The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation
Sunday, May 3, 2026
Facebook X-twitter Youtube Linkedin
  • About Us
  • Contact Us
Subscribe
  • होम
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • बाज़ार
  • ऑटो/टेक
  • बैंकिंग
  • आईटी
  • टेलिकॉम
  • एनर्जी
    • रिन्यूएबल एनर्जी
    • नॉन रिन्यूएबल एनर्जी
  • एग्रीकल्चर
  • फार्मा
  • फर्श से अर्श तक
  • अन्य
Font ResizerAa
The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & InnovationThe Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation
  • होम
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • बाज़ार
  • ऑटो/टेक
  • बैंकिंग
  • आईटी
  • टेलिकॉम
  • एनर्जी
  • एग्रीकल्चर
  • फार्मा
  • फर्श से अर्श तक
  • अन्य
Search
  • होम
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • बाज़ार
  • ऑटो/टेक
  • बैंकिंग
  • आईटी
  • टेलिकॉम
  • एनर्जी
    • रिन्यूएबल एनर्जी
    • नॉन रिन्यूएबल एनर्जी
  • एग्रीकल्चर
  • फार्मा
  • फर्श से अर्श तक
  • अन्य
Have an existing account? Sign In
Follow US
© 2026 The Industrial Empire. All Rights Reserved.
The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > अन्य > सबसे सस्ती IPL टीम कैसे बनी 850 मिलियन डॉलर की स्पोर्ट्स कंपनी?
अन्य

सबसे सस्ती IPL टीम कैसे बनी 850 मिलियन डॉलर की स्पोर्ट्स कंपनी?

Last updated: 03/05/2026 5:58 PM
By
Industrial Empire
Share
IPL RAJASTHAN ROYALS
SHARE

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) आज केवल क्रिकेट का एक टूर्नामेंट नहीं रह गया है, बल्कि यह विश्व के सबसे बड़े और सबसे आकर्षक खेल-व्यावसायिक उद्योगों (Sports-Business Industries) में से एक बन चुका है। कॉर्पोरेट घरानों और वैश्विक निवेशकों के लिए आईपीएल फ्रेंचाइजी अब एक ‘यूनिकॉर्न’ संपत्ति के समान हैं। इस व्यावसायिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो ‘राजस्थान रॉयल्स’ (Rajasthan Royals) की कहानी सबसे दिलचस्प है।

साल 2008 में जब आईपीएल की शुरुआत हुई थी, तब राजस्थान रॉयल्स सबसे कम कीमत में खरीदी गई फ्रेंचाइजी थी। लेकिन आज, यह टीम वैश्विक निजी इक्विटी (Private Equity) फर्मों के लिए निवेश का एक प्रमुख केंद्र बन गई है। एक इंडस्ट्रियल और फाइनेंस पेज के नजरिए से, राजस्थान रॉयल्स की खरीद, हिस्सेदारी की बिक्री, विलय, कॉर्पोरेट विवाद और फिर से एक ग्लोबल ब्रांड के रूप में उभरने की यह यात्रा किसी भी व्यावसायिक केस स्टडी (Business Case Study) से कम नहीं है। इस लेख में हम राजस्थान रॉयल्स के वित्तीय सफर, इसकी ओनरशिप स्ट्रक्चर (स्वामित्व संरचना) में हुए बदलावों और इसके 850 मिलियन डॉलर के विशाल मूल्यांकन तक पहुँचने की पूरी प्रक्रिया का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।

2008 की शुरुआत: सबसे सस्ती फ्रेंचाइजी का रणनीतिक अधिग्रहण

जब बीसीसीआई (BCCI) ने 2008 में आईपीएल टीमों की नीलामी की, तब बड़े औद्योगिक घराने जैसे रिलायंस (मुंबई इंडियंस) और इंडिया सीमेंट्स (चेन्नई सुपर किंग्स) भारी भरकम बोलियां लगा रहे थे। उस समय, ‘इमर्जिंग मीडिया’ (Emerging Media) के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम ने बेहद रणनीतिक और किफायती दृष्टिकोण अपनाया।

