नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच आखिरकार लंबे इंतजार के बाद मुक्त व्यापार समझौता (FTA) फाइनल हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक को संबोधित करते हुए इस ऐतिहासिक समझौते की घोषणा की। उन्होंने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार देते हुए कहा कि यह भारत और यूरोप, दोनों के लिए नए अवसरों का द्वार खोलेगा और दुनिया में भारत की आर्थिक साख को और मजबूत करेगा।
20 साल की बातचीत के बाद मिली बड़ी सफलता
भारत और EU के बीच FTA पर बातचीत की शुरुआत साल 2007 में हुई थी। शुरुआती वर्षों में कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई, जिसके चलते 2013 के बाद वार्ता लगभग ठप हो गई थी। हालांकि, जून 2022 में दोनों पक्षों ने फिर से बातचीत शुरू की और करीब 18 दौर की चर्चा के बाद अब यह समझौता फाइनल हुआ है। इसे भारत की कूटनीतिक और आर्थिक रणनीति की बड़ी जीत माना जा रहा है।
पीएम मोदी बोले – करोड़ों लोगों के लिए अवसर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि यह समझौता भारत और यूरोपीय देशों के करोड़ों नागरिकों के लिए नए अवसर लेकर आया है। उन्होंने कहा कि दुनिया में इस डील की चर्चा “मदर ऑफ ऑल डील्स” के रूप में हो रही है, क्योंकि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से को कवर करती है। पीएम मोदी ने यह भी बताया कि यह समझौता भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते का पूरक है और इससे विनिर्माण क्षेत्र के साथ-साथ सहायक सेवाओं को भी बड़ा फायदा मिलेगा।
ग्लोबल जीडीपी और ट्रेड में बड़ी हिस्सेदारी
भारत-EU FTA को खास इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि यह दुनिया की कुल GDP के लगभग 25% और वैश्विक व्यापार के करीब एक-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। यूरोपीय संघ इस समय भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। ऐसे में यह डील भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में और मजबूत स्थिति दिला सकती है।
इन सेक्टरों को मिलेगा सीधा फायदा
इस समझौते से भारत के कई प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को सीधा और बड़ा फायदा मिलने की संभावना है। खास तौर पर टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट सेक्टर को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, जिससे निर्यात बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर बनेंगे। लेदर और फुटवियर उद्योग को भी ऊंचे टैरिफ से राहत मिलेगी, जिससे भारतीय उत्पाद यूरोप में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। इसके साथ ही जेम्स एंड जूलरी सेक्टर को स्थिर और बड़े बाजार का लाभ मिलेगा। वहीं केमिकल्स और समुद्री उत्पादों के निर्यातकों के लिए यह समझौता लागत घटाने और नए खरीदार जोड़ने का मजबूत आधार तैयार करेगा, जिससे भारत की वैश्विक व्यापार हिस्सेदारी और मजबूत होगी।
इन उत्पादों पर यूरोपीय संघ में लगने वाले आयात शुल्क में बड़ी कटौती हो सकती है। फिलहाल भारतीय निर्यात पर EU का औसत टैरिफ करीब 3.8% है, लेकिन समुद्री उत्पादों पर यह 26%, केमिकल्स पर 12.8% और लेदर गुड्स पर 17% तक पहुंच जाता है। FTA लागू होने के बाद इन दरों में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।
भारत के आयात शुल्क पर भी असर
दूसरी ओर, यूरोपीय संघ से भारत में आने वाले सामानों पर औसतन 9.3% के करीब आयात शुल्क लगता है। इस समझौते के तहत भारत भी अपने बाजार को चरणबद्ध तरीके से EU के लिए खोलेगा। इससे उपभोक्ताओं को बेहतर क्वालिटी के प्रोडक्ट्स और प्रतिस्पर्धी कीमतों का लाभ मिल सकता है।
लोकतंत्र और नियम आधारित व्यापार पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समझौता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र, पारदर्शिता और नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था के प्रति भारत और EU की साझा प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है। यह डील ऐसे समय में हुई है, जब वैश्विक स्तर पर व्यापारिक तनाव बढ़े हुए हैं और कई देश नए साझेदारों की तलाश में हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में भी बढ़ेगा सहयोग
पीएम मोदी ने ऊर्जा क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ऊर्जा निवेश के लिए अवसरों की भूमि बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस दशक के अंत तक तेल और गैस क्षेत्र में 100 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, भारत जल्द ही दुनिया का सबसे बड़ा तेल शोधन केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां रिफाइनिंग क्षमता 260 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 300 मीट्रिक टन की जाएगी।
भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता न सिर्फ भारत के निर्यातकों और उद्योगों के लिए, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। लंबे समय से अटकी इस डील का फाइनल होना भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और आर्थिक मजबूती का साफ संकेत है। आने वाले वर्षों में इस समझौते का असर रोजगार, निवेश और व्यापार के आंकड़ों में साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।