पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत रुकने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतें नए उच्च स्तर पर पहुंच सकती हैं।
पिछले सप्ताह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर नवंबर डिलीवरी वाला क्रूड ऑयल 566 रुपये यानी 6.4 प्रतिशत बढ़कर 9,394 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिसंबर डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड पूरे सप्ताह में 5.14 डॉलर यानी करीब 5 प्रतिशत चढ़कर 109.86 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। शुक्रवार को इसकी कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गई थी। अमेरिकी WTI क्रूड भी 8.01 डॉलर यानी करीब 9 प्रतिशत उछलकर 99.02 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी बाजार की नजर
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां तेल की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता घट सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता रुकने, जहाजों की आवाजाही को लेकर खतरे और चीन पहुंचने वाली तेल खेप में देरी ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है।
रेलीगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च एसवीपी अजीत मिश्रा के अनुसार, फिलहाल बाजार में सावधानी के साथ तेजी का रुख बना हुआ है। कीमतों की अगली दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि पश्चिम एशिया में हालात किस ओर बढ़ते हैं और वास्तविक तेल आपूर्ति कितनी प्रभावित होती है। यदि तनाव बढ़ता है या ऊर्जा ठिकानों को नुकसान पहुंचता है, तो ब्रेंट क्रूड 115 से 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर सकता है।
तेल भंडार में गिरावट से बढ़ा दबाव
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड नवनीत दमानी के मुताबिक, विभिन्न देशों की ओर से आपूर्ति बढ़ाने के प्रयासों के बावजूद कीमतों में टिकाऊ गिरावट नहीं आई है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार पर सप्लाई की कमी का दबाव बना हुआ है।
अमेरिका में हाल ही में कच्चे तेल का भंडार 80 लाख बैरल घटा है, जिससे कीमतों को समर्थन मिला। अब निवेशकों की नजर अमेरिकी पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) के साप्ताहिक आंकड़ों और कुशिंग सहित प्रमुख भंडारण केंद्रों की स्थिति पर है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुमानों के अनुसार, वैश्विक तेल आपूर्ति में सुधार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति महंगाई और आयात बिल के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।