मनोज बदाले (Manoj Badale) के नेतृत्व वाले इस समूह ने राजस्थान रॉयल्स की फ्रेंचाइजी को मात्र 67 मिलियन डॉलर (लगभग 268 करोड़ रुपये) में खरीदा था। यह सभी आठ मूल फ्रेंचाइजियों में सबसे सस्ती बोली थी। इस कंसोर्टियम में मनोज बदाले की इमर्जिंग मीडिया के अलावा, रूपर्ट मर्डोक के बेटे लाचलान मर्डोक (Lachlan Murdoch) और रयान टकाल्सेविक (Ryan Tkalcevic) जैसे वैश्विक निवेशक शामिल थे।

व्यावसायिक दृष्टिकोण से यह एक ‘लो इन्वेस्टमेंट, हाई रिटर्न’ (Low Investment, High Return) का उत्कृष्ट उदाहरण था। पहले ही सीजन में शेन वॉर्न की कप्तानी में सबसे सस्ती टीम ने आईपीएल का खिताब जीत लिया, जिससे रातों-रात टीम की ब्रांड वैल्यू और मूल्यांकन (Valuation) में भारी उछाल आया। एक उद्योगपति के नजरिए से, यह साबित हो गया कि खेल व्यवसाय में केवल पैसा ही नहीं, बल्कि सही प्रबंधन और प्रतिभा पहचान (Talent Scouting) भी मुनाफे का सबसे बड़ा कारण बन सकती है।

2009: ग्लैमर का तड़का और हिस्सेदारी की पहली प्रमुख बिक्री

पहले सीजन की सफलता के बाद, राजस्थान रॉयल्स के मालिकों ने अपनी ब्रांड वैल्यू को और अधिक भुनाने (Monetize) का फैसला किया। 2009 में, प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी और उनके व्यवसायी पति राज कुंद्रा ने टीम में निवेश किया।

राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी ने ‘मॉरीशस स्थित कुंद्रा के परिवार की कंपनी’ के माध्यम से लगभग 15.4 मिलियन डॉलर (उस समय के लगभग 75 करोड़ रुपये) का निवेश करके राजस्थान रॉयल्स में 11.7% हिस्सेदारी (Stake) खरीदी। यह राजस्थान रॉयल्स के इतिहास की पहली प्रमुख ‘इक्विटी सेल’ (Equity Sale) थी। इस सौदे ने फ्रेंचाइजी के कुल मूल्यांकन को 67 मिलियन डॉलर से बढ़ाकर सीधे 130 मिलियन डॉलर के पार पहुंचा दिया था। मात्र एक साल के भीतर निवेश का मूल्य दोगुना हो जाना, खेल उद्योग में एक अभूतपूर्व वित्तीय सफलता थी। इस निवेश ने टीम को कॉर्पोरेट जगत के साथ-साथ मनोरंजन उद्योग में भी एक मजबूत ब्रांड के रूप में स्थापित किया।

ये भी पढ़े: बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच HUL को दिखा बड़ा मौका, भारत में लोकल कंपनियों की कमी से बढ़ सकती है बिक्री

विवादों का दौर: कॉर्पोरेट संकट और हिस्सेदारी का पुनर्गठन

किसी भी व्यवसाय की तरह, राजस्थान रॉयल्स को भी गंभीर संकटों का सामना करना पड़ा। 2013 के आईपीएल स्पॉट-फिक्सिंग और सट्टेबाजी कांड ने फ्रेंचाइजी के ब्रांड और व्यवसाय की नींव हिला दी। इस विवाद में राज कुंद्रा का नाम सामने आया, जिसके कारण सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त लोढ़ा समिति ने 2015 में राजस्थान रॉयल्स को दो साल के लिए आईपीएल से निलंबित कर दिया।

