केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले नैनो उर्वरकों (nano fertilizer) को लेकर बड़ा और अहम फैसला लिया है। अब किसी भी कंपनी के लिए नैनो फर्टिलाइजर को सीधे बाजार में उतारना आसान नहीं होगा। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना वैज्ञानिक परीक्षण, सुरक्षा डेटा और मल्टी-लोकेशन ट्रायल के कोई भी नैनो उर्वरक बाजार में नहीं बेचा जा सकेगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और कृषि में इस्तेमाल होने वाले उर्वरकों की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।
सरकार ने यह फैसला उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक या मिश्रित) नियंत्रण आदेश, 1985 में संशोधन करके लिया है। नए नियमों के तहत कंपनियों को अपने उत्पाद की सुरक्षा, प्रभाव और गुणवत्ता से जुड़े सभी वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। इसके बाद ही उन्हें बाजार में उत्पाद लॉन्च करने की अनुमति मिल सकेगी।
क्यों जरूरी हुआ यह फैसला
पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र में नैनो तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ा है। नैनो उर्वरकों को आधुनिक खेती का भविष्य माना जा रहा है, क्योंकि यह कम मात्रा में भी अधिक प्रभाव दिखाने की क्षमता रखते हैं। इससे किसानों की लागत कम हो सकती है और फसल उत्पादन भी बेहतर हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन उत्पादों को बिना पर्याप्त वैज्ञानिक परीक्षण के बाजार में उतारा गया, तो इससे मिट्टी, फसल और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यही वजह है कि सरकार ने इन उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियम लागू किए हैं।
लॉन्च से पहले जरूरी होंगे कड़े परीक्षण
नए नियमों के अनुसार अब कोई भी कंपनी सीधे नैनो उर्वरक को बाजार में लॉन्च नहीं कर सकेगी। उत्पाद लॉन्च करने से पहले कंपनियों को विस्तृत सुरक्षा परीक्षण और बायो-टॉक्सिसिटी से जुड़ा डेटा प्रस्तुत करना होगा। यह डेटा केवल उन प्रयोगशालाओं से मान्य होगा जो GLP (गुड लेबोरेटरी प्रैक्टिस) या NABL से मान्यता प्राप्त हों। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नैनो उर्वरक किसानों, मिट्टी और पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित हों। सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया से बाजार में केवल वही उत्पाद आएंगे जो वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और सुरक्षित होंगे।
मल्टी-लोकेशन ट्रायल अब अनिवार्य
सरकार ने नैनो उर्वरकों की प्रभावशीलता को जांचने के लिए मल्टी-लोकेशन ट्रायल को भी अनिवार्य कर दिया है। इसका मतलब है कि किसी भी नैनो उर्वरक को मंजूरी देने से पहले अलग-अलग क्षेत्रों में उसका परीक्षण किया जाएगा। नियमों के अनुसार कम से कम 10 अलग-अलग फसलों पर परीक्षण करना होगा। इसके अलावा दो अलग-अलग मौसमों में और तीन अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों में भी परीक्षण किए जाएंगे। इन परीक्षणों की निगरानी भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) या राज्य कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि नैनो उर्वरक विभिन्न परिस्थितियों में किस तरह काम करते हैं और उनका फसल उत्पादन पर क्या प्रभाव पड़ता है।
अनुमति की अवधि भी घटाई गई
नए नियमों के तहत नैनो उर्वरकों के लिए मिलने वाली शुरुआती अनुमति की अवधि भी कम कर दी गई है। पहले यह अनुमति तीन साल तक वैध रहती थी, लेकिन अब इसे घटाकर दो साल कर दिया गया है। इन दो वर्षों के भीतर कंपनियों को अपने उत्पाद से जुड़े विस्तृत परिणाम और प्रभाव का डेटा सरकार के सामने प्रस्तुत करना होगा। अगर कंपनियां तय समय में यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराती हैं, तो उनके उत्पाद की अनुमति स्वतः समाप्त हो सकती है। सरकार का मानना है कि इससे कंपनियां अपने उत्पादों के प्रति अधिक जिम्मेदार रहेंगी और लगातार शोध व परीक्षण करती रहेंगी।
