global passport: विदेशों में रहने वाले करोड़ों भारतीय नागरिकों के लिए जल्द ही एक बेहद उपयोगी सुविधा शुरू होने जा रही है। विदेश मंत्रालय एक अंतरराष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन सेवा लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसके जरिए दुनिया के किसी भी देश में बैठा भारतीय बिना कॉल चार्ज दिए सीधे भारत के पासपोर्ट सेवा सिस्टम से संपर्क कर सकेगा। पासपोर्ट खो जाने, रिन्यूअल में देरी, नाम सुधार या अन्य दस्तावेजी समस्याओं के समाधान के लिए अब दूतावास जाने की मजबूरी कम हो जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि प्रवासी भारतीयों को आपात स्थिति में तुरंत भरोसेमंद सहायता मिले और उन्हें यह महसूस हो कि भारत उनसे हमेशा जुड़ा है।
विदेशों में passport समस्याएं क्यों बनती हैं संकट
विदेशों में पढ़ाई या नौकरी करने वाले भारतीयों के लिए पासपोर्ट सिर्फ पहचान पत्र नहीं बल्कि जीवनरेखा जैसा दस्तावेज होता है। कई बार यात्रा से ठीक पहले पासपोर्ट खो जाना या वीजा प्रक्रिया दिखाने के लिए तत्काल सुधार की जरूरत पड़ना भारी तनाव पैदा कर देता है। खाड़ी देशों, यूरोप या दूरदराज क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों और छात्रों के लिए भारतीय दूतावास तक पहुंचना भी आसान नहीं होता। लंबी दूरी, समय की कमी और अंतरराष्ट्रीय कॉल की ऊंची लागत स्थिति को और कठिन बना देती है।
ऐसे मामलों में तत्काल सलाह या प्रक्रिया मार्गदर्शन न मिलने से यात्रा रुक जाती है, नौकरी प्रभावित होती है या कानूनी परेशानी भी हो सकती है। यही वजह है कि लंबे समय से एक ऐसी वैश्विक हेल्पलाइन की मांग की जा रही थी, जो सीधे भारत से सहायता उपलब्ध कराए।
कैसे काम करेगा ग्लोबल टोल-फ्री सिस्टम
सरकार जिस हेल्पलाइन प्रणाली पर काम कर रही है, उसका उद्देश्य है कि दुनिया के किसी भी कोने से किया गया कॉल सीधे भारत के ‘पासपोर्ट सेवा प्रोग्राम’ (PSP) केंद्रों पर पहुंचे। कॉल करने वाले को यह अनुभव होगा कि वह किसी स्थानीय नंबर पर बात कर रहा है, जबकि उसकी सहायता भारत में प्रशिक्षित विशेषज्ञ कर रहे होंगे। यह सेवा 24 घंटे और साल के 365 दिन सक्रिय रहेगी, क्योंकि पासपोर्ट से जुड़ी आपात स्थिति किसी भी समय आ सकती है।
योजना यह भी है कि अधिकतम देशों के लिए एक यूनिवर्सल अंतरराष्ट्रीय टोल-फ्री नंबर हो। जहां तकनीकी या दूरसंचार कारणों से यह संभव नहीं होगा, वहां अलग-अलग देशों के लिए स्थानीय टोल-फ्री नंबर जारी किए जाएंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कॉल का पूरा खर्च भारत सरकार वहन करेगी, जिससे प्रवासी भारतीयों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
डिजिटल गवर्नेंस का विस्तार और तकनीकी ढांचा
यह पहल भारत के डिजिटल गवर्नेंस मॉडल को वैश्विक स्तर तक विस्तारित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। भारत का पासपोर्ट सेवा प्रोजेक्ट पहले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होता है और इसका आधुनिकीकरण 2012 में किया गया था। इस परियोजना के तकनीकी संचालन में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की भागीदारी है, जबकि डेटा सुरक्षा और पासपोर्ट जारी करने का अधिकार पूरी तरह सरकार के पास रहता है।
वर्तमान में देशभर में 37 पासपोर्ट कार्यालय, 92 पासपोर्ट सेवा केंद्र और 450 से अधिक डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्रों का नेटवर्क काम कर रहा है। नई हेल्पलाइन इसी मौजूदा डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी होगी, जिससे कॉल पर मिली जानकारी सीधे आधिकारिक सिस्टम में दर्ज हो सकेगी और समाधान की प्रक्रिया तेज होगी।
प्रवासी भारतीयों के लिए भरोसे का नया पुल
सरकार का मानना है कि यह हेल्पलाइन सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि भरोसे का माध्यम भी बनेगी। विदेश में रहने वाले भारतीयों को अक्सर लगता है कि संकट के समय सरकारी मदद दूर है, लेकिन यह सेवा उस दूरी को कम करेगी। चाहे यूरोप में पढ़ाई कर रहा छात्र हो, खाड़ी देश में काम कर रहा मजदूर या किसी दूसरे महाद्वीप में बसे प्रोफेशनल—हर भारतीय नागरिक को एक ही नंबर पर तत्काल मार्गदर्शन मिल सकेगा। इससे दूतावासों पर भी भीड़ का दबाव घटेगा और वास्तविक आपात मामलों पर ध्यान केंद्रित करना आसान होगा।
जल्द शुरू हो सकती है सेवा
विदेश मंत्रालय ने इस वैश्विक टोल-फ्री सेवा के लिए दूरसंचार कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं और तकनीकी व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उम्मीद है कि यह हेल्पलाइन शुरू होने के बाद पासपोर्ट संबंधी समस्याओं का समाधान तेज, सुलभ और कम तनावपूर्ण हो जाएगा। डिजिटल इंडिया की दिशा में यह पहल प्रवासी भारतीयों को सीधे सरकारी सेवाओं से जोड़ने का नया अध्याय साबित हो सकती है। विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए यह संदेश स्पष्ट होगा—वे जहां भी हों, उनकी सरकार उनसे सिर्फ एक फोन कॉल की दूरी पर है।