The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation
Thursday, Apr 2, 2026
Facebook X-twitter Youtube Linkedin
  • About Us
  • Contact Us
Subscribe
  • होम
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • बाज़ार
  • ऑटो/टेक
  • बैंकिंग
  • आईटी
  • टेलिकॉम
  • एनर्जी
    • रिन्यूएबल एनर्जी
    • नॉन रिन्यूएबल एनर्जी
  • एग्रीकल्चर
  • फार्मा
  • फर्श से अर्श तक
  • अन्य
Font ResizerAa
The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & InnovationThe Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation
  • होम
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • बाज़ार
  • ऑटो/टेक
  • बैंकिंग
  • आईटी
  • टेलिकॉम
  • एनर्जी
  • एग्रीकल्चर
  • फार्मा
  • फर्श से अर्श तक
  • अन्य
Search
  • होम
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • बाज़ार
  • ऑटो/टेक
  • बैंकिंग
  • आईटी
  • टेलिकॉम
  • एनर्जी
    • रिन्यूएबल एनर्जी
    • नॉन रिन्यूएबल एनर्जी
  • एग्रीकल्चर
  • फार्मा
  • फर्श से अर्श तक
  • अन्य
Have an existing account? Sign In
Follow US
© 2026 The Industrial Empire. All Rights Reserved.
The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > एनर्जी > Cafe-3 मानकों में तकनीकी छूट पर सख्ती: अब ‘नई तकनीक’ को ही मिलेगा फायदा
एनर्जी

Cafe-3 मानकों में तकनीकी छूट पर सख्ती: अब ‘नई तकनीक’ को ही मिलेगा फायदा

Last updated: 14/02/2026 1:14 PM
By
Industrial Empire
Share
भारत में Cafe-3 उत्सर्जन मानकों पर चर्चा करते हुए ऊर्जा दक्षता ब्यूरो और ऑटो इंडस्ट्री प्रतिनिधि
SHARE

भारत में यात्री वाहनों के उत्सर्जन मानकों को और सख्त करने की तैयारी तेज हो गई है। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी यानी Cafe-3 मानकों के तहत मिलने वाली ‘तकनीकी छूट’ की सूची में बड़े बदलाव करने जा रहा है। इसका मकसद साफ है – कार कंपनियों को ऐसी तकनीकों पर ही छूट का फायदा मिले, जो वाकई में ईंधन बचाने और उत्सर्जन घटाने में नई भूमिका निभाती हों।

क्यों जरूरी हुआ बदलाव?
पिछले कुछ सालों में भारतीय यात्री वाहन बाजार में कई ईंधन बचाने वाली तकनीकें आम हो चुकी हैं। अधिकारियों के मुताबिक, करीब 54 फीसदी कारों में आइडल स्टार्ट-स्टॉप सिस्टम मौजूद है, 47 फीसदी में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग, 63 फीसदी में टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम और लगभग 59 फीसदी कारों में 6-स्पीड या उससे अधिक गियरबॉक्स मिल रहा है। जब ये फीचर पहले ही बड़े पैमाने पर अपनाए जा चुके हैं, तो इन्हें “तकनीकी छूट” की श्रेणी में रखना अब तर्कसंगत नहीं माना जा रहा। इसी वजह से प्रस्तावित कैफे-3 मानकों में इन पर छूट देने का विचार खत्म किया जा रहा है।

Cafe-3 क्या है और कब लागू होगा?
कैफे मानकों के तहत कार कंपनियों को साल भर में बिके अपने सभी वाहनों के औसत कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को तय सीमा के भीतर रखना होता है। यह उत्सर्जन ग्राम प्रति किलोमीटर में मापा जाता है। कैफे-3 मानक फिलहाल विमर्श के दौर में हैं और इन्हें जल्द अधिसूचित किया जा सकता है। प्रस्ताव है कि ये नियम वित्त वर्ष 2027-28 से 2031-32 तक लागू रहेंगे। नए मानकों का उद्देश्य वाहन निर्माताओं को ज्यादा कुशल और पर्यावरण के अनुकूल तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

तकनीकी छूट की सीमा भी घटेगी
बीईई सिर्फ तकनीकों की सूची ही नहीं बदल रहा, बल्कि कंपनियों को मिलने वाले अधिकतम लाभ को भी सीमित करने की तैयारी है। सितंबर 2025 में जारी मसौदे में 9 ग्राम प्रति किलोमीटर तक की तकनीकी छूट का प्रस्ताव था। अब अंतिम अधिसूचना में इसे घटाकर 6 ग्राम प्रति किलोमीटर करने पर विचार हो रहा है। साथ ही, हर मान्यता प्राप्त तकनीक पर अधिकतम 1 ग्राम प्रति किलोमीटर तक ही छूट मिलने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी तकनीकी छूट की सीमा लगभग इसी स्तर पर रखी जाती है। इसके अलावा, भारत में अभी हर तकनीक से होने वाली उत्सर्जन कटौती को स्वतंत्र रूप से जांचने और प्रमाणित करने की कोई एकरूप सरकारी परीक्षण प्रणाली उपलब्ध नहीं है। इसलिए कम सीमा तय कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि छूट का लाभ सिर्फ उन तकनीकों को मिले, जो वाकई में प्रभावी और नई हों।

