Defense stocks: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब शेयर बाजार के डिफेंस सेक्टर पर भी साफ दिखाई दे रहा है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच निवेशकों का रुझान डिफेंस कंपनियों की ओर बढ़ गया है। यही वजह है कि शुक्रवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में डिफेंस शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली।
इस तेजी के बीच निफ्टी डिफेंस इंडेक्स में भी मजबूत उछाल दर्ज किया गया। पिछले ट्रेडिंग सेशन में लगभग 2.5 प्रतिशत बढ़ने के बाद आज के कारोबार में यह इंडेक्स 3 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ता हुआ नजर आया। खास तौर पर मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड जैसे प्रमुख डिफेंस स्टॉक्स में मजबूत तेजी देखने को मिली।
मझगांव डॉक और GRSE के शेयरों में मजबूत उछाल
डिफेंस सेक्टर की इस तेजी में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) के शेयर सबसे ज्यादा चमके। कारोबार के दौरान मझगांव डॉक के शेयर करीब 6.9 प्रतिशत तक चढ़ गए, जबकि GRSE के शेयरों में लगभग 6.1 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली। खास बात यह है कि मझगांव डॉक का शेयर पिछले नौ महीनों के उच्च स्तर के आसपास पहुंच गया है। निवेशकों की मजबूत खरीदारी के चलते कंपनी के शेयरों में सिर्फ दो दिनों में करीब 18 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई है।
डिफेंस इंडेक्स के ज्यादातर शेयर हरे निशान में
डिफेंस सेक्टर की मजबूती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि निफ्टी डिफेंस इंडेक्स में शामिल 18 में से 17 शेयर हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। केवल एक स्टॉक Cyient DLM हल्की गिरावट के साथ लाल निशान में दिखा। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण दुनिया भर में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। ऐसे माहौल में निवेशक डिफेंस सेक्टर को एक मजबूत और सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता से डिफेंस कंपनियों को फायदा
दुनिया भर में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता का असर रक्षा तैयारियों पर भी दिखाई दे रहा है। कई देश अपनी सैन्य क्षमता को मजबूत करने के लिए रक्षा उपकरणों पर खर्च बढ़ा रहे हैं। इसका सीधा फायदा डिफेंस कंपनियों को मिल सकता है। मिसाइल सिस्टम, सर्विलांस तकनीक, ड्रोन, रडार सिस्टम और गोला-बारूद जैसे उपकरणों की मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में निवेशकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में डिफेंस कंपनियों को बड़े ऑर्डर मिल सकते हैं, जिससे उनका कारोबार और मुनाफा बढ़ सकता है।
मझगांव डॉक में तेजी की बड़ी वजह
मझगांव डॉक के शेयरों में हालिया तेजी के पीछे एक बड़ी डील की संभावना को भी अहम वजह माना जा रहा है। कंपनी ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये की संभावित डील को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। बताया गया है कि सरकार के साथ CNC नेगोशिएशन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, हालांकि इस प्रस्ताव को अभी अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। यह डील तीन P75 स्कॉर्पियन सबमरीन से जुड़ी बताई जा रही है और उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही तक इस पर अंतिम फैसला हो सकता है।
कंपनी की ऑर्डर बुक भी मजबूत बनी हुई है। तीसरी तिमाही (Q3FY26) तक मझगांव डॉक की कुल ऑर्डर बुक लगभग 23,758 करोड़ रुपये की थी। इसके अलावा आने वाले समय में कंपनी को कई बड़े प्रोजेक्ट मिलने की संभावना जताई जा रही है।
आने वाले बड़े प्रोजेक्ट्स पर नजर
विश्लेषकों के अनुसार मझगांव डॉक को भविष्य में कई बड़े ऑर्डर मिल सकते हैं। इनमें लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक प्रोजेक्ट के लिए लगभग 35,000 करोड़ रुपये, MCMV प्रोजेक्ट के लिए करीब 40,000 करोड़ रुपये और 17 ब्रावो शिप प्रोजेक्ट के लिए लगभग 50,000 करोड़ रुपये के संभावित ऑर्डर शामिल हैं। अगर ये प्रोजेक्ट कंपनी को मिलते हैं, तो आने वाले वर्षों में कंपनी के कारोबार में बड़ी वृद्धि देखने को मिल सकती है।
GRSE का कल्याणी स्ट्रैटेजिक के साथ समझौता
इस बीच गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने भी एक अहम कदम उठाया है। कंपनी ने एडवांस्ड नेवल सिस्टम के विकास के लिए कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स के साथ साझेदारी की है। इस समझौते के तहत USVs (Unmanned Surface Vessels) और AUVs (Autonomous Underwater Vehicles) जैसे आधुनिक नौसैनिक प्लेटफॉर्म विकसित किए जाएंगे। इन तकनीकों को भविष्य के नौसैनिक युद्ध में बेहद अहम माना जा रहा है।
सरकार का भी डिफेंस सेक्टर पर जोर
डिफेंस सेक्टर को लेकर सरकार भी लगातार सक्रिय दिखाई दे रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में कहा कि गार्डन रीच शिपबिल्डर्स जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि देश का औद्योगिक और रक्षा इकोसिस्टम और मजबूत बनाया जा सके।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बना रहता है, तो डिफेंस कंपनियों के लिए अवसर और बढ़ सकते हैं। हालांकि निवेशकों को इस सेक्टर में निवेश करते समय बाजार के उतार-चढ़ाव और सरकारी नीतियों पर भी नजर बनाए रखनी चाहिए। फिलहाल डिफेंस शेयरों में जारी तेजी यह संकेत दे रही है कि निवेशकों का भरोसा इस सेक्टर पर लगातार मजबूत हो रहा है।