India-Pakistan match: भारत-पाक का मैच सिर्फ क्रिकेट का नहीं बल्कि भावनाओं और बिज़नेस का भी सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। टीवी से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक, हर ब्रांड इस मौके पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहता है। लेकिन 2025 एशिया कप में इस बार तस्वीर थोड़ी अलग दिख रही है। एक तरफ पहलगाम हमले को लेकर भारत-पाकिस्तान मैच का विरोध हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ एक वर्ग मैच देखने के लिए उत्सुक है, जो चाहता है भारत हर बार की तरह फिर से पाकिस्तान को पटखनी दे। मैच को लेकर उत्साह हमेशा की तरह ऊंचा तो है, मगर विज्ञापन दरों में 15 से 20 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली है।
क्यों गिरी विज्ञापन दरें?
आमतौर पर भारत-पाकिस्तान मैच के लिए टीवी पर 10 सेकंड के विज्ञापन स्लॉट की कीमत 10 से 15 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। इस बार ये दरें कम हो गई हैं। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि इसके पीछे कई वजहें हैं – जिनमें सबसे अहम है रियल मनी गेमिंग (RMG) सेक्टर पर हालिया बैन। गेमिंग कंपनियां क्रिकेट विज्ञापनों की सबसे बड़ी खरीदार थीं। उनके बाहर होने से एड मार्केट पर सीधा असर पड़ा है।इसके अलावा, भारत-पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव और टूर्नामेंट की धीमी शुरुआत भी दरों में गिरावट की वजह बनी है। शुरुआती मैचों में यूएई, हॉन्गकॉन्ग, बांग्लादेश और ओमान जैसी टीमों को दर्शकों से खास रिस्पॉन्स नहीं मिला। नतीजा यह हुआ कि विज्ञापनदाताओं का भरोसा थोड़ा कमजोर पड़ा।
विज्ञापन बिक्री के नए तरीके
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI), जिसके पास 2031 तक एशियाई क्रिकेट परिषद (ACC) के मीडिया राइट्स हैं, ने इस बार विज्ञापन बेचने का तरीका बदला है। सूत्रों के मुताबिक, सात बड़े मैचों के लिए (जिनमें भारत के मैच शामिल हैं) 10 सेकंड के विज्ञापन स्लॉट की फ्लैट रेट 16 लाख रुपये रखी गई है। इस पैकेज में गैर-भारत मैच भी शामिल हैं। यह औसत दर है, हालांकि स्टैंडअलोन भारत-पाक मैचों या पैकेज डील के हिसाब से इसमें थोड़ा बदलाव हो सकता है।
टीवी से डिजिटल तक बदले हालात
टीवी की तुलना में कनेक्टेड टीवी (CTV) पर दरें ज्यादा स्थिर बनी हुई हैं। इस बार CTV पर 10 सेकंड के स्लॉट के लिए 20 से 24 लाख रुपये तक का चार्ज लिया जा रहा है। वहीं, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्री-रोल विज्ञापनों की दर 10 सेकंड के लिए 275 रुपये है। भारत के मैचों में यह बढ़कर 500 रुपये और भारत-पाकिस्तान मैच में 750 रुपये तक पहुंच जाती है। एनवी कैपिटल के मैनेजिंग पार्टनर विवेक मेनन का कहना है कि डिजिटल और CTV रेट्स में बड़ी गिरावट नहीं आई, लेकिन गेमिंग कंपनियों की गैरमौजूदगी ने मार्केट को कमजोर कर दिया है।
फेस्टिव सीजन और नए ब्रांड्स की एंट्री
एड मार्केट में गिरावट के बावजूद त्योहारी सीजन ने एक नई जान फूंकी है। सितंबर से ही त्योहारों की शुरुआत हो गई है और इसी वजह से कई नए ब्रांड विज्ञापन में पैसा लगा रहे हैं। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, एफएमसीजी, मोबाइल हैंडसेट, ऑटोमोबाइल, डेकोरेटिव पेंट्स, फाइनेंशियल सर्विसेज, इंश्योरेंस और टायर कंपनियां इस रविवार होने वाले भारत-पाक मैच में बड़े पैमाने पर विज्ञापन कर रही हैं। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि त्योहारी सीजन के चलते विज्ञापनदाताओं को यह मैच अपनी ब्रांडिंग के लिए सबसे सही मौका लग रहा है।
टीम इंडिया के लिए लीड स्पॉन्सर न होना
इस बार एक और दिलचस्प बदलाव यह है कि भारतीय क्रिकेट टीम के पास कोई लीड स्पॉन्सर नहीं है। विवेक मेनन बताते हैं कि इसका भी विज्ञापन दरों पर असर पड़ा है। आमतौर पर बड़े स्पॉन्सर्स टीम के साथ जुड़े होते हैं और एड रेट्स को ऊपर खींचते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
बड़े ब्रांड्स अब भी तैयार
सोचीयर्स के को-फाउंडर सिद्धार्थ देवनानी कहते हैं कि भारत-पाकिस्तान मैच का रोमांच इतना खास होता है कि बड़े ब्रांड्स इसे भुनाने का मौका कभी नहीं छोड़ते। चाहे दरें गिरी हों या एड मार्केट सुस्त हो, यह मैच हमेशा से विज्ञापनदाताओं के लिए गोल्डन चांस बना रहता है।
नतीजा: बाजार बदला, रोमांच वही
इस बार का एशिया कप विज्ञापन बाजार में बदलाव का संकेत दे रहा है। गेमिंग सेक्टर पर बैन, टूर्नामेंट की धीमी शुरुआत और लीड स्पॉन्सर की गैरमौजूदगी ने एड रेट्स को प्रभावित किया है। लेकिन फेस्टिव सीजन और बड़े ब्रांड्स की भागीदारी ने तस्वीर को संतुलित कर दिया है। भारत-पाकिस्तान मैच का जोश चाहे मैदान पर हो या एड मार्केट में, दोनों जगह अपनी अलग पहचान रखता है। दरें गिरी हों, मगर इस मुकाबले का रोमांच हमेशा की तरह ऊंचाई पर बना हुआ है।