किन नई तकनीकों को मिल सकता है फायदा
कैफे-3 के तहत करीब 17 तकनीकों को तकनीकी छूट की सूची में शामिल किए जाने की संभावना है। ये सभी तकनीकें पहले से अमेरिका, यूरोपीय संघ, चीन और जापान जैसे बड़े बाजारों में मान्यता प्राप्त हैं। इस सूची में 12 वोल्ट का एडवांस्ड अल्टरनेटर शामिल हो सकता है, जो बैटरी को बेहतर तरीके से चार्ज करता है और इंजन पर बोझ कम करता है। इसी तरह इंटीग्रेटेड स्टार्टर जेनरेटर या बेल्ट स्टार्टर जेनरेटर सिस्टम को भी जगह मिल सकती है, जो शहरों में रुक-रुक कर चलने वाली ड्राइविंग के दौरान ईंधन बचाने में मदद करता है।

लाइटिंग और थर्मल मैनेजमेंट पर जोर
ऊर्जा बचत के लिए फुल-व्हीकल एलईडी लाइटिंग को भी तकनीकी छूट की श्रेणी में लाने पर विचार किया जा रहा है, क्योंकि यह पारंपरिक बल्बों की तुलना में कम बिजली खपत करती है। इसके अलावा सोलर-रिफ्लेक्टिव पेंट और एडवांस्ड ग्लेजिंग जैसे खास कांच भी सूची में आ सकते हैं। ये तकनीकें वाहन के केबिन में गर्मी कम करती हैं, जिससे एयर कंडीशनिंग पर दबाव घटता है और ईंधन की बचत होती है।

इंजन और कूलिंग सिस्टम में सुधार
इंजन और कूलिंग से जुड़ी उन्नत तकनीकों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। इलेक्ट्रिक वाटर पंप, हाई-एफिशिएंसी कूलिंग फैन और इलेक्ट्रॉनिक तरीके से नियंत्रित रेडिएटर फैन जैसी प्रणालियां इंजन को बेहतर ढंग से ठंडा रखती हैं। इससे इंजन की दक्षता बढ़ती है और ईंधन की खपत में कमी आती है। बीईई का मानना है कि ऐसी तकनीकों को बढ़ावा देकर वाहन उद्योग को अगली पीढ़ी की ऊर्जा-कुशल तकनीक अपनाने की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।

ऑटो इंडस्ट्री पर क्या होगा असर
कैफे-3 मानकों में बदलाव से वाहन निर्माताओं पर दबाव बढ़ेगा कि वे सिर्फ पुराने और आम फीचर्स पर निर्भर न रहें। कंपनियों को रिसर्च और डेवलपमेंट में निवेश बढ़ाना होगा ताकि वे वाकई नई और प्रभावी तकनीकों को अपने मॉडलों में शामिल कर सकें। इससे बाजार में ज्यादा ईंधन-कुशल, कम उत्सर्जन वाले और पर्यावरण के अनुकूल वाहन आने की उम्मीद है। कैफे-3 मानकों के जरिए सरकार और बीईई यह संदेश दे रहे हैं कि तकनीकी छूट अब आसान रास्ता नहीं होगी। फायदा उसी को मिलेगा जो वास्तव में नई तकनीक अपनाकर ईंधन बचत और उत्सर्जन में ठोस कमी दिखा सके।

TAGGED:BEECAFE-3Cafe-3 normsCafe-3 rules IndiaElectric VehiclesHybrid CarsIndustrial Empire
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article जनवरी 2026 में ऑटो सेक्टर की रिकॉर्ड बिक्री, शोरूम में कार और दोपहिया वाहन खरीदते ग्राहक जनवरी में auto sector की धमाकेदार शुरुआत, बिक्री ने बनाया नया रिकॉर्ड
Next Article भारतीय शेयर बाजार में IT सेक्टर की गिरावट, निफ्टी 50 में IT वेटेज 26 साल के निचले स्तर पर बाजार से पिछड़ा IT प्रदर्शन: निफ्टी 50 के मुकाबले क्यों फेल हो रहे आईटी शेयर?
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Might Also Like

CII अध्यक्ष का बयान: FTA से भारत को वैश्विक व्यापार में मिलेगा नया मौका, बढ़ेगा निर्यात और खुलेगा ग्लोबल मार्केट का दरवाज़ा
अन्य

CII अध्यक्ष का बड़ा बयान, FTA से खुलेगा ग्लोबल व्यापार का रास्ता

By
Industrial Empire
UP का उभरता औद्योगिक और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) हब
ट्रेंडिंग खबरें

UP: उभरता हुआ ग्लोबल इंडस्ट्रियल और GCC हब

By
Industrial Empire
माइक्रोसॉफ्ट इंडिया अध्यक्ष पुनीत चंडोक भारत को तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भविष्य कहा।
आईटी

माइक्रोसॉफ्ट इंडिया: भारत तकनीक और AI निवेश का सबसे बड़ा हब

By
Shashank Pathak
Google Chrome security alert showing zero day vulnerabilities and emergency update warning for users
ऑटो/टेक

350 करोड़ Chrome यूजर्स पर खतरा! Google ने जारी किया इमरजेंसी अपडेट, तुरंत करें ये जरूरी काम

By
Shashank Pathak
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation
Facebook X-twitter Youtube Linkedin

Quick links

  • About Us
  • Contact Us
Categories
  • होम
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • बाज़ार
  • ऑटो/टेक
  • बैंकिंग
  • आईटी
  • टेलिकॉम
  • एनर्जी
  • एग्रीकल्चर
  • फार्मा
  • फर्श से अर्श तक
  • अन्य

Policies

  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions

Copyright © 2025 The Industial Empire. All Rights Reserved.

Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?