हर बैच की लैब जांच होगी
नैनो उर्वरकों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सरकार ने एक और सख्त नियम लागू किया है। अब बाजार में भेजे जाने वाले हर बैच की जांच NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में कराना अनिवार्य होगा। कंपनियों को यह परीक्षण रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत करनी होगी। रिपोर्ट के आधार पर ही उस बैच को बाजार में बेचने की अनुमति दी जाएगी। इस कदम से बाजार में घटिया या असुरक्षित उत्पादों की एंट्री को रोका जा सकेगा।
पैकेट पर जरूरी होंगे सुरक्षा निर्देश
सरकार ने नैनो उर्वरकों के पैकेजिंग नियमों को भी सख्त किया है। अब कंपनियों को अपने उत्पाद के पैकेट पर स्पष्ट सुरक्षा निर्देश देना होगा। इसके अलावा किसानों के लिए एक अलग “पैकेज ऑफ प्रैक्टिस” भी देना अनिवार्य होगा। इसमें बताया जाएगा कि नैनो उर्वरकों का सही उपयोग कैसे किया जाए और फसलों के अनुसार इसकी कितनी मात्रा इस्तेमाल करनी चाहिए। नए नियमों के अनुसार किसानों को यह भी बताया जाएगा कि पारंपरिक उर्वरकों और नैनो उर्वरकों का संतुलित उपयोग कैसे किया जाए। उदाहरण के तौर पर 75 प्रतिशत सामान्य उर्वरक और 25 प्रतिशत नैनो उर्वरक का संयोजन कई फसलों के लिए उपयुक्त माना गया है।
किसानों को ट्रेनिंग देना भी जरूरी
सरकार ने कंपनियों के लिए यह भी अनिवार्य किया है कि वे किसानों को नैनो उर्वरकों के सुरक्षित और सही उपयोग की ट्रेनिंग दें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसान इन उत्पादों का सही मात्रा में और सही तरीके से इस्तेमाल कर सकें। सही जानकारी के अभाव में इन उर्वरकों का गलत उपयोग फसल और मिट्टी दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
अब उत्पाद के आधार पर मिलेगी मंजूरी
नए नियमों के तहत एक और बड़ा बदलाव किया गया है। अब नैनो उर्वरकों की मंजूरी कंपनी के आधार पर नहीं बल्कि उत्पाद के आधार पर दी जाएगी। इसका मतलब यह है कि यदि किसी कंपनी को एक उत्पाद के लिए अनुमति मिल जाती है, तो उसके दूसरे उत्पाद को स्वतः मंजूरी नहीं मिलेगी। हर नए उत्पाद के लिए अलग से सभी परीक्षण और प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
ICAR की रिसर्च के आधार पर आगे का फैसला
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नैनो उर्वरकों को लंबे समय तक बाजार में बनाए रखने का फैसला वैज्ञानिक शोध के आधार पर ही लिया जाएगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा किए गए शोध और वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किसी उत्पाद को आगे भी अनुमति दी जाए या नहीं। अगर शोध के परिणाम सकारात्मक होंगे तभी उस उत्पाद को लंबे समय तक बाजार में रहने की अनुमति मिलेगी।
कृषि क्षेत्र के लिए नए अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि नैनो तकनीक कृषि क्षेत्र में कई नई संभावनाएं खोल सकती है। यह तकनीक उर्वरकों के बेहतर उपयोग, लागत में कमी और फसल उत्पादन बढ़ाने में मदद कर सकती है। नैनो उर्वरकों का उपयोग कम मात्रा में अधिक प्रभाव देने की क्षमता रखता है, जिससे किसानों को कम लागत में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। साथ ही यह मिट्टी की गुणवत्ता को भी बेहतर बना सकता है। हालांकि इसके लिए जरूरी है कि इन उत्पादों का इस्तेमाल वैज्ञानिक तरीके से और पर्याप्त परीक्षण के बाद ही किया जाए।
किसानों की सुरक्षा और गुणवत्ता पर सरकार का फोकस
सरकार का यह कदम किसानों की सुरक्षा और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। नए नियमों के लागू होने के बाद अब बिना वैज्ञानिक परीक्षण, सुरक्षा डेटा और मल्टी-लोकेशन ट्रायल के कोई भी नैनो उर्वरक बाजार में नहीं आ सकेगा। इससे किसानों को सुरक्षित और प्रभावी उत्पाद मिल सकेंगे और कृषि क्षेत्र में तकनीक का उपयोग अधिक जिम्मेदारी के साथ किया जा सकेगा।