लखनऊ । भारत सरकार की राजभाषा नीति के तहत हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सीएसआईआर – राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (NBRI), लखनऊ में आज से हिंदी पखवाड़ा समारोह का शुभारंभ हुआ। समारोह का आयोजन संस्थान में उत्साहपूर्वक किया गया, जिसमें विभिन्न विभागों के वैज्ञानिक, अधिकारी एवं कर्मचारीगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
इस विशेष अवसर पर सीएसआईआर – केंद्रीय औषधि एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप), लखनऊ के निदेशक, डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी जी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुई। संस्थान के निदेशक डॉ. अजित शासनी ने मुख्य अतिथि का पुष्पगुच्छ एवं शॉल भेंट कर हार्दिक स्वागत किया।
पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन
मुख्य अतिथि डॉ. त्रिवेदी द्वारा संस्थान के पुस्तकालय द्वारा आयोजित हिंदी पुस्तकों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। यह प्रदर्शनी हिंदी साहित्य, विज्ञान, पर्यावरण, वनस्पति विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी से संबंधित पुस्तकों का समृद्ध संग्रह प्रस्तुत करती है, जो कर्मचारियों और शोधार्थियों के लिए प्रेरणादायक सिद्ध हो रही है। इस पहल का उद्देश्य हिंदी में वैज्ञानिक जानकारी की उपलब्धता और उपयोगिता को बढ़ावा देना है।
हिंदी प्रोत्साहन पुरस्कारों का वितरण
इस अवसर पर हिंदी प्रोत्साहन पुरस्कार प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इन पुरस्कारों के माध्यम से उन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने अपने कार्यालय कार्यों में राजभाषा हिंदी का उत्कृष्ट प्रयोग किया है। इससे संस्थान में हिंदी प्रयोग को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा।
संस्थान के निदेशक का स्वागत भाषण
अपने स्वागत भाषण में संस्थान के निदेशक डॉ. अजित शासनी ने सभी उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि, “हमारा संस्थान राजभाषा हिंदी के प्रयोग को लेकर सदैव प्रतिबद्ध रहा है। न केवल प्रशासनिक कार्यों में बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रौद्योगिकी संप्रेषण में भी हिंदी के उपयोग को लगातार बढ़ाया जा रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी पखवाड़ा केवल औपचारिकता नहीं बल्कि एक अभियान है, जिससे हम अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं। विज्ञान का आमजन से संवाद तभी सफल होता है जब वह संवाद आमजन की भाषा में हो। हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि वैज्ञानिक संप्रेषण और सामाजिक जुड़ाव का एक सशक्त माध्यम है। CSIR की मिशन परियोजनाएँ, जैसे फ्लोरीकल्चर, सीधे किसानों से जुड़ी हुई हैं और ऐसे में हिंदी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि संस्थान की राजभाषा पत्रिका को और अधिक समृद्ध एवं उपयोगी बनाने हेतु इसमें वैज्ञानिक लेखों के साथ-साथ किसानों के अनुभवों, केस स्टडीज़ तथा क्षेत्रीय भाषाओं से अनुवादित विषयों को शामिल किया जाना चाहिए।
गतिविधियों की जानकारी एवं कार्यक्रम विवरण
इस अवसर पर संस्थान की राजभाषा कार्यान्वयन समिति के सदस्य सचिव डॉ. कृष्ण कुमार रावत ने विगत एक वर्ष में संस्थान द्वारा राजभाषा हिंदी के प्रगामी प्रयोग को बढ़ावा देने हेतु की गई गतिविधियों की जानकारी साझा की। उन्होंने यह भी बताया कि हिंदी पखवाड़े के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं जैसे निबंध लेखन, वाद-विवाद, आशु भाषण, हिंदी टंकण, कविता पाठ आदि का आयोजन किया जाएगा, जिसमें संस्थान के सभी विभागों से प्रतिभागिता सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि ये कार्यक्रम न केवल हिंदी भाषा के विकास के लिए प्रेरक हैं, बल्कि कर्मचारियों की रचनात्मकता और सहभागिता को भी बढ़ाते हैं।