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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > ऑटो/टेक > भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर ने रचा इतिहास: FY26 में 2.83 करोड़ यूनिट्स की रिकॉर्ड बिक्री
ऑटो/टेक

भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर ने रचा इतिहास: FY26 में 2.83 करोड़ यूनिट्स की रिकॉर्ड बिक्री

Last updated: 14/04/2026 5:33 PM
By
Manu Tiwari
ByManu Tiwari
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भारत में एक आधुनिक ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की असेंबली लाइन जहाँ रोबोटिक मशीनों द्वारा कारों का निर्माण किया जा रहा है।
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भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत में कुल ऑटोमोबाइल होलसेल (थोक बिक्री) 2.83 करोड़ यूनिट्स के आंकड़े को पार कर गई है। यह न केवल पिछले वर्षों की तुलना में एक बड़ी छलांग है, बल्कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और उपभोक्ताओं के बढ़ते भरोसे का भी प्रतीक है।

पिछले वर्ष की तुलना में शानदार बढ़त

अगर हम पिछले आंकड़ों पर नजर डालें, तो वित्त वर्ष 2024-25 में कुल घरेलू वाहन बिक्री 2,56,09,399 (लगभग 2.56 करोड़) यूनिट रही थी। मात्र एक साल के भीतर इस आंकड़े का 2.83 करोड़ तक पहुँचना यह दर्शाता है कि ऑटो सेक्टर में मांग न केवल बनी हुई है, बल्कि तेजी से बढ़ रही है। SIAM के अनुसार, यह वृद्धि दर दो-पहिया, तीन-पहिया और यात्री वाहनों (Passenger Vehicles) के सभी खंडों में देखी गई है।

ग्रामीण मांग ने फूंकी जान

इस रिकॉर्ड तोड़ बिक्री का एक बड़ा हिस्सा दो-पहिया वाहनों के नाम रहा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार और कृषि आय में स्थिरता के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से दो-पहिया वाहनों की जबरदस्त मांग आई है। इसके साथ ही, शहरों में इलेक्ट्रिक स्कूटरों के प्रति बढ़ते आकर्षण ने भी आंकड़ों को ऊपर ले जाने में मदद की है। एंट्री-लेवल बाइक्स और प्रीमियम स्कूटरों, दोनों ने ही इस साल मैन्युफैक्चरर्स की झोली खुशियों से भर दी है।

पैसेंजर व्हीकल और SUV का बढ़ता क्रेज

आज का भारतीय ग्राहक अब केवल माइलेज नहीं, बल्कि कंफर्ट, सेफ्टी और तकनीक की मांग कर रहा है। FY26 में पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट, विशेषकर स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (SUV), की बिक्री में अभूतपूर्व उछाल देखा गया। ऑटो कंपनियों द्वारा लॉन्च किए गए नए मॉडल्स, बेहतर सनरूफ फीचर्स और एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) जैसी तकनीकों ने मध्यम वर्ग को नई कार खरीदने के लिए प्रेरित किया है।

इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का उदय और सरकारी नीतियां

2.83 करोड़ की इस कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों का योगदान अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। सरकार की फेम (FAME) योजना, पीएलआई (PLI) स्कीम और विभिन्न राज्यों द्वारा दी जा रही सब्सिडी ने ईवी इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है। चार्जिंग स्टेशनों की बढ़ती संख्या और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण उपभोक्ताओं का रुझान अब ग्रीन मोबिलिटी की ओर तेजी से शिफ्ट हो रहा है।

इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का असर

देश भर में बन रहे नए एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवेज और गति शक्ति मिशन के तहत लॉजिस्टिक्स में सुधार का सीधा असर कमर्शियल व्हीकल (CV) की बिक्री पर पड़ा है। माल ढुलाई के लिए भारी ट्रकों और ई-कॉमर्स डिलीवरी के लिए छोटे कमर्शियल वाहनों की मांग में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। SIAM के आंकड़ों के अनुसार, कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट ने औद्योगिक गतिविधियों की सक्रियता को स्पष्ट रूप से दर्शाया है।

चुनौतियां और भविष्य की राह

रिकॉर्ड बिक्री के बावजूद, उद्योग के सामने कुछ चुनौतियां बरकरार हैं। कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक सप्लाई चेन की अनिश्चितता अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। हालांकि, SIAM और उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नीतिगत ढांचा इसी तरह सहायक बना रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक ऑटोमोबाइल हब के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम

वित्त वर्ष 2026 के ये आंकड़े केवल संख्या मात्र नहीं हैं, बल्कि यह भारतीय ऑटोमोबाइल जगत की परिपक्वता का प्रमाण हैं। 2.83 करोड़ यूनिट्स की बिक्री यह सुनिश्चित करती है कि भारत न केवल दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटो बाजार है, बल्कि यह भविष्य की तकनीकों को अपनाने के लिए भी पूरी तरह तैयार है। यह उपलब्धि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाती है।

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