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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > बैंकिंग > विदेशी निवेशकों की वापसी की उम्मीद, भारतीय बाजार पर फिर बढ़ सकता है भरोसा
बैंकिंग

विदेशी निवेशकों की वापसी की उम्मीद, भारतीय बाजार पर फिर बढ़ सकता है भरोसा

Last updated: 26/10/2026 7:37 PM
By
Manu Tiwari
ByManu Tiwari
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भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश और विदेशी निवेशकों की संभावित वापसी
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच भारतीय शेयर बाजार में फिर बढ़ सकती है निवेश की उम्मीद।
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भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी के बीच अब हालात सुधरने की उम्मीद जताई जा रही है। वैश्विक वित्तीय संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि भारत की मजबूत आर्थिक संभावनाएं आने वाले समय में विदेशी पूंजी को फिर आकर्षित कर सकती हैं। हालांकि, निवेशकों की वापसी की रफ्तार वैश्विक बाजारों, ब्याज दरों और रुपये की चाल पर निर्भर करेगी।

मुंबई में आयोजित बिजनेस स्टैंडर्ड के BFSI इनसाइट समिट 2026 में बैंकिंग क्षेत्र के प्रमुखों ने भारतीय बाजार की मौजूदा स्थिति और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। अधिकारियों के मुताबिक, हालिया बिकवाली को केवल भारत की आर्थिक स्थिति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय निवेश रणनीतियां भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं।

वैश्विक हालात सुधरे तो लौट सकती है विदेशी पूंजी

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी पीडी सिंह के अनुसार, विदेशी निवेशकों की बिकवाली में स्थिरता आने के शुरुआती संकेत दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, अभी इसे पूरी तरह समाप्त मानना जल्दबाजी होगी। उनका मानना है कि भारत की विकास दर और आर्थिक बुनियाद मजबूत रहने पर विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी दोबारा बढ़ सकती है।

अमेरिका और भारत की ब्याज दरों में अंतर, रुपये की कमजोरी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनियों में वैश्विक निवेशकों की बढ़ती रुचि जैसे कारक पूंजी के प्रवाह को प्रभावित कर रहे हैं। निवेशक अक्सर उन बाजारों को प्राथमिकता देते हैं, जहां उन्हें बेहतर रिटर्न की संभावना दिखाई देती है।

IPO बाजार में घरेलू निवेशकों की बढ़ती भूमिका

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनियों के सार्वजनिक निर्गम यानी IPO को लेकर उत्साह बना हुआ है। सिटी इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी के बालासुब्रमण्यम के मुताबिक, बाजार में आने वाली कंपनियां अब कारोबार और वित्तीय तैयारी के लिहाज से पहले से अधिक परिपक्व दिखाई दे रही हैं।

प्राथमिक बाजार में घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी भी महत्वपूर्ण बदलाव है। इससे कंपनियों को पूंजी जुटाने के लिए केवल विदेशी निवेशकों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। हालांकि, किसी भी IPO की सफलता कंपनी के कारोबारी मॉडल, मूल्यांकन और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

विकसित भारत के लक्ष्य में विदेशी बैंकों की भूमिका

भारत को आने वाले दशकों में बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए घरेलू बचत के साथ विदेशी पूंजी की भी आवश्यकता होगी। विदेशी बैंक भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से कर्ज जुटाने, विदेशों में कारोबार फैलाने और वैश्विक निवेशकों तक पहुंच बनाने में सहायता करते हैं।

एचएसबीसी इंडिया के प्रमुख हितेंद्र दवे ने भी भारतीय कंपनियों और वैश्विक पूंजी बाजारों के बीच विदेशी बैंकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच कारोबारी संबंधों का विस्तार भी निवेश के नए अवसर पैदा कर रहा है।

छोटे कारोबारियों को कर्ज देने पर जोर

बैंकिंग क्षेत्र के अधिकारियों ने छोटे और मझोले उद्यमों को वित्तीय सहायता देने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। बेहतर कर्ज व्यवस्था से इन कारोबारों को विस्तार, रोजगार सृजन और नई तकनीक अपनाने में मदद मिल सकती है। बैंकों के लिए जरूरी है कि कर्ज का आकलन सावधानी से किया जाए और छोटे कारोबारियों को उचित लागत पर वित्त उपलब्ध हो।

कुल मिलाकर, भारतीय बाजार के लिए विदेशी निवेशकों की वापसी महत्वपूर्ण होगी, लेकिन घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी भी बाजार को मजबूती दे सकती है। आने वाले समय में वैश्विक परिस्थितियों, कंपनियों के प्रदर्शन और निवेश मूल्यांकन से तय होगा कि विदेशी पूंजी भारतीय शेयर बाजार में कितनी तेजी से लौटती है।

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