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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > ऑटो/टेक > भारतीय रेलवे की माल ढुलाई व्यवस्था में सुधार की मांग
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भारतीय रेलवे की माल ढुलाई व्यवस्था में सुधार की मांग

Last updated: 22/08/2026 7:01 PM
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Industrial Empire
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भारतीय रेलवे में माल ढुलाई सुधार और निजी वैगन निवेश पर राष्ट्रीय मालवहन संगोष्ठी
भारतीय रेलवे माल ढुलाई: कंपनियों ने दिए निजी निवेश और वैगन सुधार के सुझाव
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देश की प्रमुख मालवहन कंपनियों ने भारतीय रेलवे की माल ढुलाई व्यवस्था को अधिक तेज, किफायती और प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। नई दिल्ली के स्कोप कॉम्प्लेक्स में सेंटर फॉर ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड मैनेजमेंट (सीटीआरएएम) की ओर से आयोजित राष्ट्रीय मालवहन संगोष्ठी में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने रेलवे की मौजूदा नीतियों में बदलाव और निजी निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया। संगोष्ठी का विषय ‘सिनर्जी ऑन ट्रैक : ट्रांसफार्मिंग इंडियाज लॉजिस्टिक्स-रेल एक्सप्रेस रिवॉल्यूशन’ था।

माल और पार्सल वैगन में निजी निवेश की मांग

संगोष्ठी में माल और पार्सल वैगन में निजी निवेश को मंजूरी देने की मांग प्रमुखता से उठी। प्रतिनिधियों का कहना था कि कम यातायात वाले समर्पित मालवहन गलियारों में निजी क्षेत्र को वैगन निवेश की अनुमति देने से माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाई जा सकती है। जेएसडब्ल्यू इंफ्रा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिंकेश रॉय ने कहा कि माल और पार्सल वैगन निवेश योजना के जरिए निजी निवेश आकर्षित कर माल परिवहन की क्षमता बढ़ाई जा सकती है।

सड़क और रेल परिवहन की लागत में समानता पर जोर

प्रतिनिधियों ने कम दूरी के कंटेनर परिवहन में सड़क और रेल के बीच लागत में समानता लाने की जरूरत बताई। इसके लिए बंदरगाह शुल्क, रेल मालभाड़े और अंतिम छोर तक परिवहन की लागत को एक साथ ध्यान में रखने का सुझाव दिया गया। कंपनियों के अनुसार, लागत प्रतिस्पर्धी होने पर अधिक माल को सड़क से रेल नेटवर्क की ओर स्थानांतरित किया जा सकता है।

पर्याप्त वैगन उपलब्ध कराने की जरूरत

मालवहन कंपनियों ने बताया कि रेलवे के पास कई क्षेत्रों में आवश्यक संख्या में वैगन उपलब्ध नहीं हैं। इससे माल की आवाजाही और आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होती है। प्रतिनिधियों ने खाली फ्लैट रैक की अनावश्यक आवाजाही रोकने तथा वैगन के बेहतर उपयोग की व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया।

आधुनिक मशीनों से तेज होगी लोडिंग-अनलोडिंग

कॉनकॉर के अंतरराष्ट्रीय बाजार एवं संचालन निदेशक विजय कुमार सिंह ने आधुनिक मशीनों और ऐसी प्रणालियों को अपनाने पर जोर दिया, जिनसे एक साथ अधिक सामान की लोडिंग और अनलोडिंग की जा सके। उन्होंने लौह अयस्क की ढुलाई के लिए नए बीओबीएनएस वैगन खरीदने की अनुमति देने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि आधुनिक तकनीक से माल ढुलाई की गति और परिचालन दक्षता दोनों बढ़ाई जा सकती हैं।

लॉजिस्टिक्स कंपनियों ने भी रखे सुझाव

टाटा इंटरनेशनल लॉजिस्टिक्स के प्रभात कुमार, डीपी वर्ल्ड रेल के मुख्य परिचालन अधिकारी महेंद्र बिरहाड़े और डीटीडीसी के मुख्य वित्तीय अधिकारी अनील गंभीर ने भी मालवहन क्षेत्र से जुड़े सुझाव साझा किए। विश्व बैंक एवं एडीबी सलाहकार सचिन भनुशाली, अमेजन इंडिया के कर्नल वीरेश शर्मा और ब्लू डार्ट के मुख्य परिचालन अधिकारी विक्रम मंसुखानी ने भी रेलवे मालवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अपने विचार रखे।

रेलवे ने सुझावों पर दिया भरोसा

भारतीय रेलवे के कार्यकारी निदेशक माल ढुलाई एमएस बाजवा ने कहा कि मालवहन कंपनियों की ओर से दिए गए सुझावों को रेलवे ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में नीति तैयार करते समय उद्योग जगत के इन सुझावों को ध्यान में रखा जाएगा। कार्यक्रम में रेलवे बोर्ड के सदस्य संचालन एवं व्यापार डॉ. मनोज सिंह, अपर सदस्य यातायात देवेंद्र कुमार और सीटीआरएएम के कार्यकारी निदेशक अमित कुमार सिंह भी मौजूद रहे।

निजी निवेश से बढ़ेगी माल ढुलाई क्षमता

निजी निवेश, आधुनिक वैगन और बेहतर लोडिंग-अनलोडिंग सुविधाओं से रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। कम दूरी के परिवहन में रेल की लागत को सड़क परिवहन के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बनाने से सड़क पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे माल परिवहन का समय और लागत घटाने के साथ देश की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अधिक मजबूत और कुशल बनाने में मदद मिलेगी।

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