देश में क्लीन मोबिलिटी की दिशा में सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। Hydrogen से चलने वाले वाहनों को सुरक्षित और मानकीकृत बनाने के लिए नए सेफ्टी नियमों का ड्राफ्ट जारी किया गया है। इस ड्राफ्ट में कंप्रेस्ड हाइड्रोजन फ्यूल सेल और हाइड्रोजन आधारित इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) वाहनों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने सभी स्टेकहोल्डर्स से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं, ताकि फाइनल नियमों को और मजबूत बनाया जा सके।
आवश्यक क्यों है यह कदम?
भारत तेजी से ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ रहा है और इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ हाइड्रोजन को भी भविष्य का अहम ईंधन माना जा रहा है। हाइड्रोजन से चलने वाली गाड़ियां प्रदूषण कम करने में मदद कर सकती हैं, लेकिन यह गैस अत्यधिक ज्वलनशील होती है। ऐसे में इसकी सुरक्षा, स्टोरेज और उपयोग के लिए सख्त नियम जरूरी हैं। यही कारण है कि सरकार पहले से ही एक मजबूत सेफ्टी फ्रेमवर्क तैयार करने में जुटी है।
ड्राफ्ट में क्या हैं प्रमुख प्रावधान?
सरकार के नए ड्राफ्ट के मुताबिक, हाइड्रोजन से चलने वाले इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) वाहनों के लिए टाइप अप्रूवल और सेफ्टी नियम AIS 195:2023 के तहत तय किए जाएंगे। इसके साथ ही, इन वाहनों में इस्तेमाल होने वाले हाइड्रोजन फ्यूल की गुणवत्ता IS 16061:2021 के अनुसार होनी चाहिए। यह नियम समय-समय पर अपडेट भी किए जाएंगे, ताकि नई तकनीकों और सुरक्षा जरूरतों को शामिल किया जा सके। इससे यह सुनिश्चित होगा कि वाहन न सिर्फ आधुनिक हों, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित भी रहें।
कंस्ट्रक्शन वाहनों के लिए अलग व्यवस्था
ड्राफ्ट में कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट व्हीकल्स के लिए अलग से प्रावधान किए गए हैं। इन वाहनों के लिए सेफ्टी और अप्रूवल नियम AIS 195A:2024 के तहत लागू होंगे। यहां भी हाइड्रोजन फ्यूल के लिए IS 16061:2021 मानक को अनिवार्य किया गया है। यह कदम भारी मशीनों और औद्योगिक उपयोग वाले वाहनों को सुरक्षित बनाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फ्यूल सेल गाड़ियों के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस
हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाले वाहनों के लिए भी सरकार ने अलग दिशा-निर्देश तय किए हैं। पैसेंजर और कमर्शियल वाहनों (Category M और N) के लिए टाइप अप्रूवल AIS 157:2020 के तहत होगा। वहीं, इन वाहनों में इस्तेमाल होने वाले हाइड्रोजन फ्यूल की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानक ISO 14687 के अनुसार तय की जाएगी। इसके अलावा, कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट व्हीकल्स (फ्यूल सेल) के लिए AIS 157A:2024 लागू होगा, जिससे इस सेक्टर में भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
टू-व्हीलर और छोटे वाहनों पर भी फोकस
सरकार ने सिर्फ बड़े वाहनों तक ही सीमित न रहकर टू-व्हीलर और छोटे वाहनों के लिए भी नियम बनाए हैं। Category L के तहत आने वाले इन वाहनों के लिए सेफ्टी और अप्रूवल नियम AIS 206:2024 के अनुसार होंगे। फ्यूल स्पेसिफिकेशन के लिए IS 14687 या IS 16061:2021 में से लागू मानक को अपनाना जरूरी होगा।
इंडस्ट्री और निवेश पर क्या असर पड़ेगा?
इन नियमों के लागू होने से ऑटोमोबाइल कंपनियों को स्पष्ट गाइडलाइंस मिलेंगी, जिससे वे हाइड्रोजन आधारित वाहनों के विकास और लॉन्च में तेजी ला सकेंगी। साथ ही, निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा क्योंकि अब सुरक्षा और गुणवत्ता के मानक पहले से तय होंगे। यह कदम भारत को ग्रीन मोबिलिटी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में भी मदद करेगा।
स्टेकहोल्डर्स के लिए क्या है मौका?
सरकार ने इस ड्राफ्ट पर सभी संबंधित पक्षों – ऑटो कंपनियों, इंडस्ट्री संगठनों, विशेषज्ञों और आम नागरिकों से 30 दिनों के भीतर सुझाव मांगे हैं। इन सुझावों के आधार पर अंतिम नियम तैयार किए जाएंगे, जो भविष्य में हाइड्रोजन मोबिलिटी के रोडमैप को तय करेंगे। सरकार का यह कदम भारत में हाइड्रोजन आधारित वाहनों के लिए एक मजबूत और सुरक्षित ढांचा तैयार करने की दिशा में बड़ा प्रयास है। अगर ये नियम प्रभावी तरीके से लागू होते हैं, तो आने वाले समय में देश में सस्टेनेबल और ग्रीन ट्रांसपोर्ट को नई गति मिल सकती है।