औद्योगिक और वित्तीय परिप्रेक्ष्य में, यह एक ‘ब्रांड डैमेज’ (Brand Damage) और ‘क्राइसिस मैनेजमेंट’ (Crisis Management) का क्लासिक मामला था। टीम के प्रायोजक (Sponsors) पीछे हट गए, और फ्रेंचाइजी का मूल्यांकन तेजी से गिरने लगा। इस कॉर्पोरेट संकट से उबरने के लिए, प्रबंधन ने सख्त कदम उठाए। राज कुंद्रा को अपनी हिस्सेदारी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा, ताकि टीम की छवि को और नुकसान न पहुंचे। मनोज बदाले और इमर्जिंग मीडिया ने स्थिति को संभाला और टीम के कॉर्पोरेट ढांचे का पूरी तरह से पुनर्गठन (Restructuring) किया। 2018 में निलंबन समाप्त होने के बाद, टीम ने एक नए विजन और पारदर्शी कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) के साथ वापसी की।

रेडबर्ड कैपिटल पार्टनर्स की एंट्री: वैश्विक खेल व्यवसाय में एकीकरण

राजस्थान रॉयल्स के व्यावसायिक इतिहास में सबसे बड़ा मोड़ साल 2021 में आया, जब अमेरिका स्थित प्रतिष्ठित प्राइवेट इक्विटी फर्म ‘रेडबर्ड कैपिटल पार्टनर्स’ (RedBird Capital Partners) ने फ्रेंचाइजी में रणनीतिक निवेश किया। यह एक ऐसा कदम था जिसने रॉयल्स को एक भारतीय क्रिकेट टीम से एक ‘ग्लोबल स्पोर्ट्स पोर्टफोलियो’ का हिस्सा बना दिया।

रेडबर्ड कैपिटल ने एक द्वितीयक लेन-देन (Secondary Transaction) के माध्यम से राजस्थान रॉयल्स में 15% हिस्सेदारी खरीदी। इस सौदे ने फ्रेंचाइजी का मूल्यांकन (Valuation) 250 मिलियन डॉलर (लगभग 1850 करोड़ रुपये) आंका। रेडबर्ड कोई साधारण निवेशक नहीं है; यह वही फर्म है जिसकी हिस्सेदारी फेनवे स्पोर्ट्स ग्रुप (Fenway Sports Group) में है, जो इंग्लिश प्रीमियर लीग क्लब ‘लिवरपूल एफसी’ (Liverpool FC) और अमेरिकन बेसबॉल टीम ‘बोस्टन रेड सॉक्स’ (Boston Red Sox) का मालिक है।

इस सौदे (Sale and Purchase of Shares) ने राजस्थान रॉयल्स को वैश्विक खेल प्रबंधन की उन्नत तकनीकों, डेटा एनालिटिक्स और ग्लोबल मर्चेंडाइजिंग तक पहुंच प्रदान की। इंडस्ट्रियल नजरिए से, यह इस बात का प्रमाण था कि अमेरिकी वॉल स्ट्रीट (Wall Street) के निवेशकों ने भारतीय क्रिकेट को एक अत्यधिक लाभदायक और स्केलेबल उद्योग के रूप में स्वीकार कर लिया है।

2024: टाइगर ग्लोबल का निवेश और 850 मिलियन डॉलर का मूल्यांकन

आईपीएल मीडिया अधिकारों (Media Rights) में बेतहाशा वृद्धि (2023-2027 चक्र के लिए लगभग 6 बिलियन डॉलर का सौदा) ने सभी फ्रेंचाइजियों के मूल्यांकन को आसमान पर पहुंचा दिया। राजस्थान रॉयल्स भी इस वित्तीय उछाल का सबसे बड़ा लाभार्थी बना।

हाल ही में (2023-2024 के दौरान), एक और प्रमुख अमेरिकी निवेश फर्म, ‘टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट’ (Tiger Global Management) ने राजस्थान रॉयल्स में लगभग 40 मिलियन डॉलर का निवेश करने का निर्णय लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सौदे में राजस्थान रॉयल्स का उद्यम मूल्य (Enterprise Value) लगभग 850 मिलियन डॉलर (लगभग 7000 करोड़ रुपये) आंका गया।

