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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > बिजनेस आईडिया > EV बैटरी रीसाइक्लिंग और सेकंड-लाइफ बैटरियाँ: नया औद्योगिक अवसर
बिजनेस आईडिया

EV बैटरी रीसाइक्लिंग और सेकंड-लाइफ बैटरियाँ: नया औद्योगिक अवसर

Last updated: 02/10/2025 4:57 PM
By
Industrial empire correspondent
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EV बैटरी रीसाइक्लिंग यूनिट और सेकंड-लाइफ बैटरियों का इंडस्ट्री सेटअप
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भारत आज जिस तेजी से इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की ओर बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से एक नया औद्योगिक अवसर भी जन्म ले रहा है – EV बैटरी रीसाइक्लिंग और सेकंड-लाइफ बैटरी बिज़नेस। अगर आप आने वाले दशक के लिए कोई ऐसा उद्यम ढूँढ रहे हैं जिसमें सरकार का सपोर्ट, निवेशकों की दिलचस्पी और मार्केट की गारंटी हो, तो यह क्षेत्र आपके लिए सुनहरा मौका है।

क्यों ज़रूरी है बैटरी रीसाइक्लिंग?
• EV उद्योग भारत में 2030 तक 1 करोड़ से ज्यादा गाड़ियों का आंकड़ा छूने की ओर बढ़ रहा है।
• इन गाड़ियों की सबसे महंगी और अहम तकनीक है – लिथियम-आयन बैटरी।
• बैटरी की औसत आयु 6–8 साल होती है। उसके बाद वह चार्ज तो होती है, लेकिन ड्राइविंग रेंज और परफॉर्मेंस घट जाती है।
इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में लाखों टन EV बैटरियाँ कबाड़ बनेंगी। यदि इन्हें सही तरीके से रीसायकल न किया गया, तो यह न केवल पर्यावरण प्रदूषण बढ़ाएंगी बल्कि भारत की कच्चे माल (लिथियम, कोबाल्ट, निकल) पर विदेशी निर्भरता भी बनी रहेगी।
यहीं से जन्म लेता है यह नया बिज़नेस मॉडल।

बिज़नेस आइडिया: दोहरे अवसर वाला मॉडल
EV बैटरी का इस्तेमाल दो तरह से किया जा सकता है –

  1. रीसाइक्लिंग (Recycling)
    बैटरी से कीमती मटेरियल जैसे लिथियम, निकल, कोबाल्ट और मैंगनीज को निकालकर दोबारा प्रयोग करना।
    • भारत अभी भी इन धातुओं का आयातक है।
    • रीसाइक्लिंग से विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी।
    • कंपनियाँ जैसे Attero Recycling, Lohum पहले से इस क्षेत्र में उतर चुकी हैं, लेकिन अभी भी बाजार बहुत बड़ा है।
  2. सेकंड-लाइफ बैटरियाँ (Second-Life Batteries)
    जब EV में इस्तेमाल की बैटरी कमजोर हो जाती है, तब भी उसकी 70–80% क्षमता बची रहती है।
    • इन्हें स्टेशनरी एनर्जी स्टोरेज में इस्तेमाल किया जा सकता है – जैसे सोलर प्लांट्स, घरों और फैक्ट्रियों में बैकअप पावर।
    • इससे नई बैटरियों की लागत घटती है और बैटरी का जीवनकाल दोगुना हो जाता है।

बिज़नेस मॉडल कैसे बनेगा?

  1. बैटरी कलेक्शन नेटवर्क
    o पुरानी बैटरियों को EV डीलर, सर्विस सेंटर और स्क्रैप मार्केट से इकट्ठा करना।
    o एक “बैटरी बायबैक स्कीम” बनाना जहाँ ग्राहक पुरानी बैटरी बेचकर नई पर डिस्काउंट पाए।
  2. टेस्टिंग और सॉर्टिंग यूनिट
    o बैटरी को टेस्ट कर यह तय करना कि उसे रीसायकल करना है या सेकंड-लाइफ में बदलना है।
  3. रीसाइक्लिंग यूनिट
    o “हाइड्रोमेटलर्जिकल प्रोसेस” या “पायरोमेटलर्जिकल प्रोसेस” से मटेरियल रिकवर करना।
    o इन्हें बैटरी मैन्युफैक्चरर या मटेरियल सप्लायर को बेचना।
  4. सेकंड-लाइफ सॉल्यूशन
    o बैटरियों को repackage करके घरों, ऑफिसों और इंडस्ट्रीज़ के लिए बैकअप पावर यूनिट के रूप में बेचना।
    o Renewable Energy sector (सौर/पवन ऊर्जा) को बैटरी स्टोरेज सॉल्यूशन देना।

