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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > ट्रेंडिंग खबरें > भारत बनेगा startups का सुपरपावर, ₹10,000 करोड़ के नए फंड से बढ़ेगी रफ्तार
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भारत बनेगा startups का सुपरपावर, ₹10,000 करोड़ के नए फंड से बढ़ेगी रफ्तार

Last updated: 14/02/2026 6:39 PM
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Manu Tiwari
ByManu Tiwari
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भारत में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देता ₹10,000 करोड़ का फंड ऑफ फंड्स 2.0
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भारत का startups इकोसिस्टम एक बार फिर बड़ी छलांग लगाने को तैयार है। केंद्र सरकार ने ₹10,000 करोड़ के नए “फंड ऑफ फंड्स 2.0” को मंजूरी दे दी है, जिसका मकसद देश में वेंचर कैपिटल निवेश को बढ़ावा देना और डीप-टेक व तकनीक आधारित इनोवेटिव मैन्युफैक्चरिंग स्टार्टअप्स को मजबूती देना है। इस फैसले से शुरुआती ग्रोथ फेज में मौजूद स्टार्टअप्स को पूंजी जुटाने में आसानी होगी और नए यूनिकॉर्न बनने की रफ्तार तेज हो सकती है।

Startups India को मिला नया बूस्ट
2016 में Startup India की शुरुआत के बाद से भारत में स्टार्टअप कल्चर तेजी से मजबूत हुआ है। सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या कुछ ही वर्षों में सैकड़ों से बढ़कर दो लाख से ज्यादा हो चुकी है। 2025 में रिकॉर्ड 49,400 से अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता मिली, जो बताता है कि उद्यमिता को लेकर युवाओं में जबरदस्त उत्साह है। फिलहाल देश में करीब 100 यूनिकॉर्न स्टार्टअप हैं और नए फंड से इस संख्या में और तेजी से बढ़ोतरी की उम्मीद है।

क्या है फंड ऑफ फंड्स 2.0 और क्यों है यह अहम?
फंड ऑफ फंड्स 2.0 सरकार की वह पहल है, जिसके तहत सीधे स्टार्टअप्स में निवेश न करके वेंचर कैपिटल फंड्स में पूंजी डाली जाती है। ये फंड्स आगे चलकर विभिन्न स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं। इसका फायदा यह होता है कि जोखिम का बंटवारा होता है और ज्यादा से ज्यादा स्टार्टअप्स तक पूंजी पहुंच पाती है। 2016 में शुरू हुए पहले फंड ऑफ फंड्स ने घरेलू वेंचर कैपिटल बाजार को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी। उसी सफलता के आधार पर अब दूसरा चरण शुरू किया गया है, जिसका दायरा पहले से बड़ा रखा गया है।

डीप-टेक और इनोवेटिव मैन्युफैक्चरिंग पर खास फोकस
नए फंड का बड़ा हिस्सा डीप-टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, क्लीन टेक और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे स्टार्टअप्स को सपोर्ट करने पर खर्च होगा। ये ऐसे सेक्टर हैं जिनमें रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए लंबी अवधि की पूंजी की जरूरत होती है। फंड ऑफ फंड्स 2.0 का उद्देश्य इन क्षेत्रों में काम कर रहे फाउंडर्स को शुरुआती दौर में आर्थिक सुरक्षा देना है, ताकि पैसों की कमी के कारण अच्छे आइडियाज बीच में ही दम न तोड़ दें।

पहले फेज की सफलता ने दिखाया रास्ता
पहले फंड ऑफ फंड्स के तहत 145 से ज्यादा वैकल्पिक निवेश फंडों के जरिए देश भर के 1,370 से अधिक स्टार्टअप्स में निवेश हुआ था। कृषि, फिनटेक, हेल्थकेयर, एजुकेशन, ई-कॉमर्स, स्पेस टेक्नोलॉजी और बायोटेक जैसे कई सेक्टर्स में इससे नई कंपनियों को पंख मिले। इससे साफ है कि सरकार का यह मॉडल स्टार्टअप्स तक पूंजी पहुंचाने में कारगर साबित हुआ है। अब दूसरे फेज से इस रफ्तार को और तेज करने की तैयारी है।

मेट्रो से बाहर भी बढ़ेगा इनोवेशन
नए फंड की एक खास बात यह है कि निवेश सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार का फोकस है कि छोटे शहरों और कस्बों में भी स्टार्टअप्स को फंडिंग मिले। इससे देश के हर कोने में इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। घरेलू वेंचर कैपिटल बेस को मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि विदेशी पूंजी पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो सके।

स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए आगे की राह
फंड ऑफ फंड्स 2.0 के लिए एक अधिकार प्राप्त समिति बनाई जाएगी, जो निवेश की दिशा तय करेगी और निगरानी करेगी। साथ ही सरकार ने स्टार्टअप के रूप में मान्यता के नियमों में भी ढील दी है, जिससे ज्यादा कंपनियां इस इकोसिस्टम का हिस्सा बन सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पूंजी, नीति समर्थन और इनोवेशन का यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत स्टार्टअप्स का वैश्विक हब बन सकता है और यूनिकॉर्न्स की संख्या में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा।

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