दुनिया की सबसे चर्चित स्पेस कंपनियों में शामिल spacex ने अपने मिशन में बड़ा बदलाव किया है। एलन मस्क ने संकेत दिया है कि फिलहाल मंगल ग्रह पर इंसानों को बसाने का सपना टाल दिया गया है और अब पूरा फोकस चांद पर इंसानी बस्ती बनाने पर है। मस्क के मुताबिक, चांद पर एक ऐसी सिटी बसाने की तैयारी है जो समय के साथ खुद बढ़ती जाए। उनका दावा है कि यह लक्ष्य 10 साल से भी कम समय में हासिल किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह इंसानी इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जाएगी।
मंगल से चांद की ओर क्यों बदला रास्ता
spacex के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह लॉजिस्टिक्स और पहुंच की आसानी बताई जा रही है। मस्क का कहना है कि मंगल ग्रह तक पहुंचने के लिए ग्रहों की स्थिति का इंतजार करना पड़ता है, जो हर 26 महीने में एक बार सही बनती है। इसके मुकाबले चांद पर हर 10 दिन में लॉन्च संभव है। इसका मतलब है कि सप्लाई, मशीनरी, ईंधन और इंसानों को भेजना चांद के लिए कहीं ज्यादा आसान और तेज हो सकता है। यही वजह है कि स्पेसएक्स अब चांद को “टेस्टबेड” के तौर पर देख रहा है, जहां भविष्य की अंतरिक्ष कॉलोनियों की नींव रखी जा सकती है।
नासा और अमेरिकी नीति से मिला सपोर्ट
चांद पर फोकस बढ़ने की एक बड़ी वजह अमेरिकी अंतरिक्ष नीति में आया बदलाव भी है। नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत अमेरिका दोबारा इंसानों को चांद पर भेजने की तैयारी कर रहा है। इस मिशन में स्पेसएक्स एक अहम ठेकेदार है। वहीं अमेरिकी नेतृत्व की ओर से भी 2028 तक इंसानों को चांद पर भेजने पर जोर दिया गया है। ऐसे में स्पेसएक्स का चांद पर सिटी बनाने का प्लान सरकारी प्राथमिकताओं से मेल खाता है। इससे कंपनी को टेक्नोलॉजी, फंडिंग और मिशन सपोर्ट के स्तर पर मजबूती मिलने की उम्मीद है।
मंगल का सपना खत्म नहीं हुआ
हालांकि मस्क ने साफ किया है कि मंगल ग्रह का सपना छोड़ा नहीं गया है। उनके मुताबिक मंगल अब भी spacex के लंबे समय के विजन का हिस्सा है। कंपनी आने वाले 5 से 7 साल में मंगल से जुड़ी परियोजनाओं पर फिर से तेज काम शुरू कर सकती है। मस्क मानते हैं कि चांद पर इंसानी बस्ती बनाना मंगल के लिए तैयारी का एक अहम कदम होगा। यहां रहने, संसाधन जुटाने और कठिन हालात में सर्वाइव करने का अनुभव मंगल मिशन के लिए काम आएगा।
मस्क की टाइमलाइन पर उठते रहे हैं सवाल
एलन मस्क की योजनाएं हमेशा चर्चा में रहती हैं, लेकिन उनकी टाइमलाइन को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं। पहले भी मस्क ने मंगल पर इंसानों को भेजने को लेकर कई तारीखें बताईं, जो समय पर पूरी नहीं हो पाईं। 2011 में उन्होंने कहा था कि 10 से 20 साल में इंसान मंगल पर पहुंच सकते हैं। 2016 में यह दावा किया गया था कि 2024 तक मंगल पर यात्री भेजे जा सकते हैं। ऐसे में आलोचक मानते हैं कि चांद पर 10 साल में सिटी बनाने का दावा भी काफी महत्वाकांक्षी है। हालांकि स्पेसएक्स की तेज प्रगति को देखते हुए इसे पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता।
नासा का शेड्यूल और तकनीकी चुनौतियां
नासा फिलहाल आर्टेमिस-3 मिशन के तहत 2027 के आसपास अंतरिक्ष यात्रियों को चांद की सतह पर वापस भेजने की योजना पर काम कर रहा है। लेकिन इस मिशन में पहले ही कई बार देरी हो चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्पेसएक्स द्वारा तैयार किया जा रहा लूनर लैंडर अभी पूरी तरह तैयार नहीं है, जिससे आगे और देरी संभव है। ऐसे में चांद पर स्थायी इंसानी बस्ती बनाने के रास्ते में तकनीकी चुनौतियां, सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कई बड़ी अड़चनें हैं।
चांद पर पहुंचने का खर्च कितना भारी
चांद तक पहुंचना बेहद महंगा सौदा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी स्पेस एजेंसियों को सिर्फ चांद की कक्षा में पहुंचने में ही 100 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। अगर कोई निजी कंपनी यात्रियों को चांद की कक्षा तक ले जाए, तो एक सीट की कीमत 100 मिलियन से 750 मिलियन डॉलर तक हो सकती है। इतिहास पर नजर डालें तो 1969 में अपोलो-11 मिशन के तहत नील आर्मस्ट्रांग चांद पर पहुंचे थे। उस मिशन का खर्च उस समय करीब 350 मिलियन डॉलर था, जो आज की कीमतों में करीब 250 अरब डॉलर के बराबर माना जाता है। वहीं नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम की कुल लागत भी लगभग 95 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।
क्या सच में 10 साल में बन पाएगी चांद पर सिटी?
चांद पर इंसानी बस्ती बनाना सुनने में जितना रोमांचक है, हकीकत में उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। वहां ऑक्सीजन, पानी, ऊर्जा, रहने की जगह और सुरक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों की व्यवस्था करना आसान नहीं होगा। फिर भी स्पेसएक्स का दावा है कि चांद तक आसान पहुंच और लगातार लॉन्च की सुविधा इस काम को संभव बना सकती है। अगर तकनीक, सरकारी सपोर्ट और निवेश सही दिशा में मिला, तो आने वाले दशक में चांद पर इंसानों की मौजूदगी आम बात बन सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि मस्क का यह सपना हकीकत में कब और कैसे बदलता है।