संभावित ग्राहक (Target Market)
• EV मैन्युफैक्चरर्स और डीलर्स – जिन्हें बैटरी बायबैक प्रोग्राम चलाना है।
• सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियाँ – जिन्हें सेकंड-लाइफ बैटरी बैकअप चाहिए।
• फैक्ट्रियाँ और MSMEs – जिन्हें सस्ती बैकअप बैटरी चाहिए।
• गृह उपयोग (Home Storage Systems) – UPS और इन्वर्टर की जगह सेकंड-लाइफ बैटरियाँ।

निवेश और लागत
• शुरुआती स्तर पर 10–15 करोड़ रुपये का निवेश एक मझोले प्लांट के लिए चाहिए।
• इसमें शामिल होंगे:
o भूमि और बुनियादी ढाँचा
o रीसाइक्लिंग मशीनरी और सेफ्टी सिस्टम
o टेस्टिंग और सॉर्टिंग लैब
o वेस्ट मैनेजमेंट और प्रदूषण नियंत्रण उपाय
सरकार भी इस क्षेत्र में प्रोत्साहन दे रही है। “Battery Waste Management Rules, 2022” के तहत Extended Producer Responsibility (EPR) लागू है – यानी बैटरी बनाने वाली कंपनियों को इसकी जिम्मेदारी उठानी होगी। इसका सीधा लाभ रीसाइक्लिंग यूनिट्स को मिलेगा।

मुनाफे की संभावना
• एक टन बैटरी से निकलने वाला लिथियम, कोबाल्ट और निकल मिलाकर लाखों रुपये का मूल्य रखता है।
• सेकंड-लाइफ बैटरियों की मांग सस्ती energy storage के रूप में तेजी से बढ़ रही है।
• सही बिज़नेस मॉडल में 2–3 साल में Return on Investment (ROI) मिल सकता है।

चुनौतियाँ
• तकनीकी विशेषज्ञता – सुरक्षित रीसाइक्लिंग के लिए trained manpower और एडवांस्ड मशीनरी की ज़रूरत।
• प्रारंभिक निवेश – शुरुआती पूँजी अधिक है।
• नियम और अनुमति – प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण मंज़ूरी समय ले सकते हैं।
• जागरूकता की कमी – ग्राहक अभी भी बैटरी फेंक देते हैं, उन्हें कलेक्शन नेटवर्क से जोड़ना होगा।

भविष्य की तस्वीर
2030 तक भारत का EV बैटरी रीसाइक्लिंग बाजार $5 बिलियन से अधिक का हो सकता है।
• जैसे-जैसे EV अपनाने की रफ्तार बढ़ेगी, पुरानी बैटरियों का ढेर भी बढ़ेगा।
• सेकंड-लाइफ बैटरियाँ Renewable Energy Storage Revolution की कुंजी साबित होंगी।
• यह क्षेत्र न केवल मुनाफा देगा बल्कि ग्रीन इंडिया मिशन, कार्बन न्यूट्रैलिटी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लक्ष्यों को भी पूरा करेगा।

निष्कर्ष
EV बैटरी रीसाइक्लिंग और सेकंड-लाइफ बैटरियाँ सिर्फ एक बिज़नेस आइडिया नहीं, बल्कि आने वाले औद्योगिक भारत की रीढ़ हैं।
इसमें पर्यावरणीय जिम्मेदारी, सरकारी समर्थन, निवेशकों की दिलचस्पी और सबसे बढ़कर भविष्य की गारंटी शामिल है। यदि आप Industrial Empire की नज़र से सोचें, तो यह क्षेत्र अगले दशक का “Game Changer Industry” साबित हो सकता है।

TAGGED:Digital IndiaElectric Vehicle BusinessEVEV Battery RecyclingEV Business ModelEV Startup IndiaGreen IndiaIndustrial EmpireMake in IndiaSecond-Life Batteries
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