भारत और चिली के बीच उच्च स्तरीय वार्ता के दौरान व्यक्त की गई प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए दोनों देशों ने 8 मई 2025 को भारत-चिली व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर बातचीत शुरू करने के लिए “संदर्भ की शर्तों” पर हस्ताक्षर किए। इस ऐतिहासिक वार्ता का पहला दौर 26 मई 2025 को नई दिल्ली में शुरू हुआ, जिसका उद्घाटन भारत सरकार के वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने भारत में चिली के राजदूत महामहिम जुआन अंगुलो की उपस्थिति में किया। उद्घाटन समारोह में बर्थवाल ने जोर देते हुए कहा कि यह समझौता भारत और चिली के बीच गहरे आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देगा और मजबूत वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण का रास्ता खोलेगा। इस वार्ता का अगला चरण जुलाई या अगस्त 2025 में होने की उम्मीद है। इससे पहले लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए वर्चुअल माध्यम से अंतर-सत्रीय चर्चाएं आयोजित की जाएंगी।

इससे पूर्व अप्रैल 2025 में चिली के राष्ट्रपति महामहिम गेब्रियल बोरिक फॉन्ट ने भारत की राजकीय यात्रा की थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने सीईपीए वार्ता की शुरुआत का स्वागत करते हुए इसे एक संतुलित, महत्वाकांक्षी, व्यापक और पारस्परिक रूप से लाभकारी पहल बताया। राष्ट्रपति बोरिक ने भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में चिली का प्राथमिक साझेदार बताया और दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने तथा विविधता लाने की आवश्यकता पर बल दिया।
वार्ता के इस पहले दौर में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। चिली की ओर से वार्ता दल का नेतृत्व पाब्लो उरिया ने किया जो चिली के विदेश मंत्रालय के अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंध सचिवालय में एशिया एवं महासागरीय मामलों के निदेशक हैं। वहीं भारत की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव विमल आनंद ने किया। इस दौरान 17 प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई जिनमें वस्तुओं और सेवाओं में व्यापार, प्राकृतिक व्यक्तियों की आवाजाही, उत्पत्ति के नियम, स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता उपाय, व्यापार में तकनीकी बाधाएं, सीमा शुल्क प्रक्रियाएं, व्यापार सुविधा, पारदर्शिता, विवाद निपटान, आर्थिक सहयोग, एमएसएमई, महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण, रणनीतिक खनिजों का व्यापार, सतत विकास, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाएं, निवेश संवर्धन, और बौद्धिक संपदा अधिकार जैसे मुद्दे शामिल थे।
सीईपीए का मुख्य उद्देश्य भारत और चिली के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक संबंधों की पूरी क्षमता को खोलना है जिससे रोजगार सृजन द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सके। इस वार्ता की दिशा और रणनीति विभिन्न हितधारकों और उद्योग क्षेत्र की प्रतिक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए तय की जाएगी। दोनों देश इस समझौते को सफल और सार्थक बनाने के लिए सहयोगपूर्ण और रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।