जरा सोचिए: जो कंपनी 2008 में 67 मिलियन डॉलर की थी, वह 15 वर्षों में 850 मिलियन डॉलर की कंपनी बन गई। यह निवेश की दुनिया में 1000% से अधिक का शानदार रिटर्न (ROI) है। टाइगर ग्लोबल आमतौर पर टेक स्टार्टअप्स और ई-कॉमर्स में निवेश के लिए जाना जाता है। उनका एक खेल फ्रेंचाइजी में निवेश करना इस बात को रेखांकित करता है कि आईपीएल टीमें अब पारंपरिक व्यवसायों की तुलना में अधिक सुरक्षित और तेजी से बढ़ने वाली ‘कैश-फ्लो’ संपत्तियां (Cash-Flow Assets) बन गई हैं।

वर्तमान स्वामित्व संरचना और ‘मल्टी-क्लब’ ओनरशिप मॉडल

आज के समय में, राजस्थान रॉयल्स केवल एक टीम नहीं, बल्कि ‘रॉयल्स स्पोर्ट्स ग्रुप’ (Royals Sports Group) नामक एक बहुराष्ट्रीय खेल निगम बन गई है।

वर्तमान मुख्य हिस्सेदारी (अनुमानित):

  • इमर्जिंग मीडिया (मनोज बदाले): यह अभी भी सबसे बड़ा शेयरधारक है और इसके पास बहुमत की हिस्सेदारी (लगभग 65% से अधिक) है।
  • रेडबर्ड कैपिटल पार्टनर्स: लगभग 15% हिस्सेदारी।
  • लाचलान मर्डोक: एक महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक हिस्सेदारी।
  • टाइगर ग्लोबल: हालिया फंडिंग राउंड के आधार पर अल्पसंख्यक हिस्सेदारी।

मल्टी-क्लब ओनरशिप (Multi-Club Ownership): व्यावसायिक विस्तार (Business Expansion) के तहत, रॉयल्स प्रबंधन ने अपने ब्रांड का वैश्विक स्तर पर विस्तार किया है। उन्होंने कैरेबियन प्रीमियर लीग (CPL) में ‘बारबाडोस रॉयल्स’ (Barbados Royals) और दक्षिण अफ्रीका की SA20 लीग में ‘पार्ल रॉयल्स’ (Paarl Royals) को खरीदा है। यह ‘सिटी फुटबॉल ग्रुप’ (जिसके पास मैनचेस्टर सिटी है) की तर्ज पर बनाया गया एक बिज़नेस मॉडल है। इससे रॉयल्स ग्रुप को साल भर प्रायोजन आय (Sponsorship Revenue), मर्चेंडाइज बिक्री और मीडिया एक्सपोजर मिलता रहता है, जिससे निवेशकों को निरंतर रिटर्न प्राप्त होता है।

आय के स्रोत (Revenue Streams) और भविष्य की व्यावसायिक संभावनाएं

एक उद्योग के रूप में राजस्थान रॉयल्स के प्रमुख आय स्रोत इस प्रकार हैं:

  1. केंद्रीय मीडिया अधिकार (Central Media Rights): बीसीसीआई से प्रसारण अधिकारों का हिस्सा, जो कुल राजस्व का 60-70% होता है।
  2. ब्रांड प्रायोजन (Brand Sponsorships): जर्सी स्पॉन्सर, स्टेडियम राइट्स और डिजिटल पार्टनरशिप। टीम का फ्रंट जर्सी स्पॉन्सर (जैसे Luminous) हर साल करोड़ों रुपये का भुगतान करता है।
  3. गेट रिसिप्ट्स (Gate Receipts): सवाई मानसिंह स्टेडियम और गुवाहाटी में खेले जाने वाले मैचों की टिकट बिक्री से होने वाली आय।
  4. मर्चेंडाइजिंग और लाइसेंसिंग: टीम की जर्सी, कैप और अन्य उत्पादों की विश्वव्यापी बिक्री।
  5. डिजिटल और वेब 3.0 पहल: एनएफटी (NFTs), फैंटेसी गेमिंग पार्टनरशिप और एक्सक्लूसिव डिजिटल कंटेंट से होने वाली कमाई।

