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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > बाज़ार > Crude oil 100 डॉलर पार, शेयर बाजार में भारी गिरावट: निवेशकों की बढ़ी चिंता
बाज़ार

Crude oil 100 डॉलर पार, शेयर बाजार में भारी गिरावट: निवेशकों की बढ़ी चिंता

Last updated: 28/03/2026 12:23 PM
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Industrial Empire
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Crude oil price above 100 dollars causing stock market crash in India Sensex and Nifty fall sharply
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वैश्विक बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आ रहा है। crude oil की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के साथ ही निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने बाजार में डर का माहौल बना दिया है, जिसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा है।

सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट, पांचवीं साप्ताहिक गिरावट
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स 1,690 अंक यानी 2.3 फीसदी गिरकर 73,583 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 भी 487 अंक टूटकर 22,820 के स्तर पर आ गया। खास बात यह है कि इस हफ्ते दोनों सूचकांकों में कुल 1.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जो लगातार पांचवीं साप्ताहिक गिरावट है। यह अगस्त 2025 के बाद का सबसे लंबा गिरावट का दौर माना जा रहा है।

इस गिरावट से निवेशकों की संपत्ति पर भी बड़ा असर पड़ा है। बंबई स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 8.9 लाख करोड़ रुपये घटकर 422.2 लाख करोड़ रुपये रह गया है। इससे साफ है कि बाजार में घबराहट का माहौल बना हुआ है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बना बड़ी वजह
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी है। ब्रेंट क्रूड 3.1 फीसदी बढ़कर 103 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। लगातार तीसरे दिन तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है, जिससे वैश्विक बाजार में चिंता और बढ़ गई है।

पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। इससे तेल आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम रास्ता है, उसके बाधित होने से बाजार में डर और बढ़ गया है। माना जाता है कि दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और एलएनजी की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है।

वैश्विक तनाव और महंगाई का बढ़ता खतरा
लंबे समय से जारी इस भू-राजनीतिक तनाव का असर सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी होने, कंपनियों की कमाई घटने और महंगाई बढ़ने की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।

इसी के चलते भारतीय रुपया भी दबाव में आ गया है और डॉलर के मुकाबले 94.81 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता व्यापारिक तनाव भी बाजार की चिंता को और बढ़ा रहा है।

भारतीय बाजार पर बढ़ता दबाव
भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। इसी वजह से वैश्विक निवेश संस्थानों ने भी भारत को लेकर अपने अनुमान घटाने शुरू कर दिए हैं। हाल ही में एक प्रमुख वैश्विक निवेश बैंक ने भारत की 2026 की आय वृद्धि का अनुमान 16 फीसदी से घटाकर 8 फीसदी कर दिया है।

बड़े शेयरों में गिरावट, निवेशकों की बढ़ी बेचैनी
बाजार में गिरावट का असर बड़े शेयरों पर भी देखने को मिला। रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 4.5 फीसदी तक गिर गया, जो पिछले डेढ़ साल में सबसे बड़ी गिरावट है। इसके अलावा एचडीएफसी बैंक के शेयर में भी 3.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

पूरे बाजार की बात करें तो बीएसई पर 3,615 शेयर गिरावट में रहे, जबकि सिर्फ 761 शेयरों में ही बढ़त देखी गई। विदेशी निवेशकों ने भी इस दौरान 4,367 करोड़ रुपये की बिकवाली की, हालांकि घरेलू निवेशकों ने कुछ हद तक बाजार को सहारा देने की कोशिश की।

क्या आगे भी जारी रहेगा दबाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,000 और सेंसेक्स के लिए 74,500 का स्तर अहम प्रतिरोध बना हुआ है। जब तक बाजार इन स्तरों को पार नहीं करता, तब तक निवेशकों का भरोसा पूरी तरह लौटना मुश्किल नजर आता है।

हालांकि, कुछ जानकार इसे लंबी अवधि के निवेशकों के लिए एक अवसर के रूप में भी देख रहे हैं। उनका मानना है कि बाजार में जो अत्यधिक मूल्यांकन था, वह अब संतुलित हो रहा है, जिससे आगे चलकर बेहतर निवेश के मौके बन सकते हैं।

TAGGED:crude oilcrude oil priceIndian EconomyIndustrial EmpireNiftySensexStock market crash
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