अगले महीने भारत की राजधानी नई दिल्ली में एक बड़ा आर्थिक घटनाक्रम होने जा रहा है। रूस के नेतृत्व में यूरेशियन इकनॉमिक फोरम (EAEU) का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भारत आएगा। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और यूरेशियन इकनॉमिक यूनियन (ईएईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर चर्चा को आगे बढ़ाना है। ईएईयू में रूस, कजाखिस्तान, बेलारूस, आर्मीनिया और किर्गिस्तान शामिल हैं, जिनमें से रूस इस ब्लॉक का सबसे बड़ा और प्रभावशाली देश है। भारत के साथ इस संगठन का व्यापारिक संबंध मजबूत है, खासकर इसलिए क्योंकि भारत और ईएईयू देशों के कुल कारोबार में रूस की हिस्सेदारी 92 फीसदी से भी ज्यादा है।
मुक्त व्यापार समझौते की तैयारी तेज
भारत और ईएईयू के बीच एफटीए पर बातचीत का सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। हालांकि, हाल के दिनों में इसमें तेजी आई है। बीते हफ्ते ही एक उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने रूस का दौरा किया, जहां दोनों पक्षों ने वार्ता की विषय-वस्तु (Terms of Reference – TOR) पर हस्ताक्षर किए। इससे स्पष्ट है कि अब एफटीए की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए जा रहे हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों का लक्ष्य है कि अगले 18 महीनों के भीतर समझौते पर अंतिम सहमति बन जाए। हालांकि, बातचीत की रफ्तार के आधार पर यह प्रक्रिया तय समय से पहले भी पूरी हो सकती है।
अमेरिकी टैरिफ संकट के बीच भारत की रणनीति
भारत की इस कोशिश को वर्तमान वैश्विक व्यापारिक माहौल से जोड़कर भी देखा जा रहा है। अमेरिका, जो भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, हाल के दिनों में कई उत्पादों पर 50 फीसदी तक के अतिरिक्त शुल्क लगा चुका है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा मुश्किल हो गई है। अमेरिका का मानना है कि भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की बड़ी मात्रा में खरीदारी से यूक्रेन युद्ध में रूस को आर्थिक मदद मिल रही है। इसी कारण अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाने के लिए स्टील और अन्य उत्पादों पर शुल्क बढ़ा दिया है। ऐसे हालात में भारत के लिए नए बाजारों की तलाश जरूरी हो गई है और ईएईयू देशों के साथ एफटीए इस दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है।
भारत-रूस व्यापार संतुलन में बदलाव की संभावना
भारत और रूस के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत जरूर हैं, लेकिन आंकड़ों पर नज़र डालें तो भारत का व्यापार घाटा रूस के साथ काफी अधिक है। भारत, रूस से कच्चा तेल, उर्वरक और रक्षा उपकरण जैसी बड़ी मात्रा में आयात करता है, जबकि भारतीय निर्यात सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि ]एफटीए लागू होने के बाद भारत को रूस के बाजारों में बेहतर पहुंच मिलेगी, जिससे व्यापार घाटा कम करने में मदद मिलेगी। खासतौर पर भारतीय कृषि उत्पाद, समुद्री खाद्य, इंजीनियरिंग सामान, चमड़े के उत्पाद, फुटवियर और टेक्सटाइल जैसी वस्तुओं के निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी।
भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर
वर्तमान में भारतीय निर्यातकों को रूस और अन्य ईएईयू देशों के बाजारों में कई गैर-शुल्क बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इनमें जटिल नियम, तकनीकी मानकों में भिन्नता और उत्पादों की स्वीकृति संबंधी समस्याएं शामिल हैं। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि एफटीए इन गैर-शुल्क बाधाओं को खत्म करने में मदद करेगा, जिससे भारतीय निर्यातक आसानी से रूसी और अन्य बाजारों में प्रवेश कर पाएंगे। इससे भारत की फुटवियर, चमड़ा, वस्त्र, इंजीनियरिंग और कृषि-आधारित इंडस्ट्री को बड़ा फायदा होगा।
रणनीतिक दृष्टि से भी अहम समझौता
भारत-ईएईयू एफटीए सिर्फ आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। पश्चिमी देशों के साथ बढ़ते भूराजनीतिक तनाव और बदलते वैश्विक व्यापार समीकरणों के बीच, भारत रूस के नेतृत्व वाले इस संगठन के साथ मजबूत साझेदारी करना चाहता है। रूस पहले से ही भारत का ऊर्जा, रक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान में प्रमुख साझेदार है। एफटीए के बाद भारत को ऊर्जा आयात पर बेहतर दामों का फायदा मिल सकता है, वहीं रूस को भारतीय बाजार में नई संभावनाएं मिलेंगी।
भारत की ‘विविधीकरण’ नीति के लिए अहम कदम
भारत लंबे समय से नए निर्यात बाजारों की तलाश में है, ताकि वह अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों पर अत्यधिक निर्भरता कम कर सके। इस दिशा में ईएईयू के साथ एफटीए भारत की विविधीकरण रणनीति का एक बड़ा हिस्सा है। क्योंकि ईएईयू में शामिल पांचों देशों की अर्थव्यवस्थाएं तेजी से विकसित हो रही हैं, भारत को यहां ऊर्जा, दवा, मशीनरी, कृषि और सेवा क्षेत्र में बड़े अवसर मिल सकते हैं। इससे न केवल भारतीय निर्यात बढ़ेगा, बल्कि रोजगार और निवेश की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
रूस-भारत की बातचीत से निकलेगा नया अवसर
भारत और ईएईयू के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) एक व्यापारिक दस्तावेज होने के साथ भारत की वैश्विक आर्थिक रणनीति को नया आयाम देगा। अमेरिका के बढ़ते टैरिफ, यूरोप की अनिश्चित नीतियों और रूस के साथ गहराते आर्थिक संबंधों के बीच यह समझौता भारत को नए अवसरों के द्वार खोलेगा। अगर बातचीत तय समय में पूरी होती है, तो भारत के निर्यातकों को नए बाजार, उद्योगों को विकास के अवसर और उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प मिलेंगे। यह समझौता भारत के लिए व्यापारिक फायदे लेकर आएगा, इसके आलावा यह वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को भी मजबूत करेगा।