Chukandar farming: खेती अब सिर्फ परंपरागत फसलों तक सीमित नहीं रही। बदलते समय के साथ किसान भी ऐसी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं, जिनमें लागत कम हो और मुनाफा ज्यादा मिले। ऐसी ही एक हाई प्रोफिटेबल खेती है चुकंदर यानी बीटरूट की खेती। हेल्थ और फिटनेस का ट्रेंड बढ़ने के साथ बीटरूट की मांग तेजी से बढ़ी है। जूस सेंटर, जिम जाने वाले युवा, हेल्थ ड्रिंक बनाने वाली कंपनियां और अस्पताल तक बीटरूट की डिमांड बढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि चुकंदर की खेती किसानों के लिए कम समय में अच्छी कमाई का मजबूत जरिया बन रही है।
क्यों फायदेमंद है चुकंदर की खेती?
चुकंदर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम लागत में तैयार होने वाली फसल है और 2 से 3 महीने में तैयार होकर बाजार में बिकने लायक हो जाती है। दूसरी ओर, धान-गेहूं जैसी फसलों में समय भी ज्यादा लगता है और मुनाफा भी सीमित रहता है। चुकंदर की खेती साल के कई हिस्सों में की जा सकती है, जिससे किसान एक ही साल में दो से तीन बार फसल लेकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। हेल्थ बेनिफिट्स की वजह से इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है, इसलिए बिक्री को लेकर ज्यादा चिंता नहीं रहती।
कमाई कैसे बढ़ा सकते हैं किसान?
अगर किसान चुकंदर की खेती सही तरीके से करें, तो कमाई कई गुना बढ़ सकती है। इसके लिए सबसे पहले सही समय पर बुवाई करना जरूरी है। अच्छी किस्म के बीज चुनने से पैदावार और क्वालिटी दोनों बेहतर मिलती हैं। इसके अलावा, सिर्फ मंडी पर निर्भर रहने की बजाय जूस सेंटर, होटल, रेस्टोरेंट और हेल्थ ड्रिंक बनाने वालों से सीधे संपर्क करना फायदेमंद साबित हो सकता है। ताजा और साफ-सुथरी पैकिंग के साथ अगर चुकंदर बेचा जाए, तो बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं।
खर्च और कमाई का पूरा गणित
अगर किसान 1 एकड़ में चुकंदर की खेती करता है, तो औसतन 15 से 20 हजार रुपये तक का खर्च आता है। इसमें बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी का खर्च शामिल होता है। सही देखभाल और मौसम अनुकूल रहने पर एक एकड़ से 80 से 100 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है। अगर औसत बाजार भाव 20 रुपये प्रति किलो माना जाए, तो कुल बिक्री से 1.60 लाख से 2 लाख रुपये तक की आमदनी संभव है। खर्च निकालने के बाद किसान को करीब 1 से 1.50 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा हो सकता है। हालांकि यह आंकड़े इलाके, मौसम और बाजार के भाव के हिसाब से थोड़ा ऊपर-नीचे हो सकते हैं, लेकिन फिर भी यह खेती परंपरागत फसलों के मुकाबले कहीं ज्यादा फायदे का सौदा है।
कब और कैसे करें बुवाई?
मैदानी इलाकों में चुकंदर की बुवाई के लिए अक्टूबर से नवंबर का समय सबसे बेहतर माना जाता है। इस दौरान बोई गई फसल से अच्छी पैदावार मिलती है। चुकंदर के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। खेत की अच्छी तरह जुताई करके बीज बोना चाहिए, ताकि जड़ें मजबूत बनें। सही दूरी पर बुवाई करने और संतुलित मात्रा में खाद देने से चुकंदर का वजन और क्वालिटी दोनों बेहतर होती है। समय-समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण भी जरूरी है, ताकि फसल को पूरा पोषण मिल सके।
कितने दिन में तैयार होती है फसल?
चुकंदर की फसल बुवाई के करीब 55 से 85 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। कुछ उन्नत किस्में तो 45–50 दिनों में ही बाजार तक पहुंचने लायक हो जाती हैं। दिसंबर से फरवरी के बीच चुकंदर की कीमत अच्छी मिलती है, इसलिए किसान अगर सही टाइमिंग के साथ फसल बाजार में लाएं, तो उन्हें बेहतर मुनाफा मिल सकता है।
सब्सिडी और सरकारी योजनाओं का फायदा
चुकंदर की खेती पर केंद्र सरकार की ओर से कोई अलग से सीधी सब्सिडी नहीं मिलती, लेकिन कई राज्य सरकारें बीज, खाद और दूसरे जरूरी आदानों पर वित्तीय सहायता देती हैं। बिहार समेत कुछ राज्यों में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) और राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM) के तहत किसानों को मदद मिल सकती है। किसान अपने जिले के कृषि विभाग या बागवानी अधिकारी से संपर्क कर यह जानकारी ले सकते हैं कि उनके राज्य में कौन-कौन सी योजनाएं लागू हैं और आवेदन की प्रक्रिया क्या है।
हेल्थ इंडस्ट्री में बढ़ती डिमांड
चुकंदर को आमतौर पर खून बढ़ाने वाली सब्जी के रूप में जाना जाता है। आयरन की कमी हो या शरीर में कमजोरी महसूस हो, तो डॉक्टर भी बीटरूट खाने की सलाह देते हैं। यही वजह है कि जूस सेंटर, जिम जाने वाले युवा, हेल्थ कॉन्शियस लोग और अस्पतालों में इसकी मांग लगातार बनी रहती है। फिटनेस ट्रेंड बढ़ने के साथ बीटरूट जूस और हेल्थ ड्रिंक्स की खपत भी बढ़ रही है।
किसानों के लिए भरोसेमंद कमाई का विकल्प
आज के समय में चुकंदर की खेती किसानों के लिए कम समय में अच्छी कमाई का भरोसेमंद विकल्प बनकर उभर रही है। कम लागत, जल्दी तैयार होने वाली फसल और मजबूत बाजार मांग इसे लखपति बनने का मौका देती है। अगर किसान सही तकनीक, सही समय और सही मार्केटिंग अपनाएं, तो चुकंदर की खेती उनके लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।