भारत का दवा उद्योग लंबे समय से दुनिया के कई देशों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के लिए जाना जाता है। लेकिन अब indian pharma कंपनियों के लिए एक नया और तेजी से उभरता बाजार सामने आया है – ब्राजील। हाल के महीनों में भारत और ब्राजील के बीच फार्मा सहयोग जिस गति से बढ़ा है, उसने संकेत दे दिया है कि यह रिश्ता केवल निर्यात तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रणनीतिक साझेदारी के एक मजबूत मॉडल में बदल सकता है। खासकर भारतीय MSME दवा निर्माताओं के लिए यह बदलाव बेहद महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
तेजी से बढ़ता निर्यात: ब्राजील की ओर झुकाव
आंकड़े बताते हैं कि भारत से ब्राजील को दवा निर्यात लगातार मजबूत हो रहा है। वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल-जनवरी अवधि में भारतीय फार्मा निर्यात 17% से अधिक बढ़कर लगभग 74 करोड़ डॉलर पहुंच गया। इससे पहले पूरे वित्त वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 77.8 करोड़ डॉलर था। यानी ब्राजील भारतीय दवा निर्यात के लिए तेजी से महत्वपूर्ण बाजार बनता जा रहा है।
यह वृद्धि सिर्फ मात्रा में नहीं बल्कि गुणवत्ता और उत्पाद प्रोफाइल में भी दिखाई दे रही है। अब ब्राजील को होने वाले भारतीय दवा निर्यात का 60% से अधिक हिस्सा फॉर्मूलेशन और बायोलॉजिक्स से जुड़ा है। इन उन्नत श्रेणी की दवाओं में करीब 36% की तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जो बताती है कि भारतीय कंपनियां अब सामान्य जेनेरिक से आगे बढ़कर उच्च-मूल्य वाली दवाओं में अपनी पकड़ बना रही हैं।
स्पेशियलिटी दवाओं में बड़ा अवसर
ब्राजील की स्वास्थ्य व्यवस्था, खासकर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली, लागत-संवेदनशील होने के साथ-साथ उन्नत उपचारों की मांग भी तेजी से बढ़ा रही है। यही वजह है कि कैंसर उपचार (ऑन्कोलॉजी), जटिल इंजेक्शन दवाएं, बायोसिमिलर और अस्पताल-केंद्रित उपचार भारतीय कंपनियों के लिए सबसे संभावनाशील क्षेत्र बनकर उभरे हैं।
भारतीय MSME फार्मा कंपनियों के लिए यह अवसर इसलिए भी खास है क्योंकि इन क्षेत्रों में वे प्रतिस्पर्धी लागत पर उच्च गुणवत्ता प्रदान कर सकती हैं। ब्राजील के सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को बड़ी मात्रा में दवाओं की जरूरत होती है, जिससे दीर्घकालिक सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट की संभावनाएं बनती हैं।
हेल्थकेयर बिजनेस मीटिंग ने खोले नए रास्ते
नई दिल्ली में आयोजित भारत-ब्राजील हेल्थकेयर बिजनेस मीटिंग ने इस सहयोग को नई दिशा दी। इस मंच पर भारतीय दवा निर्माता, ब्राजील के हेल्थकेयर अधिकारी और नियामक एजेंसियों के प्रतिनिधि एक साथ आए। बैठक का उद्देश्य सिर्फ व्यापार बढ़ाना नहीं बल्कि नियामकीय तालमेल, बाजार पहुंच और तकनीकी साझेदारी को मजबूत करना था।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवाद भारतीय MSME कंपनियों के लिए बेहद अहम होते हैं, क्योंकि विदेशी बाजारों में प्रवेश की सबसे बड़ी बाधा नियामकीय स्वीकृति और स्थानीय नेटवर्क होता है। इस मीटिंग ने दोनों देशों के बीच विश्वास और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने का संकेत दिया।
निर्यात से आगे बढ़कर रणनीतिक साझेदारी
ब्राजील की दवा वितरण कंपनियां अब भारतीय निर्माताओं के साथ केवल उत्पाद खरीद-फरोख्त नहीं बल्कि तकनीकी और सप्लाई साझेदारी में भी रुचि दिखा रही हैं। इसका अर्थ है कि भारतीय कंपनियां ब्राजील के हेल्थकेयर इकोसिस्टम का हिस्सा बन सकती हैं—जैसे स्थानीय उत्पादन, संयुक्त अनुसंधान या दीर्घकालिक आपूर्ति अनुबंध। यह बदलाव इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इससे भारतीय कंपनियों को स्थिर मांग और बड़े पैमाने का बाजार मिलता है, जबकि ब्राजील को सस्ती और भरोसेमंद दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होती है। यानी यह संबंध “ट्रेड” से “पार्टनरशिप” की दिशा में बढ़ रहा है।
MSME कंपनियों के लिए क्या हैं चुनौतियां
हालांकि अवसर बड़े हैं, लेकिन ब्राजील का बाजार आसान नहीं माना जाता। वहां दवा क्षेत्र सख्ती से विनियमित है और बाजार में टिके रहने के लिए कंपनियों को उच्च गुणवत्ता मानक, नियामकीय अनुपालन और स्थानीय साझेदारी की जरूरत होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय MSME कंपनियों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कितनी तेजी से नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करती हैं और स्थानीय वितरण व सार्वजनिक खरीद प्रणाली के अनुरूप खुद को ढालती हैं।
सकारात्मक पहलू यह है कि भारत और ब्राजील के बीच नियामकीय सहयोग बढ़ रहा है, जिससे अनुमोदन प्रक्रिया भविष्य में आसान हो सकती है। इससे छोटी और मध्यम भारतीय कंपनियों के लिए बाजार में प्रवेश का रास्ता खुल सकता है।
फार्मा सहयोग का नया अध्याय
भारत वैश्विक स्तर पर जेनेरिक और किफायती दवाओं का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, जबकि ब्राजील लैटिन अमेरिका का सबसे बड़ा फार्मा बाजार है। ऐसे में दोनों देशों का सहयोग वैश्विक फार्मा सप्लाई चेन में नया संतुलन बना सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में भारत-ब्राजील फार्मा संबंध केवल निर्यात तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि संयुक्त उत्पादन, अनुसंधान सहयोग और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में साझेदारी तक फैल सकते हैं।
ब्राजील भारतीय दवा उद्योग—विशेषकर MSME निर्माताओं—के लिए एक उभरता हुआ ग्रोथ इंजन बनता दिख रहा है। यदि कंपनियां नियामकीय चुनौतियों को पार कर लेती हैं, तो यह साझेदारी भारतीय फार्मा के वैश्विक विस्तार में अगला बड़ा कदम साबित हो सकती है।