India-US trade deal: महंगी और दमदार बाइक्स के शौकीनों के लिए बड़ी खुशखबरी है। भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील के तहत अब 800 CC से ऊपर की प्रीमियम मोटरसाइकिलों पर इंपोर्ट ड्यूटी जीरो की जा रही है। इसका सीधा फायदा हार्ले-डेविडसन जैसी अमेरिकी ब्रांड्स को मिलेगा, जिनकी बाइक्स भारत में अब तक भारी टैक्स की वजह से काफी महंगी पड़ती थीं। सरकार के इस फैसले से हाई-एंड बाइक सेगमेंट में हलचल बढ़ने की उम्मीद है और ग्राहकों को ज्यादा विकल्प मिल सकते हैं।
ट्रेड डील में क्या बदला?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, समझौता लागू होते ही 800 CC से 1,600 CC और उससे ज्यादा इंजन क्षमता वाली मोटरसाइकिलों पर इंपोर्ट ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी जाएगी। अभी तक इन बाइक्स पर भारी-भरकम टैक्स लगता था, जिससे इनकी कीमतें आम खरीदार की पहुंच से बाहर हो जाती थीं। नई व्यवस्था से इन प्रीमियम बाइक्स की कीमतों में बड़ा अंतर आ सकता है। उम्मीद है कि मार्च के मध्य तक यह समझौता आधिकारिक रूप से साइन हो जाएगा।
पहले से मिल चुकी थी आंशिक राहत
यह फैसला अचानक नहीं आया है। पिछले साल सरकार ने बड़ी बाइक्स पर इंपोर्ट ड्यूटी पहले ही कुछ हद तक घटाई थी। 1,600 CC तक की पूरी तरह बनी बाइक्स पर ड्यूटी 50 फीसदी से घटाकर 40 फीसदी कर दी गई थी, जबकि 1,600 CC से ज्यादा क्षमता वाली बाइक्स पर यह 50 फीसदी से घटकर 30 फीसदी हो गई थी। अब नई ट्रेड डील के बाद 800 CC से ऊपर की पूरी कैटेगरी पर ड्यूटी जीरो होने जा रही है, जिससे कीमतों में और बड़ी गिरावट संभव है।
हार्ले-डेविडसन को क्यों मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
हार्ले-डेविडसन लंबे समय से भारत में अपनी मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, हाई इंपोर्ट ड्यूटी की वजह से उसकी बाइक्स यहां महंगी पड़ती थीं और बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पाई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई बार भारत की हाई ड्यूटी नीति पर सवाल उठा चुके हैं। अब ड्यूटी खत्म होने से हार्ले जैसी कंपनियों को भारतीय बाजार में दोबारा मजबूती से उतरने का मौका मिलेगा। इससे प्रीमियम बाइक सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राहकों को बेहतर डील मिल सकती है।
भारत में प्रीमियम बाइक बाजार की स्थिति
भारत में हाई-एंड प्रीमियम बाइक्स का बाजार अभी भी सीमित है। ज्यादातर ग्राहक मिड-सेगमेंट बाइक्स को ही प्राथमिकता देते हैं। इसके बावजूद, बड़े शहरों में प्रीमियम बाइक्स की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है। ड्यूटी कम होने या खत्म होने से इन बाइक्स की कीमतें घटेंगी, जिससे ज्यादा लोग इस सेगमेंट की ओर आकर्षित हो सकते हैं। इससे न सिर्फ विदेशी ब्रांड्स की बिक्री बढ़ेगी, बल्कि भारतीय बाजार में टेक्नोलॉजी और फीचर्स के मामले में भी नया ट्रेंड देखने को मिल सकता है।
कारों और ऑटो पार्ट्स पर भी असर
यह ट्रेड डील सिर्फ बाइक्स तक सीमित नहीं है। समझौते के तहत भारत अमेरिकी डीजल कारों (2,500 CC और उससे ज्यादा) और पेट्रोल कारों (3,000 CC और उससे ज्यादा) पर भी ड्यूटी में छूट देगा। वहीं दूसरी ओर अमेरिका भारत से जाने वाले कुछ ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ हटा रहा है, हालांकि कुछ कंपोनेंट्स पर 18 फीसदी टैरिफ बना रहेगा। इससे दोनों देशों के ऑटोमोबाइल सेक्टर में कारोबार बढ़ने की संभावना है।
भारत में हार्ले-डेविडसन की वापसी की तैयारी
हार्ले-डेविडसन का भारत में सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। सितंबर 2020 में कंपनी ने अपना पुराना बिजनेस मॉडल बंद कर दिया था। इसके बाद अक्टूबर 2020 में हार्ले ने हीरो मोटोकॉर्प के साथ पार्टनरशिप की। इस समझौते के तहत हीरो भारत में हार्ले ब्रांड की प्रीमियम बाइक्स बनाएगा, बेचेगा और उनकी सर्विस संभालेगा। साथ ही पार्ट्स, एक्सेसरीज और राइडिंग गियर भी हीरो के नेटवर्क के जरिए उपलब्ध कराए जाएंगे। नई ट्रेड डील के बाद हार्ले के लिए भारत में दोबारा मजबूती से पैर जमाने का रास्ता और आसान हो सकता है।
ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा?
अगर इंपोर्ट ड्यूटी वाकई जीरो होती है, तो आने वाले समय में प्रीमियम बाइक्स की कीमतों में साफ गिरावट देखने को मिल सकती है। इससे बाइक प्रेमियों को पहले से ज्यादा विकल्प मिलेंगे और इंटरनेशनल ब्रांड्स भारत में अपने नए मॉडल लॉन्च करने के लिए उत्साहित होंगी। कुल मिलाकर, यह फैसला भारतीय ऑटो बाजार में प्रीमियम सेगमेंट को नई रफ्तार देने वाला साबित हो सकता है।