Advance Tax Deadline: वित्त वर्ष 2025–26 अब अपने आखिरी चरण में है और इसके साथ ही करदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण समयसीमा भी नजदीक आ गई है। एडवांस टैक्स की चौथी और अंतिम किस्त जमा करने की आखिरी तारीख 15 मार्च 2026 है। यदि करदाता तय समय तक यह भुगतान नहीं करते हैं, तो उन्हें ब्याज और पेनाल्टी का सामना करना पड़ सकता है। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि कई लोग इस समयसीमा को नजरअंदाज कर देते हैं और बाद में अतिरिक्त वित्तीय बोझ झेलना पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि करदाता अपनी आय का सही आकलन करके समय रहते एडवांस टैक्स का भुगतान कर दें।
क्या होता है एडवांस टैक्स?
एडवांस टैक्स वह कर है जिसे करदाता अपनी अनुमानित सालाना आय के आधार पर पहले से किस्तों में जमा करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि वित्त वर्ष के अंत में करदाताओं को एक साथ बड़ी राशि के रूप में टैक्स न देना पड़े। भारत में टैक्स व्यवस्था इस तरह बनाई गई है कि आय होने के साथ-साथ टैक्स भी धीरे-धीरे जमा होता रहे। यही वजह है कि आयकर विभाग पूरे साल के दौरान अलग-अलग चरणों में एडवांस टैक्स जमा करने की सुविधा देता है। आमतौर पर एडवांस टैक्स चार किस्तों में जमा किया जाता है। पहली किस्त जून में, दूसरी सितंबर में, तीसरी दिसंबर में और चौथी तथा अंतिम किस्त 15 मार्च तक जमा करनी होती है। अंतिम किस्त तक करदाता को अपनी अनुमानित टैक्स देनदारी का लगभग पूरा भुगतान कर देना चाहिए।
किन लोगों को देना पड़ता है एडवांस टैक्स?
Income Tax Act 1961 की धारा 208 के अनुसार ऐसे सभी करदाताओं को एडवांस टैक्स देना जरूरी होता है जिनकी अनुमानित टैक्स देनदारी टीडीएस (TDS) कटने के बाद भी 10,000 रुपये या उससे अधिक होती है। इसका मतलब यह है कि यदि किसी व्यक्ति की कुल टैक्स देनदारी 10,000 रुपये से ज्यादा है, तो उसे वित्त वर्ष के दौरान ही किस्तों में टैक्स जमा करना होगा। कई लोग यह मानते हैं कि एडवांस टैक्स केवल व्यवसायियों के लिए होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। यदि किसी वेतनभोगी कर्मचारी की आय के अन्य स्रोत भी हैं, तो उसे भी एडवांस टैक्स देना पड़ सकता है।
इन आय स्रोतों पर भी लागू होता है नियम
टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार सैलरी के अलावा अन्य आय स्रोत होने पर एडवांस टैक्स देना जरूरी हो सकता है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति को किराये से आय मिलती है, शेयर बाजार से पूंजीगत लाभ होता है या किसी बिजनेस या फ्रीलांस काम से कमाई होती है, तो यह आय भी टैक्स के दायरे में आती है। इसी तरह रियल एस्टेट से होने वाली कमाई, ब्याज से आय या निवेश से मिलने वाला लाभ भी टैक्स देनदारी को बढ़ा सकता है। ऐसे मामलों में करदाता को अपनी कुल अनुमानित आय का हिसाब लगाकर एडवांस टैक्स जमा करना चाहिए।
प्रोफेशनल्स के लिए क्यों जरूरी है एडवांस टैक्स?
डॉक्टर, वकील, कंसल्टेंट, आर्किटेक्ट और अन्य स्वतंत्र पेशेवरों के लिए एडवांस टैक्स देना खास तौर पर जरूरी होता है। इसका कारण यह है कि इन पेशों में आमतौर पर कोई नियोक्ता नहीं होता जो पहले से टैक्स काटकर सरकार के पास जमा करे। इसलिए इन पेशेवरों को अपनी अनुमानित आय का आकलन करके खुद ही टैक्स जमा करना पड़ता है। यदि वे समय पर यह भुगतान नहीं करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है।
वरिष्ठ नागरिकों को मिलती है राहत
हालांकि आयकर नियमों में कुछ मामलों में छूट भी दी गई है। 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के निवासी वरिष्ठ नागरिकों को एडवांस टैक्स से छूट मिलती है, बशर्ते उनकी आय किसी व्यवसाय या पेशे से न हो। यदि किसी वरिष्ठ नागरिक की आय केवल पेंशन, बैंक ब्याज या निवेश से हो रही है, तो उन्हें एडवांस टैक्स जमा करने की आवश्यकता नहीं होती। यह प्रावधान वरिष्ठ नागरिकों को टैक्स प्रक्रिया में कुछ राहत देने के उद्देश्य से बनाया गया है।
समय पर भुगतान क्यों है जरूरी?
टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि एडवांस टैक्स की समयसीमा का पालन करना बेहद जरूरी है। यदि करदाता निर्धारित तारीख तक भुगतान नहीं करते हैं, तो आयकर विभाग उनकी बकाया राशि पर ब्याज और पेनाल्टी लगा सकता है। इसके अलावा गलत अनुमान के कारण कम टैक्स जमा होने की स्थिति में भी अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है। इसलिए बेहतर यही है कि करदाता अपनी आय का सही आकलन करें और 15 मार्च से पहले एडवांस टैक्स की अंतिम किस्त जमा कर दें। समय पर टैक्स भुगतान न केवल कानूनी जिम्मेदारी है, बल्कि इससे बाद में आने वाली वित्तीय परेशानियों से भी बचा जा सकता है।