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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > टेलिकॉम > PLI 2.0 से भारत को बड़ा फायदा: 2031 तक 130 अरब डॉलर मोबाइल उत्पादन, दुनिया में 35% हिस्सेदारी का लक्ष्य
टेलिकॉम

PLI 2.0 से भारत को बड़ा फायदा: 2031 तक 130 अरब डॉलर मोबाइल उत्पादन, दुनिया में 35% हिस्सेदारी का लक्ष्य

Last updated: 13/04/2026 6:50 PM
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Manu Tiwari
ByManu Tiwari
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स्मार्टफोन फैक्ट्री में काम करते कर्मचारी, असेंबली लाइन पर मोबाइल फोन का उत्पादन करते हुए
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भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर तेजी से एक नए बदलाव के दौर में प्रवेश कर रहा है। स्मार्टफोन निर्माण के क्षेत्र में भारत ने पिछले कुछ वर्षों में जो प्रगति हासिल की है, अब उसे अगले स्तर तक ले जाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। इसी दिशा में इंडस्ट्री ने सरकार के सामने PLI 2.0 (Production-Linked Incentive) योजना का प्रस्ताव रखा है, जिसका लक्ष्य 2031 तक भारत को वैश्विक मोबाइल उत्पादन का 30-35% हिस्सा दिलाना है। वर्तमान में यह हिस्सेदारी लगभग 15% के आसपास है, जिससे साफ है कि आने वाले वर्षों में यह सेक्टर बड़े विस्तार की ओर बढ़ सकता है।

Contents
PLI 2.0 क्या है और क्यों जरूरी है?2031 तक 130 अरब डॉलर का लक्ष्यवैश्विक कंपनियों का बढ़ता निवेशसप्लाई चेन और वैल्यू एडिशन पर फोकससरकार और इंडस्ट्री के बीच तालमेलभारत के लिए क्या हैं बड़े फायदे?क्या भारत बन सकता है अगला “मोबाइल फैक्ट्री ऑफ द वर्ल्ड”?

PLI 2.0 क्या है और क्यों जरूरी है?

PLI योजना का उद्देश्य देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और विदेशी कंपनियों को भारत में उत्पादन के लिए आकर्षित करना है। पहली PLI स्कीम ने भारत को स्मार्टफोन निर्माण के क्षेत्र में मजबूती दी, लेकिन 31 मार्च 2026 को इसके समाप्त होने के बाद इंडस्ट्री को नए प्रोत्साहन की जरूरत महसूस हुई।

PLI 2.0 इसी जरूरत को पूरा करने के लिए प्रस्तावित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य है:

  • उत्पादन क्षमता को बढ़ाना
  • निर्यात को बढ़ावा देना
  • घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत बनाना

2031 तक 130 अरब डॉलर का लक्ष्य

इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, PLI 2.0 के तहत भारत का सालाना मोबाइल उत्पादन 110-130 अरब डॉलर (लगभग ₹10.18-12.03 लाख करोड़) तक पहुंच सकता है। वहीं, निर्यात भी 55-70 अरब डॉलर (₹5.09-6.48 लाख करोड़) तक पहुंचने की संभावना है।

यह आंकड़े दिखाते हैं कि भारत न सिर्फ घरेलू जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी मजबूत हिस्सेदारी बनाएगा।


वैश्विक कंपनियों का बढ़ता निवेश

भारत में स्मार्टफोन निर्माण के बढ़ते अवसरों को देखते हुए कई बड़ी कंपनियां पहले से ही निवेश कर रही हैं। इनमें Apple Inc., Foxconn, Tata Electronics, Google, Dixon Technologies और Flex Ltd. जैसी कंपनियां शामिल हैं।

इन कंपनियों की मौजूदगी भारत को एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने में मदद कर रही है। खासतौर पर iPhone जैसे प्रीमियम प्रोडक्ट्स का भारत में निर्माण, देश की विश्वसनीयता को बढ़ा रहा है।


सप्लाई चेन और वैल्यू एडिशन पर फोकस

हालांकि भारत में असेंबली बढ़ी है, लेकिन अभी भी कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स का आयात होता है। PLI 2.0 का एक बड़ा लक्ष्य घरेलू स्तर पर कंपोनेंट निर्माण को बढ़ावा देना है।

इससे:

  • लागत कम होगी
  • रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
  • भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी

इंडस्ट्री बॉडी India Cellular and Electronics Association का मानना है कि अगर कंपोनेंट इकोसिस्टम मजबूत किया गया, तो भारत अगले 5-7 सालों में चीन और वियतनाम जैसे देशों को कड़ी टक्कर दे सकता है।


सरकार और इंडस्ट्री के बीच तालमेल

PLI 2.0 का रोडमैप Ministry of Electronics and Information Technology के साथ चर्चा में है। सरकार और इंडस्ट्री के बीच बेहतर तालमेल इस योजना की सफलता के लिए बेहद जरूरी होगा।

नीतिगत स्थिरता, तेज मंजूरी प्रक्रिया और निवेश को आसान बनाना—ये सभी कारक भारत को एक आकर्षक मैन्युफैक्चरिंग डेस्टिनेशन बना सकते हैं।


भारत के लिए क्या हैं बड़े फायदे?

PLI 2.0 योजना के लागू होने से भारत को कई बड़े फायदे मिल सकते हैं:

1. रोजगार सृजन: लाखों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
2. निर्यात में बढ़ोतरी: इलेक्ट्रॉनिक्स भारत का प्रमुख एक्सपोर्ट सेक्टर बन सकता है।
3. GDP में योगदान: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का GDP में योगदान बढ़ेगा।
4. ग्लोबल वैल्यू चेन में हिस्सेदारी: भारत की भूमिका वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत होगी।


क्या भारत बन सकता है अगला “मोबाइल फैक्ट्री ऑफ द वर्ल्ड”?

आज के समय में चीन वैश्विक मोबाइल निर्माण का सबसे बड़ा केंद्र है। लेकिन जियोपॉलिटिकल बदलाव, सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन और भारत की नीतियों ने एक नया अवसर पैदा किया है। अगर PLI 2.0 सही तरीके से लागू होता है, तो भारत न सिर्फ अपनी हिस्सेदारी 35% तक बढ़ा सकता है, बल्कि “मोबाइल फैक्ट्री ऑफ द वर्ल्ड” बनने की दिशा में भी बड़ा कदम उठा सकता है।

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TAGGED:FeaturedIndustrial EmpirePLI 2.0 योजनाइंडस्ट्रियल ग्रोथइंडिया मोबाइल हबइलेक्ट्रॉनिक्स ग्रोथग्लोबल सप्लाई चेनडिजिटल इंडियामेक इन इंडियामैन्युफैक्चरिंग बूममोबाइल मैन्युफैक्चरिंग
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