मार्च महीना सिर्फ वित्तीय वर्ष के समापन का समय नहीं होता, यह नए आर्थिक संकल्पों की शुरुआत का भी संकेत देता है। ऐसे में हमारा यह नया अंक परंपरा और तकनीक, गांव और ग्लोबल, स्टार्टअप और सुपरपावर इन सभी को एक साथ जोड़ने की कोशिश करता है। भारत की अर्थव्यवस्था आज जिस मोड़ पर खड़ी है, वहां “लोकल” और “ग्लोबल” के बीच की दूरी तेजी से कम हो रही है।
इस अंक में हमने भारत की उस बदलती तस्वीर को समेटने की कोशिश की है, जहां स्थानीय उत्पाद वैश्विक पहचान बना रहे हैं। मणिपुर का चक हाओ ‘काला सोना’ बनकर सुपर फूड के रूप में विश्व बाजार में जगह बना रहा है। अयोध्या का गुड़ देसी स्वाद के साथ स्वास्थ्य का भरोसा दे रहा है, कन्नौज का इत्र मिट्टी की खुशबू को ब्रांड में बदल रहा है और जालौन का हस्तनिर्मित कागज उद्योग परंपरा को आधुनिक बाजार से जोड़ रहा है। यह आत्मनिर्भर भारत की जमीनी हकीकत है। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना युवाओं को पांच लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण देकर उद्यमिता को बढ़ावा दे रही है, जबकि केंद्रीय बजट 2026 और यूपी बजट से उद्योग और अवसंरचना क्षेत्र को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
वैश्विक परिदृश्य भी तेजी से बदल रहा है। वालमार्ट का एक ट्रिलियन डॉलर क्लब में शामिल होना वैश्विक खुदरा शक्ति का संकेत है, वहीं भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में नए समीकरण बना सकता है। उद्योग 5.0 मानव और मशीन के सहयोग की नई औद्योगिक क्रांति उत्पादन को अधिक संवेदनशील और टिकाऊ बनाने की राह दिखा रही है। अग्निकूल जैसे भारतीय स्टार्टअप अंतरिक्ष क्षेत्र में नई संभावनाएं गढ़ रहे हैं, जबकि संघर्षो से उठकर सफलता पाने वाले उद्यमियों की कहानियां नई पीढ़ी की जिद और साहस को दर्शाती हैं।
मार्च अंक इसी परिवर्तनशील भारत की जीवंत झलक है जहां परंपरा अवसर बन रही है, तकनीक परिवर्तन का माध्यम है और उद्यमिता भविष्य की दिशा तय कर रही है। यदि आप उद्योग जगत से जुड़ी कोई प्रतिक्रिया, सुझाव या विचार साझा करना चाहते हैं, तो हमें व्हाट्सएप करें 9116200951 या ईमेल भेजें industrialempireworld@gmail.com आपकी प्रतिक्रिया हमारे लिए अत्यंत मूल्यवान है और आगामी अंकों को और बेहतर बनाने में हमारी महत्वपूर्ण सहायता करेगी।
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