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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > एनर्जी > Coal Import में गिरावट: आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत, घरेलू उत्पादन ने संभाली कमान
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Coal Import में गिरावट: आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत, घरेलू उत्पादन ने संभाली कमान

Last updated: 22/03/2026 1:14 PM
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Industrial Empire
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Coal Import में गिरावट और भारत में बढ़ते घरेलू कोयला उत्पादन को दर्शाती तस्वीर
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Coal Import: भारत के ऊर्जा सेक्टर से एक सकारात्मक खबर सामने आई है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में देश के कोयला आयात में गिरावट दर्ज की गई है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। अप्रैल से जनवरी के बीच कुल कोयला आयात 4.2 प्रतिशत घटकर 213.10 मिलियन टन रह गया है। पिछले साल की तुलना में यह गिरावट इस बात का संकेत है कि देश अब धीरे-धीरे आयात पर निर्भरता कम कर रहा है।

घरेलू उत्पादन बना सबसे बड़ी ताकत
विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण देश में बढ़ता हुआ घरेलू कोयला उत्पादन है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने कोयला उत्पादन को बढ़ाने पर खास ध्यान दिया है, जिसका असर अब साफ दिखाई दे रहा है। बिजली उत्पादन और औद्योगिक जरूरतों के लिए अब अधिकतर कोयला देश के भीतर से ही उपलब्ध हो रहा है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी और समुद्री आपूर्ति में आ रही चुनौतियों ने भी आयात को सीमित करने में भूमिका निभाई है।

नॉन-कोकिंग कोयले के आयात में बड़ी गिरावट
आंकड़ों के अनुसार, नॉन-कोकिंग कोयले के आयात में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है। अप्रैल से जनवरी के बीच इसका आयात घटकर 127.80 मिलियन टन रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 141.18 मिलियन टन था। नॉन-कोकिंग कोयला मुख्य रूप से बिजली उत्पादन और अन्य उद्योगों में उपयोग होता है। घरेलू स्तर पर इसकी पर्याप्त उपलब्धता होने के कारण अब आयात की जरूरत कम हो गई है। यह बदलाव देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कोकिंग कोयले की मांग अभी भी आयात पर निर्भर
हालांकि, कोकिंग कोयले के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है। इस श्रेणी में आयात बढ़ा है। अप्रैल से जनवरी के दौरान कोकिंग कोयले का आयात 50.39 मिलियन टन रहा, जो पिछले साल इसी अवधि में 45.83 मिलियन टन था। कोकिंग कोयला मुख्य रूप से स्टील इंडस्ट्री में उपयोग होता है, और भारत में इसकी घरेलू उपलब्धता सीमित है। यही वजह है कि इस सेक्टर में अभी भी आयात पर निर्भरता बनी हुई है।

जनवरी के आंकड़े भी दे रहे संकेत
जनवरी 2026 के आंकड़े भी आयात में गिरावट की पुष्टि करते हैं। इस महीने कुल कोयला आयात 22.1 प्रतिशत घटकर 16.64 मिलियन टन रह गया, जो पिछले साल जनवरी में 21.37 मिलियन टन था। नॉन-कोकिंग कोयले का आयात भी घटकर 9.45 मिलियन टन रह गया, जबकि कोकिंग कोयले का आयात 4.23 मिलियन टन दर्ज किया गया। ये आंकड़े दिखाते हैं कि घरेलू आपूर्ति मजबूत होने के कारण आयात लगातार कम हो रहा है।

उद्योग विशेषज्ञों की क्या राय?
विनय वर्मा, जो mjunction Services Limited के प्रबंध निदेशक और सीईओ हैं, के अनुसार थर्मल कोयले के आयात में साल दर साल आधार पर उल्लेखनीय गिरावट आई है। उनका मानना है कि घरेलू स्टॉक पर्याप्त है और वैश्विक कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे आने वाले समय में भी आयात सीमित रह सकता है।

उत्पादन बढ़ाओ, आयात घटाओ
सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को अधिकतम हद तक घरेलू उत्पादन से पूरा किया जाए। कोयला उत्पादन को बढ़ाने के लिए कई नीतिगत कदम उठाए गए हैं। केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने पहले ही कहा है कि भारत में ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ रही है और कोयले की खपत भी आने वाले वर्षों में बढ़ती रहेगी।

2030 तक बड़ा लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में कोयला उत्पादन में हर साल 6 से 7 प्रतिशत की वृद्धि की जाए। इसी रफ्तार से उत्पादन बढ़कर वर्ष 2029-30 तक करीब 1.5 अरब टन तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही अनुमान है कि देश में कोयले की मांग वर्ष 2040 तक अपने चरम पर पहुंच सकती है। ऐसे में घरेलू उत्पादन को मजबूत करना बेहद जरूरी हो जाता है।

क्या बदल रहा है भारत का ऊर्जा भविष्य?
कोयला आयात में गिरावट सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा नीति में हो रहे बड़े बदलाव का संकेत है। देश अब आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अगर यही रफ्तार जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में भारत न सिर्फ अपनी जरूरतों को खुद पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी मजबूत स्थिति बना सकता है।

TAGGED:Coal ImportEnergyEnergy SecurityIndia coal productionIndustrial Empire
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