पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की रसोई तक पहुंचने लगा है। एलपीजी की सप्लाई पर दबाव बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG कनेक्शन मौजूद है, वे अब एलपीजी सिलेंडर नहीं रख सकेंगे और न ही उसका रिफिल ले पाएंगे। इस फैसले का उद्देश्य सीमित एलपीजी संसाधनों को उन परिवारों तक पहुंचाना है, जिनके पास खाना पकाने के लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
14 मार्च की अधिसूचना में आया नया नियम
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से 14 मार्च को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि जिन घरेलू उपभोक्ताओं के पास पहले से PNG कनेक्शन के साथ LPG कनेक्शन भी है, उन्हें अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा। इसके बाद वे सरकारी तेल कंपनियों या उनके वितरकों से एलपीजी सिलेंडर की नई बुकिंग या रिफिल नहीं करा सकेंगे।
सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में एलपीजी की उपलब्धता सीमित हो गई है। ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि जिन घरों में खाना बनाने के लिए केवल एलपीजी ही उपलब्ध है, उन्हें प्राथमिकता दी जाए। यही कारण है कि PNG कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को अब एलपीजी से दूरी बनानी होगी।
पश्चिम एशिया संकट का असर भारत पर
दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के टकराव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा परिवहन मार्गों में गिना जाता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचती है। इसके बंद होने से कई देशों की तरह भारत की ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। खासकर एलपीजी की सप्लाई पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता
भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करता है। एलपीजी के मामले में यह निर्भरता और भी ज्यादा है। देश के कुल एलपीजी आयात का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया के देशों से आता है।
जब होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हुआ तो वहां से आने वाली एलपीजी की खेप भारत तक पहुंचना मुश्किल हो गई। इससे देश में एलपीजी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया और सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई। इसी स्थिति को संभालने के लिए सरकार को कई अहम कदम उठाने पड़े हैं।
रिफाइनरी कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने का निर्देश
सप्लाई संकट को कम करने के लिए सरकार ने देश की रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। इसके बाद कंपनियों ने अपने उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की है।
हालांकि घरेलू बाजार में एलपीजी की मांग काफी अधिक है। ऐसे में उत्पादन बढ़ने के बावजूद पूरी कमी को पूरा करना अभी भी चुनौती बना हुआ है। यही वजह है कि सरकार को एलपीजी के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए कुछ सख्त फैसले लेने पड़े हैं।
होटल और व्यवसायिक इस्तेमाल पर भी असर
सरकार ने एलपीजी की उपलब्धता को देखते हुए व्यावसायिक और औद्योगिक उपयोग को भी सीमित करने का फैसला लिया है। होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यवसायिक इकाइयों को मिलने वाली एलपीजी सप्लाई में कटौती की गई है।
सरकार का उद्देश्य है कि सबसे पहले घरेलू उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध कराई जाए, ताकि आम लोगों की रसोई पर संकट न आए। इसी प्राथमिकता के तहत PNG कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं के लिए नया नियम लागू किया गया है।
सिलेंडर बुकिंग के नियम भी बदले
एलपीजी की सीमित उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए सिलेंडर बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया गया है। शहरी क्षेत्रों में एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद अगली बुकिंग के लिए इंतजार की अवधि 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी गई है।
वहीं ग्रामीण इलाकों में यह अवधि 45 दिन तय की गई है। सरकार का मानना है कि इससे गैस की उपलब्धता को बेहतर तरीके से संतुलित किया जा सकेगा और ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ताओं तक एलपीजी पहुंच सकेगी।
संकट के बीच संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की कोशिश
सरकार का कहना है कि यह फैसला मौजूदा ऊर्जा संकट को देखते हुए लिया गया है। इसका मकसद एलपीजी की उपलब्धता को संतुलित रखना और जरूरतमंद उपभोक्ताओं को राहत देना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया की स्थिति जल्द सामान्य हो जाती है तो एलपीजी की सप्लाई भी धीरे-धीरे बेहतर हो सकती है। फिलहाल सरकार संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और आपूर्ति संतुलन के जरिए इस संकट से निपटने की कोशिश कर रही है।