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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > नॉन रिन्यूएबल एनर्जी > भारत को russian oil खरीदने की मिली अस्थायी राहत, अमेरिका ने 30 दिन की अनुमति दी
नॉन रिन्यूएबल एनर्जी

भारत को russian oil खरीदने की मिली अस्थायी राहत, अमेरिका ने 30 दिन की अनुमति दी

Last updated: 06/03/2026 12:17 PM
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Industrial Empire
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India allowed to buy Russian Oil for 30 days as US gives temporary relief amid global oil supply concerns
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वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत को रूस से तेल (russian oil) खरीदने के मामले में बड़ी राहत मिली है। अमेरिका ने भारत को सीमित अवधि के लिए रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने इसके लिए एक जनरल लाइसेंस जारी किया है, जिसके तहत भारत 30 दिनों तक कुछ शर्तों के साथ रूसी तेल खरीद सकता है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब फारस की खाड़ी में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया भर में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

5 मार्च से पहले लोड हुए तेल पर लागू होगा नियम
अमेरिका द्वारा जारी यह छूट पूरी तरह से सीमित और शर्तों के साथ लागू होगी। इस लाइसेंस के अनुसार भारत केवल वही रूसी तेल खरीद सकता है, जिसे 5 मार्च से पहले जहाजों पर लोड किया गया था। इसके साथ यह भी जरूरी है कि यह तेल भारत ही आए और इसे किसी भारतीय कंपनी द्वारा खरीदा जाए। यह अनुमति 4 अप्रैल रात 12:01 बजे (वॉशिंगटन समय) तक लागू रहेगी। यानी यह राहत स्थायी नहीं बल्कि केवल अस्थायी व्यवस्था है।

फारस की खाड़ी में तनाव के बीच लिया गया फैसला
अमेरिका का यह कदम ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है। फारस की खाड़ी में संघर्ष की स्थिति के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे माहौल में दुनिया के बड़े तेल आयातक देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक अहम मुद्दा बन गई है। माना जा रहा है कि इसी कारण अमेरिका ने भारत को सीमित समय के लिए यह राहत दी है, ताकि वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई का संतुलन बना रहे।

पहले भारत पर बनाया गया था दबाव
इस फैसले से पहले अमेरिका भारत पर रूस से तेल खरीद कम करने का दबाव बना रहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारत के कुछ उत्पादों पर टैरिफ भी लगाया था, ताकि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करे। हालांकि भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद जारी रखी थी।

अस्थायी राहत, रूस को ज्यादा लाभ नहीं
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि यह अनुमति केवल सीमित समय के लिए दी गई है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई को बनाए रखना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था से रूस को बड़ा आर्थिक फायदा नहीं होगा, क्योंकि यह केवल उस तेल के लेनदेन की अनुमति देता है जो पहले से समुद्र में फंसा हुआ है। जानकारी के मुताबिक पिछले सप्ताह के अंत तक एशियाई समुद्री क्षेत्र में करीब 9.5 मिलियन बैरल रूसी तेल जहाजों में मौजूद था, जो खरीदारों का इंतजार कर रहा था।

भारतीय रिफाइनरियों के लिए राहत
अमेरिका की इस अस्थायी छूट से भारतीय तेल रिफाइनरियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हाल के महीनों में रूस से तेल की सप्लाई कम होने का असर भारत की कुछ रिफाइनरियों पर भी देखने को मिला है। सरकारी और निजी रिफाइनरियां लगातार वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रही थीं।

कुछ रिफाइनरियों पर दिखा असर
रूसी तेल की कम सप्लाई का असर अब कुछ कंपनियों के संचालन पर भी पड़ने लगा है। मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड ने अपने ग्राहकों को सूचित किया है कि वह फिलहाल तेल उत्पादों का निर्यात रोक रही है। कंपनी ने यह कदम कम स्टॉक के कारण उठाया है। बताया जा रहा है कि कच्चे तेल की कमी के चलते कंपनी को अपनी तीन में से एक प्रोसेसिंग यूनिट अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ी है।

यूक्रेन युद्ध के बाद भारत बना बड़ा खरीदार
दरअसल रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद रूस ने अपने कच्चे तेल पर भारी छूट देना शुरू किया, जिसका फायदा भारत और चीन जैसे देशों ने उठाया। इसी कारण भारत समुद्री मार्ग से आने वाले रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था।

हालांकि पिछले कुछ महीनों में अमेरिका के दबाव और वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों के चलते भारत ने रूस से तेल खरीद में कुछ कमी की है। खासकर हाल ही में अमेरिका और भारत के बीच हुए व्यापार समझौते के बाद यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया था।

आगे क्या होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा दी गई यह राहत फिलहाल केवल अस्थायी समाधान है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है या वैश्विक तेल सप्लाई पर दबाव बढ़ता है, तो आने वाले समय में इस नीति में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल भारत के लिए यह 30 दिन की राहत ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

TAGGED:donald trumpindia russia oil dealIndustrial EmpirePM ModiRussia Ukraine WarRussian OilRussian Oil India
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