करीब 15.21 मिलियन किलोग्राम रहा, जो 2024 में 17.14 मिलियन किलोग्राम था। हालांकि भारत-अमेरिका ट्रेड डील से आगे चलकर स्थिति सुधरने की उम्मीद जताई जा रही है। इंडस्ट्री का मानना है कि इस डील से अमेरिकी खरीदारों में भरोसा बढ़ेगा और लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट्स के नए मौके खुलेंगे। अमेरिका जैसे हाई-प्राइस्ड मार्केट में भारतीय चाय के लिए अब भी अच्छी संभावनाएं बनी हुई हैं।
नए बाजारों पर नजर, 300 मिलियन किलोग्राम का लक्ष्य
टी बोर्ड अब मिडिल ईस्ट और चीन के अलावा नए बाजारों पर भी फोकस कर रहा है। अफगानिस्तान और उत्तर अफ्रीका के देश जैसे अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, मोरक्को और मिस्र में भारतीय चाय की संभावनाएं देखी जा रही हैं। इंडस्ट्री का कहना है कि अगर ईरान के साथ पेमेंट से जुड़ी दिक्कतें कम होती हैं और सरकार प्रमोशन व कंप्लायंस में मदद करती है, तो आने वाले समय में भारत का चाय निर्यात 300 मिलियन किलोग्राम के आंकड़े को भी आसानी से पार कर सकता है।