लोन लेना आज के समय में बहुत आम हो गया है। चाहे घर खरीदना हो, गाड़ी लेनी हो या पर्सनल खर्च पूरे करने हों, बैंक और वित्तीय संस्थाएं आसानी से लोन उपलब्ध कराती हैं। लेकिन अक्सर लोग मान लेते हैं कि अच्छा CIBIL स्कोर होने का मतलब है कि लोन जरूर मंजूर हो जाएगा। जबकि सच यह है कि सिर्फ स्कोर ही सब कुछ नहीं है। बैंक और NBFCs (Non-Banking Financial Companies) लोन देने से पहले आपकी आय, खर्च करने की आदत, कर्ज का बोझ और वित्तीय अनुशासन जैसी कई चीजें भी जांचते हैं।
CIBIL स्कोर का रोल – लेकिन ये ही काफी नहीं
CIBIL स्कोर आपकी क्रेडिट हिस्ट्री का सबसे अहम संकेतक होता है। यह बताता है कि आपने पहले कितनी जिम्मेदारी से कर्ज चुकाया है। आमतौर पर 750 या उससे ज्यादा का स्कोर अच्छा माना जाता है और लोन अप्रूवल की संभावना बढ़ा देता है। लेकिन, बैंक केवल स्कोर देखकर फैसला नहीं करते। आय की स्थिरता, कर्ज का स्तर, खर्च करने की आदतें और बैंक के साथ पुराने रिश्ते भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं।
Debt-to-Income Ratio – स्कोर से भी ज्यादा अहम
मान लीजिए आपका CIBIL स्कोर 750 है, लेकिन आपकी आधी से ज्यादा सैलरी पहले से चल रही EMI में जा रही है। ऐसे में बैंक को लगेगा कि आपकी भुगतान क्षमता सीमित है। BharatLoan के फाउंडर अमित बंसल का कहना है “कई बार लोगों की आय का 50-60 प्रतिशत हिस्सा पहले से कर्ज चुकाने में लग रहा होता है। ऐसे में बैंक नए लोन देने से बचते हैं।” यानी, अगर आपका Debt-to-Income Ratio बहुत ज्यादा है, तो अच्छा स्कोर भी आपको लोन दिलाने में मदद नहीं करेगा।
आय की स्थिरता – बैंक के लिए सबसे बड़ा भरोसा
नियमित और स्थिर आय लोन अप्रूवल का सबसे बड़ा आधार है। अगर आप किसी बड़ी और भरोसेमंद कंपनी में लंबे समय से काम कर रहे हैं, तो बैंक आपको कम जोखिम वाला ग्राहक मानते हैं।
Finkeda के CMD मनीष गोयल के अनुसार “सैलरीड कर्मचारी बैंक को स्थिर कैश फ्लो का भरोसा देते हैं। जबकि सेल्फ-एम्प्लॉयड और फ्रीलांसर की आय अनिश्चित होती है, इसलिए बैंक उन्हें ज्यादा जांच-पड़ताल से गुजरते हैं।” अगर आप फ्रीलांसर, गिग वर्कर या छोटे बिजनेस ओनर हैं, तो बैंक आपसे टैक्स रिटर्न, बैंक स्टेटमेंट और बिजनेस की निरंतरता के सबूत भी मांग सकते हैं।
खर्च करने की आदत – आपकी क्रेडिट सेहत का आईना
आपका स्पेंडिंग पैटर्न भी लोन अप्रूवल पर बड़ा असर डालता है। अगर आप बार-बार क्रेडिट कार्ड की लिमिट तक खर्च करते हैं या हर बार सिर्फ मिनिमम ड्यू पेमेंट करते हैं, तो बैंक इसे वित्तीय दबाव का संकेत मानते हैं।
अमित बंसल के मुताबिक “क्रेडिट कार्ड लिमिट तक बार-बार खर्च करना और सिर्फ मिनिमम पेमेंट करना बैंक को दिखाता है कि आपका कैश फ्लो सही नहीं है।” बैंक आपके क्रेडिट रिपोर्ट और बैंक स्टेटमेंट के जरिए इन पैटर्न्स को परखते हैं। अगर आपकी फिजूलखर्ची ज्यादा है, तो लोन मिलने की संभावना कम हो सकती है।
कम स्कोर पर भी मिल सकता है लोन
अच्छा CIBIL स्कोर मददगार जरूर है, लेकिन यह लोन अप्रूवल की गारंटी नहीं है। अगर आपके पास स्थिर नौकरी, गारंटी (Collateral), कम Debt-to-Income Ratio और नियमित बचत है, तो कम स्कोर पर भी लोन मिल सकता है। उदाहरण के लिए, अमित बंसल बताते हैं “एक ग्राहक का CIBIL स्कोर सिर्फ 660 था, फिर भी उसे पर्सनल लोन मिला क्योंकि उसकी नौकरी स्थिर थी, कोई और कर्ज नहीं था और बैंक से पुराना रिश्ता था।” यानी, वित्तीय अनुशासन कई बार स्कोर से भी ज्यादा मायने रखता है।
लोन अप्रूवल के लिए जरूरी टिप्स
- Debt-to-Income Ratio कम रखें – EMI का बोझ कम से कम रखें।
- आय की स्थिरता बनाए रखें – नौकरी में स्थिरता बैंक का भरोसा बढ़ाती है।
- क्रेडिट कार्ड का सही इस्तेमाल करें – लिमिट तक खर्च न करें और समय पर भुगतान करें।
- e-KYC और डॉक्यूमेंट्स अपडेट रखें – सभी विवरण सही और वर्तमान हों।
- बैंक के साथ मजबूत संबंध बनाएं – पुराने और भरोसेमंद ग्राहकों को प्राथमिकता मिलती है।
अगर आप लोन लेने की सोच रहे हैं, तो केवल CIBIL स्कोर पर भरोसा न करें। बैंक लोन अप्रूवल के लिए आपकी आय, कर्ज, खर्च करने की आदतें और वित्तीय अनुशासन का पूरा मूल्यांकन करते हैं।