राजस्थान रॉयल्स का वित्तीय सफर ‘अंडरडॉग’ से लेकर ‘ग्लोबल स्पोर्ट्स पावरहाउस’ बनने की एक प्रेरणादायक व्यावसायिक कहानी है। 67 मिलियन डॉलर की एक मामूली खरीद से शुरू होकर, कई हिस्सेदारी की बिक्री (Stake Sales), कॉर्पोरेट संकटों के प्रबंधन और वैश्विक फंड्स (RedBird और Tiger Global) के रणनीतिक अधिग्रहण के माध्यम से, आज यह 850 मिलियन डॉलर का एक औद्योगिक साम्राज्य बन गया है।

आने वाले वर्षों में, यदि रॉयल्स ग्रुप अपना प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने का विचार करता है, तो यह भारतीय शेयर बाजार और खेल उद्योग दोनों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा। निवेशकों और उद्योगपतियों के लिए, राजस्थान रॉयल्स का बिज़नेस मॉडल इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि दूरदर्शी नेतृत्व, सही समय पर कॉर्पोरेट पुनर्गठन और वैश्विक पूंजी के सही उपयोग से किसी भी व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकता है।

सबसे ज्यादा पढ़े गए लेख:

₹37,500 करोड़ की कोल गैसीफिकेशन योजना को जल्द मिल सकती है मंजूरी, भारत की ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव
रोहित जैन बने RBI के नए डिप्टी गवर्नर, भारतीय बैंकिंग सेक्टर में अहम बदलाव, 3 मई से संभालेंगे पद
डॉलर इंडस्ट्रीज के संस्थापक दीनदयाल गुप्ता का निधन, होजरी उद्योग को बड़ा नुकसान
TAGGED:cricket businessFeaturedIndustrial Empireiplipl business modelipl franchise businessipl franchise valuationipl team valuationmanoj badalerajasthan royalsrajasthan royals business storyrajasthan royals ownerrajasthan royals success storyrajasthan royals valuationredbird capitalsports business indiasports industry indiatiger global investment
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article HUL बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच HUL को दिखा बड़ा मौका, भारत में लोकल कंपनियों की कमी से बढ़ सकती है बिक्री
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Might Also Like

Airtel 365 Days Recharge Plan with Unlimited Calling and Long Validity
टेलिकॉम

Airtel का धमाका: 365 दिन तक SIM एक्टिव, Unlimited Calling और ढेर सारे फायदे, हर महीने रिचार्ज की टेंशन खत्म!

By
Industrial Empire
अफीम खेती पॉलिसी 2025-26 – मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के किसानों को नए लाइसेंस
एग्रीकल्चर

तीन राज्यों के 1.21 लाख किसानों को अफीम खेती के नए लाइसेंस, केंद्र सरकार ने जारी की वार्षिक पॉलिसी

By
Shashank Pathak
Videocon
ट्रेंडिंग खबरें

Videocon Collapse Story: 50 हजार करोड़ की कंपनी कैसे हुई बर्बाद? जानिए पूरी कहानी

By
Industrial Empire
लेंसकार्ट के संस्थापक और CEO Peyush Bansal का प्रोफेशनल पोर्ट्रेट, भारतीय उद्यमी और बिज़नेस लीडर। लेंसकार्ट का आधिकारिक लोगो, भारत की प्रमुख आईवियर कंपनी का ब्रांड सिंबल।
ट्रेंडिंग खबरें

Lenskart बिंदी-तिलक विवाद: ड्रेस कोड पॉलिसी पर धार्मिक भेदभाव के आरोप, जानिए क्या है पूरा मामला

By
Industrial Empire
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation
Facebook X-twitter Youtube Linkedin

Quick links

  • About Us
  • Contact Us
Categories
  • होम
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • बाज़ार
  • ऑटो/टेक
  • बैंकिंग
  • आईटी
  • टेलिकॉम
  • एनर्जी
  • एग्रीकल्चर
  • फार्मा
  • फर्श से अर्श तक
  • अन्य

Policies

  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions

Copyright © 2025 The Industial Empire. All Rights Reserved.

Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?