सोशल मीडिया के दौर में कोई भी खबर तेजी से वायरल हो जाती है। कई बार ऐसी खबरें भी लोगों तक पहुंच जाती हैं जिनका सच से कोई संबंध नहीं होता। हाल ही में सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था कि भारत में जल्द ही कागज के नोट बंद कर दिए जाएंगे और उनकी जगह प्लास्टिक के नोट चलाए जाएंगे। इस खबर के बाद लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई कि क्या अब देश की करेंसी बदलने वाली है?
इस वायरल दावे को लेकर केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करने वाले प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट ने स्थिति साफ की है। PIB ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हवाले से बताया कि देश में कागज के नोटों को वापस लेने या उनकी जगह प्लास्टिक करेंसी लाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।
PIB Fact Check में क्या निकला सच?
PIB ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे दावे को गलत बताया है। फैक्ट चेक में कहा गया कि RBI ने ऐसी किसी भी योजना की घोषणा नहीं की है जिसमें मौजूदा बैंक नोटों को हटाकर प्लास्टिक नोट जारी करने की बात कही गई हो। यानी अभी भारत में जो करेंसी नोट चल रहे हैं, वे पहले की तरह ही वैध रहेंगे। लोगों को इस तरह की वायरल खबरों पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से जानकारी जरूर जांचनी चाहिए।
प्लास्टिक नोट आखिर होते क्या हैं?
प्लास्टिक नोट सामान्य कागज से बने नोटों से अलग होते हैं। इन्हें खास तरह के पॉलिमर यानी प्लास्टिक जैसे सिंथेटिक मटेरियल से तैयार किया जाता है। इन नोटों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि ये ज्यादा टिकाऊ होते हैं और आसानी से खराब नहीं होते। कागज के नोट जहां ज्यादा इस्तेमाल के बाद फटने, गंदे होने या खराब होने लगते हैं, वहीं पॉलिमर नोट पानी और नमी से भी ज्यादा सुरक्षित रहते हैं। यही कारण है कि दुनिया के कई देशों ने इन्हें अपनाया है।
दुनिया के किन देशों में चलते हैं प्लास्टिक नोट?
कई देशों ने करेंसी को ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ बनाने के लिए प्लास्टिक नोटों का इस्तेमाल शुरू किया है। Australia दुनिया के उन शुरुआती देशों में शामिल है जिसने बड़े स्तर पर पॉलिमर नोट अपनाए। इसके अलावा Canada, United Kingdom और कुछ अन्य देशों में भी प्लास्टिक नोटों का इस्तेमाल किया जाता है। इन नोटों में सुरक्षा फीचर्स ज्यादा बेहतर होते हैं, जिससे नकली नोटों की संभावना कम करने में मदद मिलती है।
भारत में पहले भी हुई थी प्लास्टिक नोट की चर्चा
भारत में प्लास्टिक नोट का विचार नया नहीं है। कुछ साल पहले RBI ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर प्लास्टिक या पॉलिमर नोट की संभावना पर विचार किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ क्षेत्रों में परीक्षण के लिए प्लास्टिक नोट जारी करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई थी, लेकिन इसे देशभर में लागू नहीं किया गया। इसके पीछे लागत, पर्यावरण और अन्य व्यावहारिक चुनौतियों को भी ध्यान में रखा गया।
क्या प्लास्टिक नोट से मिलते हैं ज्यादा फायदे?
प्लास्टिक नोट के कई फायदे बताए जाते हैं। इनकी उम्र कागज के नोटों की तुलना में ज्यादा होती है। इससे बार-बार नोट छापने की जरूरत कम हो सकती है और लंबे समय में लागत घट सकती है। इसके अलावा पॉलिमर नोटों में सुरक्षा फीचर्स जोड़ना आसान होता है। इनमें नकली नोटों पर रोक लगाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, दूसरी तरफ इनके उत्पादन की लागत, रिसाइक्लिंग और पर्यावरण से जुड़े सवाल भी सामने आते हैं। इसलिए किसी भी देश में करेंसी बदलने का फैसला कई पहलुओं को ध्यान में रखकर लिया जाता है।
भारत में नोट बदलने का फैसला कौन करता है?
भारत में करेंसी से जुड़े फैसले भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार मिलकर लेते हैं। नए नोट जारी करना, पुराने नोटों को वापस लेना या करेंसी सिस्टम में बदलाव करना एक लंबी प्रक्रिया होती है। ऐसे किसी भी बड़े बदलाव की जानकारी RBI या सरकार की आधिकारिक वेबसाइट और प्रेस रिलीज के माध्यम से दी जाती है। सोशल मीडिया पर चलने वाली खबरों को बिना जांचे आगे बढ़ाना भ्रम पैदा कर सकता है।
फिलहाल नहीं बदलेगी भारतीय करेंसी
प्लास्टिक नोटों को लेकर वायरल खबर ने लोगों का ध्यान जरूर खींचा, लेकिन PIB Fact Check के मुताबिक भारत में अभी कागज के नोट बंद करने या उनकी जगह प्लास्टिक करेंसी लाने की कोई योजना नहीं है। भविष्य में अगर करेंसी सिस्टम में कोई बड़ा बदलाव होता है तो इसकी आधिकारिक जानकारी RBI और सरकार की ओर से दी जाएगी। फिलहाल भारतीय करेंसी उसी रूप में जारी रहेगी, जैसी आज चल रही है।